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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/21/1200x900/21_june_meena_1782057033330_1782057037195_d039dc0f-5c63-4786-bd55-5b258e2dcf7a.jpgहिंदी सिनेमा पर राज करने वाली इस एक्ट्रेस को उसी के पिता ने उसी के पैसों से खरीदे हुए घर से निकाल दिया था। वजह थी शादी। पढ़िए इस एक्ट्रेस की दास्तां।
साल 1933 में मुंबई के दादर की एक चाल में एक बच्ची ने जन्म लिया। माता-पिता ने उसका नाम ‘माहजबीन’ रखा। घर में खाने को कुछ नहीं था। ऐसे में माहजबीन के पिता ने उन्हें एक अनाथालय के बाहर छोड़ दिया था। हालांकि, बाद में वो उन्हें वापस ले आए और जैसे-तैसे उसको पाला। अपनी गरीबी दूर करने के लिए उनके पिता ने उन्हें चार साल से ही फिल्मी दुनिया में धकेल दिया।
4 साल की उम्र में शुरू किया काम
माहजबीन के पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि ये फिजूल का खर्चा है। मासूम माहजबीन को ये लगा कि वह बस कुछ दिनों के लिए स्टूडियो जा रही हैं, फिर स्कूल जाएंगी, खेलेंगी-कूदेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म ‘लेदर फेस’ में पहली बार माहजबीन ने काम किया और इस काम के लिए उन्हें 25 रुपये मिले।
परिवार के लिए खरीदा घर
माहजबीन के पिता समझ गए कि उनकी बेटी उनके घर का चूल्हा जलाने और किस्मत बदलने का जरिया बनेगी। देखते ही देखते, माहजबीन के साथ उनकी बहने भी कमाने लगीं। जब ज्यादा पैसा आने लगा तब उनका परिवार चाल से निकलकर बांद्रा के एक अच्छे मकान में आ गया। लेकिन पाबंदियां कम नहीं हुईं। किसी भी लड़की को अपनी मर्जी से फैसला लेने का हक नहीं था।
चुपचाप की शादी
जब माहजबीन बड़ी हुईं, तो उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला बड़ा फैसला खुद लिया, निर्देशक कमाल अमरोही से शादी करने का। वह जानती थीं कि पिता कभी नहीं मानेंगे इसलिए उन्होंने इस शादी को सबसे छिपाकर रखा। हालांकि, एक दिन उनके पिता के सामने उनका ये राज खुल गया। जब पिता को पता चला, तो उन्होंने मीना को अलग होने पर मजबूर किया, लेकिन इस बार मीना नहीं झुकीं।
पिता ने निकाला
एक दिन जब मीना ने कमाल अमरोही की फिल्म में काम करने का फैसला किया और पिता की मर्जी के एक प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो उनके पिता ने उसी घर का दरवाजा उनके मुंह पर बंद कर दिया जिसे उन्होंने अपनी कमाई से खरीदा था।
पिता को लिखी चिट्ठी
माहजबीन ने बिना किसी हंगामे के अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी, ‘बाबूजी, जो कुछ भी हुआ, मैं छोड़कर जा रही हूं। कृपया कोर्ट जाने की बात न करें, ये बचपना होगा। मुझे आपके घर से अपने कपड़ों और किताबों के अलावा कुछ नहीं चाहिए। ये गाड़ी जो मेरे पास है, मैं कल आपको भिजवा दूंगी…।’
एक्ट्रेस का असली नाम
माहजबीन का फिल्मों में नाम मीना कुमारी था। मीना ताउम्र एक अच्छी बेटी बनी रहीं। उन्होंने अपने पूरे कुनबे को संभाला, लेकिन जब उनकी अपनी जिंदगी में दुखों का सैलाब आया, तो वह बिल्कुल अकेली थीं। बचपन में जो कैमरे की रोशनी उनकी आंखों में चुभी थी, उसने उनकी असल जिंदगी के रंगों को हमेशा के लिए उड़ा दिया। यही वजह थी कि पर्दे पर जब भी वह रोती थीं, तो दर्शकों को लगता ही नहीं था कि वह अभिनय कर रही हैं।
मीना कुमारी की फिल्में
मीना कुमारी 1950 और 1960 के दशक में टॉप पर थीं। इस दौरान उन्होंने हिंदी सिनेमा पर राज किया और ‘बैजू बावरा’, ‘परिणीता’, ‘साहिब बीबी और गुलाम’ एवं ‘पाकीजा’ जैसी कालजयी फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवाया था।
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