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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत के एस्सार समूह के स्वामित्व वाली एक कंपनी आयोवा में 15 अरब डॉलर का स्टील प्लांट लगाएगी.
ट्रंप ने उसी ग्रुप पर भरोसा किया है, जिसे भारत में अपना स्टील का कारोबार बेचना पड़ा था. क़र्ज़ और दिवालिया प्रक्रिया के चलते आख़िरकार समूह को अपनी कई संपत्तियां बेचनी पड़ीं या उन पर से नियंत्रण छोड़ना पड़ा, जिसमें उसका प्रमुख भारतीय स्टील कारोबार भी शामिल था.
अब परिवार अमेरिका के रास्ते एक बार फिर स्टील कारोबार में वापसी कर रहा है.
आयोवा एक महत्वपूर्ण मिडटर्म चुनावी राज्य है, जहाँ अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की नाराज़गी साफ़ दिख रही है. सर्वेक्षणों के मुताबिक, आयोवा के क़रीब 60 फ़ीसदी लोग अर्थव्यवस्था को संभालने के ट्रंप के तरीक़े से असंतुष्ट हैं.
सोमवार को ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि मेसाबी मेटालिक्स कंपनी की यह परियोजना हर साल एक करोड़ टन स्टील का उत्पादन करेगी. इसके लिए कंपनी की मिनेसोटा स्थित एक खदान से लौह अयस्क का इस्तेमाल किया जाएगा.
उन्होंने इसे “अब तक का अमेरिका का सबसे बड़ा प्लांट” बताया और कहा कि इस निवेश से 6,000 तक कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की नौकरियां और क़रीब 2,000 मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग नौकरियां पैदा होंगी.
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रवि रुइया ने पीएम मोदी का भी लिया नाम
एक बयान में एस्सार के सह-संस्थापक रवि रुइया ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत-अमेरिका के ”मज़बूत आर्थिक साझेदारी के विजन” का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि एस्सार लंबे समय के निवेश, औद्योगिक विकास और रोज़गार सृजन के ज़रिए इस विजन में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है.
रवि रुइया की एस्सार स्टील को भारत में दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ा था. इसका नतीज़ा यह हुआ कि एस्सार स्टील का नियंत्रण रुइया परिवार के हाथ से आर्सेलर मित्तल के पास चला गया. भारत में एस्सार समूह के कई विवाद रहे हैं. एस्सार समूह ने एस्सार स्टील के दिवालिया केस में आरबीआई पर ही मुक़दमा कर दिया था.
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने घोषणा से पहले योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस प्लांट में स्टील का उत्पादन 2030 तक शुरू हो सकता है.
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने ट्रंप की इस घोषणा पर लिखा है, ”निवेश की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रही है. इस चुनाव में मिडवेस्ट का राज्य आयोवा असामान्य रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.”
ट्रंप ने अपने तीनों राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में आयोवा में जीत हासिल की है और फ़िलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास आयोवा की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की चारों सीटें हैं.
व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ स्थानीय रिपब्लिकन नेता और एस्सार के रवि रुइया भी मौजूद थे.
एस्सार का यह निवेश इस साल अमेरिका में भारतीय पूंजी के प्रवाह में एक अहम इजाफा है. मार्च में ट्रंप ने टेक्सस के ब्राउन्सविल में एक नई तेल रिफाइनरी की घोषणा की थी, जिसे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का समर्थन हासिल है.
मई में अमेरिकी दूतावास ने भारत की ओर से अमेरिका में किए जा रहे 20.5 अरब डॉलर के निवेश का उल्लेख किया था.
इसमें सबसे बड़ा निवेश सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की न्यू जर्सी स्थित ऑर्गेनॉन एंड कंपनी को 11.75 अरब डॉलर में ख़रीदने की प्रस्तावित योजना है. जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड भी ओहायो और टेक्सस में अपनी सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए 25.5 करोड़ डॉलर खर्च कर रही है.
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एस्सार समूह के एस्सार स्टील का दिवालिया केस
एस्सार की स्थापना 1969 में शशि रुइया और रवि रुइया ने की थी. समूह ने कंस्ट्रक्शन के कारोबार से शुरुआत की और भारत में आर्थिक उदारीकरण के साथ इसका विस्तार हुआ. इसके बाद समूह ने शिपिंग, स्टील, तेल, बिजली, टेलीकॉम, बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में कारोबार किया.
भारत के आर्थिक उदारीकरण के बाद एस्सार के तेज़ी से विस्तार के साथ भारी क़र्ज़ भी बढ़ता गया. समूह ने स्टील, तेल, टेलीकॉम, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया, लेकिन इस विस्तार के साथ क़र्ज़ का बोझ भी बढ़ता गया.
2017 में एस्सार ने एस्सार ऑयल को 12.9 अरब डॉलर में रोजनेफ्ट, ट्रैफिगुरा और यूसीपी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेचने की प्रक्रिया पूरी की थी. भारत में समूह का प्रमुख स्टील कारोबार भी रुइया परिवार के नियंत्रण में नहीं रह सका.
एस्सार स्टील इंडिया दिवालिया प्रक्रिया में चली गई और दिसंबर 2019 में इसे आर्सेलरमित्तल और निप्पॉन स्टील ने अधिग्रहण कर लिया. इस कारोबार का नाम बदलकर आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया यानी एम/एनएस इंडिया कर दिया गया. इसके बाद से एस्सार ने कई वर्षों तक अपनी संपत्तियां बेचने और क़र्ज़ कम करने पर काम किया है.
रुइया परिवार की कंपनी एस्सार स्टील को भारत में अगस्त 2017 से दिसंबर 2019 तक दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ा.
इस नई प्रक्रिया के तहत जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी कंपनी थी. शशि और रवि रुइया ने अपने कारोबार पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी. भारतीय रिज़र्व बैंक ने एस्सार स्टील समेत 12 बड़े डिफॉल्टरों के ख़िलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था.
कभी बेहद मूल्यवान मानी जाने वाली इस कंपनी की सालाना उत्पादन क्षमता एक करोड़ टन थी. लेकिन स्टील की क़ीमतों में गिरावट के बीच भारी क़र्ज़ में डूबी एस्सार स्टील क़रीब सात अरब डॉलर के क़र्ज़ की अदायगी नहीं कर पाई थी.
दिलचस्प है कि रुइया परिवार ने इस मामले में भारतीय रिज़र्व बैंक के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया और आरोप लगाया कि केंद्रीय बैंक ने मनमाने तरीक़े से कार्रवाई की है. इस मामले को ख़ारिज कर दिया गया और दिवालिया प्रक्रिया आगे बढ़ी.
रुइया परिवार से जुड़ी एक कंपनी ने दिवालिया प्रक्रिया के तहत एस्सार स्टील को ख़रीदने की कोशिश की, लेकिन उसे बोली लगाने के लिए अयोग्य क़रार दिया गया.
अक्तूबर 2018 में क़र्ज़दाताओं ने आर्सेलरमित्तल की छह अरब डॉलर की बोली को स्वीकार करने के पक्ष में मतदान किया. दिसंबर 2019 में आर्सेलरमित्तल ने एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली. इसके साथ ही कंपनी ने निप्पॉन स्टील कॉर्पोरेशन (निप्पॉन स्टील) के साथ मिलकर एक जॉइंट वेंचर बनाया है, जिसका नाम आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड रखा.
एस्सार समूह की एनर्जी यूनिट एस्सार ऑयल ने 2008 में भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात के तट पर स्थित वाडीनार रिफाइनरी में कच्चे तेल को रिफाइन करना शुरू किया.
लेकिन 2016 तक कंपनी भारी क़र्ज़ में डूब चुकी थी. भारतीय रिज़र्व बैंक ने उसे डिफॉल्टर के तौर पर सूचीबद्ध कर दिया था और कंपनी अपने तेल कारोबार को किसी ऐसे ख़रीदार को बेचने के लिए बेताब थी, जो उसका अधिग्रहण कर सके.
उस समय परिस्थितियां अनुकूल थीं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनी रोजनेफ्ट में कुछ हिस्सेदारी विदेशी पूंजी के बदले बेचने की कोशिश कर रहे थे.
एस्सार ऑयल का नाम बदलकर नायरा एनर्जी कर दिया गया. इसमें रोजनेफ्ट की 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि रूसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी यूनाइटेड कैपिटल पार्टनर्स के पास भी 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. ख़रीदारों ने इस सौदे के लिए एस्सार को 12.9 अरब डॉलर का भुगतान किया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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