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तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में बरी: क्या आज का बड़ा फैसला इसे पलट देगा?

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बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ आज, 6 अगस्त 2026 को, गोवा सरकार द्वारा तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल के बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर अपना फैसला सुनाने वाली है। तेजपाल को 2021 में यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया गया था। 2013 से देश का ध्यान खींच रहे इस मामले में न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर यह तय करेंगे कि पहले के फैसले को पलटा जाना चाहिए या नहीं।

## फ्लैशबैक: 2013 के आरोप

7 नवंबर 2013 को गोवा में तहलका के Thinkfest के दौरान एक जूनियर कर्मचारी ने आरोप लगाया कि तेजपाल ने Bambolim स्थित Grand Hyatt resort की एक लिफ्ट के अंदर उसका यौन उत्पीड़न किया। शिकायतकर्ता, तेजपाल और तहलका की तत्कालीन प्रबंध संपादक के बीच हुए ईमेल लीक होने के बाद यह घटना सामने आई। छह महीने बाद तेजपाल ने संपादक पद से इस्तीफा दे दिया और उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन जुलाई 2014 में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

2017 में यह मामला सुनवाई के लिए गोवा की सत्र अदालत पहुंचा। चार साल बाद, 2021 में, उस अदालत ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया और फैसला सुनाया कि पीड़िता का व्यवहार यौन उत्पीड़न से बचे व्यक्ति के लिए कानून द्वारा माने जाने वाले “normative behaviour” के अनुरूप नहीं था।

## किसे चुनौती दी जा रही है

गोवा सरकार का तर्क है कि सत्र अदालत ने गंभीर गलतियां कीं:

– उसका दावा है कि शिकायतकर्ता की गवाही लगातार एक जैसी रहने के बावजूद बरी करने का फैसला त्रुटिपूर्ण था।
– सरकार इस बात को चुनौती दे रही है कि तेजपाल के उस महिला को भेजे गए माफीनामे वाले ईमेल को क्या अपराध स्वीकार करने के रूप में समझा जाना चाहिए।

इसके विपरीत, तेजपाल का बचाव पक्ष कहता है कि माफी “संस्थागत दबाव” में, तहलका की प्रबंध संपादक के दबाव के कारण जारी की गई थी और इसे यौन उत्पीड़न की स्वीकारोक्ति नहीं माना जाना चाहिए।

## हाई कोर्ट में सुनवाई: प्रमुख दलीलें

न्यायाधीशों ने तीन दिनों तक विस्तार से सुनवाई की। दोनों पक्षों ने गवाही, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के व्यवहार को लेकर बहस की:

### पहला दिन – लिफ्ट के अंदर

ध्यान घटनाक्रम की तकनीकी प्रक्रिया पर था। अभियोजन पक्ष ने बताया कि तेजपाल ने कथित तौर पर बटन दबाकर लिफ्ट को लगातार चलती अवस्था में रखा और शिकायतकर्ता को अंदर फंसा दिया। बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एक विशेषज्ञ ने गवाही दी थी कि ऐसी स्थिति तकनीकी रूप से असंभव है। उन्होंने CCTV फुटेज का भी हवाला दिया, जिसमें तेजपाल महिला से आगे चलते दिखाई दे रहे हैं, जो इस दावे का खंडन करता है कि उन्हें पीछे खींचा गया था।

### दूसरा दिन – कथित घटना के बाद का व्यवहार

तेजपाल के पक्ष ने तर्क दिया कि कथित यौन उत्पीड़न के बाद शिकायतकर्ता की गतिविधियां उसके सदमे से संबंधित दावे के अनुरूप नहीं थीं। बताया गया कि उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया, अभिनेता Robert De Niro के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए तेजपाल को संदेश भेजा और पेशेवर गतिविधियां जारी रखीं। बचाव पक्ष ने WhatsApp चैट का हवाला देते हुए उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और कहा कि जिरह के दौरान चुनौती दिए जाने पर उन्हें “amnesia and trauma” का इतिहास रहा है।

### तीसरा दिन – मकसद और फेलोशिप अनुदान

बचाव पक्ष के वकील ने सुझाव दिया कि आरोप आर्थिक लाभ से प्रेरित थे। उनका दावा है कि महिला ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर एक किताब लिखने के लिए Rs 1 lakh की फेलोशिप मांगी थी और इससे पहले भी अन्य अवसरों की तलाश की थी। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि यदि वह यौन हिंसा के मुद्दे को उठाना चाहती थीं, तो उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क क्यों नहीं किया और इसके बजाय आंतरिक समझौते के रास्ते क्यों अपनाए।

## अभियोजन पक्ष की दलीलों का जवाब

गोवा के वकीलों ने कहा कि यौन उत्पीड़न के बाद किसी पीड़िता के व्यवहार के लिए कोई निश्चित नियम नहीं हो सकते। उन्होंने घटना के बाद शिकायतकर्ता द्वारा किए गए कार्यों के लिए उसे दंडित करने के खिलाफ चेतावनी दी। सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने बताया कि मामूली विसंगतियां मौजूद हैं, लेकिन मुख्य आरोपों में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने इस बात की रूढ़िवादी धारणाओं पर भरोसा किया कि किसी पीड़िता को किस तरह प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

## क्या दांव पर है

यदि हाई कोर्ट 2021 के बरी किए जाने के फैसले को पलट देता है, तो तेजपाल को दोषी ठहराया जा सकता है और भारतीय कानून की यौन उत्पीड़न से संबंधित धाराओं के तहत संभावित रूप से सजा सुनाई जा सकती है। यह फैसला महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल भी कायम कर सकता है:

– आंतरिक ईमेल और अन्य संचार को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने और उनके महत्व के संबंध में।
– यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता के व्यवहार को लेकर अपेक्षाओं के संबंध में।
– आंतरिक माफीनामे जारी होने पर संस्थागत जिम्मेदारी को परिभाषित करने के संबंध में।

हाई कोर्ट ने पहले 30 जुलाई 2026 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाए जाने के कारण तेजपाल को आज व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

## फैसले के प्रभाव

फैसले को पलटना ऐसे मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय होगा, जिसे कई लोग व्यापक बहसों का प्रतीक मानते हैं—कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, शक्ति-संबंधों, पीड़ितों के समर्थन और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ी बहसों का। यदि बरी किए जाने का फैसला बरकरार रहता है, तो यह उस पहले के निर्णय को मजबूती देगा, जिस पर विभिन्न कानूनी और नारीवादी समूहों ने चिंता जताई थी।

कथित यौन उत्पीड़न के एक दशक से अधिक समय बाद आया यह फैसला मीडिया, कानूनी प्रथा और सार्वजनिक विमर्श पर अपना प्रभाव डालेगा।

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