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12 मार्च 1993 को मुंबई का एक काला दिन कहा जाता है। 12 आतंकवादी हमलों ने उस समय के बॉम्बे को हिला दिया था। एक के बाद एक बम ब्लास्ट में 257 लोगों ने अपनी जान गवाई और 1400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इन धमाकों की शुरुआत 12 मार्च 1993 के दोपहर 1:30 बजे बॉम्बे के स्टॉक एक्सचेंज के बेसमेंट में कार में रखे बम ब्लास्ट से हुई। उकसे बाद मुंबई के होटल, एयर इंडिया की बिल्डिंग के पास, पासपोर्ट ऑफिस और को निशाना बनाया गया। उस दिन एक सिनेमा हॉल भी आतंकवादियों के निशाने पर था। थिएटर में एक देशभक्ति फिल्म चल रही थी और फिर हुआ धमाका।
बॉम्बे बम ब्लास्ट 1993
मुंबई के दादर में प्लाजा सिनेमा हॉल स्थित है। उस समय ये एक सिंगल स्क्रीन हॉल हुआ करता था। उस समय इस थिएटर में राजकुमार और नाना पाटेकर की फिल्म ‘तिरंगा’ चल रही थी। तिरंगा की रिलीज जनवरी 1993 में हुई थी। लेकिन उस समय अक्सर फिल्में लंबे समय तक थिएटर में टिकी रहती थी। और फिल्म ‘तिरंगा’ को लेकर ऑडियंस में जबरदस्त क्रेज भी था।
सिनेमा हॉल में बम का धमाका
शुक्रवार की दोपहर थी 3 बजे के वाला शो देखने ऑडियंस थिएटर में पहुंची हुई थी। ब्रिगेडियर के किरदार में राजकुमार के हर देशभक्ति डायलॉग पर सीटियां बज रही थी। ऑडियंस तालियां बजा रही थी।तभी अचानक प्लाजा सिनेमा में एक जोरदार धमाका होता है। इससे पहले की लोग कुछ समझ पाते फिल्म देखने आए 10 लोग अपनी जान गवां चुके थे। 37 लोग घायल हुए थे। बाद में बम ब्लास्ट के बारे में जानकारी मिली। इस घटना ने लोगों को अंदर तक डरा दिया था। दाऊद इब्राहीम की डी कंपनी पर इन हमलों का आरोप लगा।
फिल्म तिरंगा की कहानी
फिल्म तिरंगा की बात करें तो ये फिल्म जनवरी 1993 में थिएटर में रिलीज हुई थी। फिल्म में एक्टर राज कुमार और नाना पाटेकर ने अहम किरदार निभाया था। बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई इस को अक्सर 15 अगस्त या 26 जनवरी के मौके पर टीवी पर देखा जाता है। इस फिल्म की कहानी और किरदार छाप छोड़ने में कामयाब हुए थे। ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह के किरदार में राजकुमार थे और इंस्पेक्टर शिवाजी वागले बने थे नाना पाटेकर। इस फिल्म में एक और महत्वपूर्ण किरदार था जिसके बिना ये फिल्म अधूरी होती। वो किरदार था प्रलयनाथ गुंडास्वामी का किसे एक्टर दीपक शिकरे ने शानदार तरीके से निभाया था। आज भी ये फिल्म अपनी अलग कहानी और इन किरदारों के लिए याद की जाती है।
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