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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मध्य प्रदेश के वन विभाग और अन्य अधिकारियों पर अपने विदिशा लोकसभा क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घर गिराने, फ़सलों को नष्ट करने और एक कुएं को मिट्टी से भरने की बात कही है.
दरअसल, शिवराज रविवार को बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव पहुंचे, जहां यह कार्रवाई की गई थी.
उन्होंने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, “वन विभाग के अधिकारियों ने यहां जो किया है, वह ज़ुल्म की हद है. मैं उनसे पूछता हूं कि अगर उनके अपने बच्चों को इस तरह दुख में रोता-बिलखता छोड़ दिया जाए, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा? अगर उनकी अपनी मां और पत्नी को इस तरह रोना पड़े, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा? हम ये सभी बातें मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे. मुझे तो लगता है कि मुख्यमंत्री की छवि ख़राब करने के लिए यह साज़िश है.”
शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक़, प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई.
बयान के मुताबिक़, वन विभाग और ज़िला प्रशासन ने कुछ महीने पहले भी इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश की थी, लेकिन शिवराज ने उन्हें आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने का निर्देश दिया था.
बयान में कहा गया कि ज़मीन पर क़ब्ज़े को लेकर रविवार को फिर से घर गिराने की कार्रवाई की गई, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री ने ऐसा न करने के निर्देश दिए थे.
बयान में के मुताबिक़, “शिवराज ने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल से बात की, उन्हें घटना की जानकारी दी और इस कार्रवाई पर अपनी आपत्ति जताई. उन्होंने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बात की और कहा कि वह जल्द ही इस मामले को मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने उठाएंगे.”
उन्होंने कहा कि ग़रीब परिवारों को बेघर करने के लिए ज़िम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा, “जिन परिवारों के घर गिराए गए हैं, उनके लिए नए घर बनाए जाएंगे. जब तक उनके रहने के लिए स्थायी इंतज़ाम नहीं हो जाते, तब तक उनके रहने और खाने की अस्थायी व्यवस्था की जाएगी.”
इस बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने घर गिराने का एक वीडियो एक्स पर साझा किया. उन्होंने लिखा, “मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार!”
उन्होंने आरोप लगाया, “बीजेपी सरकार के भीतर चल रही खींचतान के कारण ग़रीब आदिवासी परिवारों के बेघर होने का ख़तरा पैदा हो गया है.”
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