Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- दिवाली और धनतेरस से पहले सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे खरीदारों को राहत की उम्मीद है
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मिड पूर्व में तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता गोल्ड के भाव को प्रभावित कर रही हैं
- आइए जानते हैं कि क्या धनतेरस तक सोना और सस्ता होगा?
दिवाली और धनतेरस से पहले सोने की कीमतों में नरमी ने उन लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं, जो त्योहारों पर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। भारत में इस दौरान सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में थोड़ी गिरावट भी खरीदारों के लिए राहत लेकर आती है। हालांकि, इस बार सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय तनाव, कच्चे तेल की महंगाई और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोने का भाव 0.42% गिरकर 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.3% गिरकर 4,128.92 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 0.3% की गिरावट दर्ज की गई और यह 4,148.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। ये कीमतें रिपोर्ट में बताए गए कारोबार के समय की हैं, मौजूदा लाइव भाव नहीं।
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
सोने की कीमतों में नरमी की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5 महीने के हाई लेवल के आसपास पहुंच गई थी।
यमन के ईरान सपोर्टेड हूती ग्रुप की ओर से सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने की खबरों ने भी बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं। इससे तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, प्रोडक्शन और दूसरी जरूरी सर्विस की लागत बढ़ सकती है। इसका असर महंगाई पर पड़ता है। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच सकते हैं।
यही स्थिति सोने के लिए दबाव पैदा करती है। सोना महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प माना जाता है, लेकिन इससे नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिनसे उन्हें ब्याज या अन्य रिटर्न मिलता हो। इससे सोने की मांग पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर बाजार की नजर
सोने की कीमतों की अगली दिशा तय करने में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की भूमिका भी अहम रहने वाली है। निवेशक 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर नजर रख रहे हैं। इस बैठक से मिलने वाले संकेत तय कर सकते हैं कि आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरें किस दिशा में जाएंगी।
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों से तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को लेकर बाजार में कुछ नरमी आई है। हालांकि, दिसंबर में दरें बढ़ाए जाने की आशंका भी बनी हुई है। रिपोर्ट में उद्धृत CME FedWatch टूल के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 92% आंकी गई थी। यह उस समय बाजार की उम्मीद को दर्शाता है, न कि फेड के फैसले की गारंटी।
अगर फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है और आगे सख्ती नहीं बढ़ाने के संकेत देता है, तो सोने को सहारा मिल सकता है। इसके उलट अगर केंद्रीय बैंक संकेत देता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, तो सोने की कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका रहेगी।
धनतेरस और दिवाली तक और सस्ता होगा सोना?
त्योहारों से पहले सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में कीमतें और गिर सकती हैं। फिलहाल, इसका निश्चित जवाब देना मुश्किल है, क्योंकि सोने का भाव कई वैश्विक कारकों से प्रभावित हो रहा है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत होती है, तो सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी आने पर सोने की डिमांड को सपोर्ट मिल सकता है।
भारतीय बाजार में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात लागत, स्थानीय मांग और अन्य शुल्क भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट आने पर भारत में सोना उसी अनुपात में सस्ता हो, यह जरूरी नहीं है।
खरीदारों के लिए क्या है सही रणनीति?
धनतेरस या दिवाली पर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालने का फैसला नहीं करना चाहिए कि कीमतें निश्चित रूप से और गिरेंगी। बाजार की दिशा बदलने पर भाव दोबारा ऊपर भी जा सकते हैं। अगर खरीदारी जरूरी है, तो मौजूदा भाव की तुलना अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट से करें। गहनों की खरीद में मेकिंग चार्ज, सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और लागू टैक्स को भी ध्यान में रखें। केवल प्रति 10 ग्राम सोने का भाव देखकर कुल खर्च का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष:- दिवाली से पहले सोने की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत का मौका हो सकती है, लेकिन धनतेरस तक भाव और गिरेंगे या फिर तेजी लौटेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सोने की कीमतों में आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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