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दीपके ने विपक्षी दलों से ‘फ़िक्स’ चुनावों में भाग न लेने को कहा, ज्ञानेश कुमार को दिया ये ‘अल्टीमेटम’

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Source :- BBC INDIA

अभिजीत दीपके

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पढ़ने का समय: 7 मिनट

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को विपक्षी दलों से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो उन्हें चुनावों में भाग लेना बंद कर देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ऐसे चुनावों में लगातार हिस्सा लेना उन्हें वैधता देता है और यह ‘भ्रम’ पैदा करता है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं.

एक्स पर एक पोस्ट में दीपके ने कहा कि विपक्षी दल एक साथ यह दावा नहीं कर सकते कि चुनावों में धांधली हो रही है और फिर उनमें हिस्सा भी लेते रहें.

उन्होंने कहा, “हाँ, चुनावों में धांधली हो रही है. लेकिन जब आप धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेना जारी रखते हैं, तो आप इन चुनावों को वैधता देते हैं और इस भ्रम को बनाए रखने में मदद करते हैं कि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं.”

दीपके ने सवाल किया कि क्या विपक्षी दल इसलिए चुनावों में हिस्सा लेना जारी रखते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि चुनावों से दूर रहने पर उनका राजनीतिक अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा.

उन्होंने कहा, “शायद आप इसलिए चुनाव लड़ते रहते हैं क्योंकि आपको डर है कि अगर आपने ऐसा नहीं किया, तो आपका अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा. लेकिन जब वोट चुराए जा रहे हों, आपके विधायक और सांसदों को अपने पाले में किया जा रहा हो और आपकी पार्टियों को तोड़ा जा रहा हो, तब आप किस तरह के अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?”

अभिजीत दीपके ने और क्या कहा?

अभिजीत दीपके

अभिजीत दीपके ने कहा, “यह राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई नहीं है. आप बस एक ऐसी व्यवस्था में खुद को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जो जब चाहे आपको कमजोर कर सकती है, आपकी पार्टी में फूट डाल सकती है या आपके निर्वाचित प्रतिनिधियों को आपसे छीन सकती है. आप इस तरह आखिर कब तक टिक पाएंगे?”

“और आप चुनाव में धांधली की बात सिर्फ तभी नहीं कर सकते, जब ऐसा उन राज्यों में हो जो आपके लिए मायने रखते हैं, और दूसरे राज्यों में ऐसा होने पर चुप रहें. अगर चुनाव में धांधली हो रही है, तो इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि वह किस राज्य में हो रही है या किस पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है.”

“आप धांधली का आरोप लगाते हुए उसी चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना जारी नहीं रख सकते. आपकी भागीदारी ही इन कथित धांधली वाले चुनावों को वैधता देती है.”

उन्होंने अपील की, “अपनी राजनीतिक सलामती के बारे में सोचने से पहले देश और उसके लोकतंत्र के बारे में सोचिए. अपना रुख स्पष्ट कीजिए और धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेना बंद कीजिए.”

दीपके ने लिखा, “इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र का बचाने का संकल्प लें.”

  • ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए.
  • एसआईआर पर रोक लगाई जाए और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल की जाए.
  • 2023 के क़ानून को रद्द किया जाए और निर्वाचन आयोग में सुधार किए जाएं.

इससे पहले अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है.

इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल ख़ासा चर्चित और विवादों में रहा है. अपने कई फ़ैसलों को लेकर वो विपक्ष के निशाने पर रहे हैं..

दीपके के सुझाव पर क्या है प्रतिक्रियाएं

मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई क़ुरैशी

दीपके के सुझाव को लेकर अभी तक किसी पार्टी ने कोई अपना स्पष्ट नज़रिया ज़ाहिर नहीं किया है लेकिन कुछ लोगों ने इससे जुड़ी चिंताएं साझा की हैं.

डीएमके नेता ए. सरवनन ने चिंता ज़ाहिर की कि चुनाव बहिष्कार के इस कदम से विपक्ष को ही नुकसान हो सकता है.

सरवनन ने कहा, “इस मामले को देखने का यह एक नज़रिया है. इससे फ़ायदे के बजाय नुक़सान ज़्यादा होगा, क्योंकि इसे इस तरह पेश किया जाएगा कि हम बीजेपी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने से डरते हैं.”

उन्होंने कहा, “वे चुनाव कराएंगे और जीत हासिल करेंगे. इसके बाद भारत एक कमजोर तानाशाही वाला देश बन जाएगा. हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए.”

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक विनोद शर्मा ने दीपके की पोस्ट साझा करते हुए एक्स पर लिखा, “अगर चुनाव में धांधली करने वाली व्यवस्था बनी रहती है, तो मैं चुनाव बहिष्कार के पक्ष में हूं.”

“लेकिन मुझे इस बात का भी अहसास है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनी संवैधानिक संस्थाएं अगर उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आती हैं, तो बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसलिए चुनाव बहिष्कार का फैसला लेने से पहले गहराई से सोचें.”

महबूबा मुफ़्ती की पार्टी पीडीपी के विधायक आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी ने कहा, “इंडिया गठबंधन लगातार इन चिंताओं को उठाता रहा है कि वोटों की चोरी हो रही है और निर्वाचन आयोग उसे सौंपी गई ज़िम्मेदारी के अनुसार काम नहीं कर रहा है.”

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “मेरा मानना है कि नैतिक आधार पर भारत निर्वाचन आयोग को इस्तीफा दे देना चाहिए. साथ ही, इस बात की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए कि क्या भारत निर्वाचन आयोग वास्तव में अपनी ज़िम्मेदारी से भटका है और क्या वह किसी राजनीतिक मक़सद से काम कर रहा था.”

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त उनकी बात मानने वाले नहीं हैं. शिक्षा मंत्री के मामले में ऐसा हो सकता था, क्योंकि सरकार के जरिए उन पर दबाव डाला जा सकता था. भारत सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को मजबूर नहीं कर सकती. वह केवल महाभियोग के जरिए उन्हें पद से हटा सकती है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि 48 घंटे का यह नोटिस कैसे काम करेगी?”

‘विपक्ष क्यों लगाता है चुनिंदा धांधली के आरोप’

गुरुवार को नई दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग वोट चुरा रहा है और ECI प्रमुख से 48 घंटे के भीतर इस्तीफ़े की मांग की. इस दौरान सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका भी मौजूद थे.

दीपके ने विपक्षी दलों पर यह आरोप भी लगाया कि वे चुनावी धांधली के मुद्दे को राज्य या प्रभावित राजनीतिक दल के हिसाब से चुनिंदा तरीक़े से उठाते हैं.

सीजेपी के संयोजक ने कहा, “और आप चुनावी धांधली की बात सिर्फ़ तब नहीं कर सकते, जब यह उन राज्यों में हो जो आपके लिए मायने रखते हैं और जब यह कहीं और हो तो चुप रहें. अगर चुनावों में धांधली हो रही है, तो इससे फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए कि राज्य कौन-सा है या किस पार्टी पर इसका असर पड़ा है.”

उन्होंने दावा किया, “आप यह कहते नहीं रह सकते कि मैच फ़िक्स है और फिर उसे खेलते भी रहें. इन धांधली वाले चुनावों को वैधता देने वाली एकमात्र चीज़ आपकी भागीदारी है.”

विपक्षी दलों से लोकतंत्र को अपने राजनीतिक हितों से ऊपर रखने की अपील करते हुए दीपके ने कहा, “अपने राजनीतिक अस्तित्व के बारे में सोचने से पहले देश और उसके लोकतंत्र के बारे में सोचिए. अपना रुख़ स्पष्ट कीजिए और धांधली वाले चुनावों में भाग लेना बंद कीजिए.”

फ़िक्स क्रिकेट मैच का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी चुनाव को प्रतिस्पर्धी दिखाया जा सकता है, भले ही उसके नतीजे में कथित तौर पर हेरफेर किया गया हो.

उन्होंने कहा, “जैसे किसी फ़िक्स मैच में हर कैच नहीं छोड़ा जाता. कुछ कैच पकड़े जाते हैं और मैच को आख़िरी ओवर तक भी खींचा जा सकता है, ताकि यह एक क़रीबी मुक़ाबला दिखे.”

दीपके ने कहा, “उसी तरह आपको कुछ जीत दी जाएंगी, बस इतनी कि आप चुनाव लड़ते रहें और लोगों को यक़ीन हो कि वास्तव में मुक़ाबला हुआ था. ये कुछ जीतें वे टुकड़े हैं जो आपको खेल में बनाए रखते हैं और पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाते हैं.”

जंतर-मंतर 2.0 की तैयारी

17 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर, 'कॉकरोच जनता पार्टी'  के विरोध प्रदर्शन के तहत अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 20वें दिन पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के साथ मौजूद थे.

दीपके ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े कीअ मांग की थी और कहा था कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन शुरू करेंगे.

ये बयान बुधवार को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के एक दिन बाद आया था.

रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फ़ैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति जताई थी.

इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े फ़ैसले भी शामिल थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची की सफ़ाई और मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन के दौरान लिए गए फ़ैसलों पर सवाल उठाए थे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS