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दृश्यम से भी धांसू है इस मलयालम फिल्म की कहानी, IMDB पर 8 रेटिंग, 4 पुलिसवाले और 2 लाशें….

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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मलयालम सिनेमा ने दृश्यम से भी बड़ी एक फिल्म बनाई है। चार पुलिस वाले और एक गलती। दो लाशें। ये कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी। फिल्म की कहानी और iMDB रेटिंग जानिए यहां-

मलयालम सिनेमा हर महीने एक ऐसी फिल्म के साथ धमाका करता है जिसका तोड़ किसी दूसरी फिल्म इंडस्ट्री के पास नहीं है। मलयालम सिनेमा ने ही दृश्यम जैसी फिल्म दी थी जिसने ऑडियंस पर छाप छोड़ी। अब एक ऐसी ही फिल्म खबरों में बनी हुई है जिसका नाम है प्रधामा दृष्टिया कुट्टक्कर Pradhama Drishtiya Kuttakkar। फिल्म की कहानी चार पुलिस ऑफिसर और दो डेड बॉडीज की है। इस फिल्म में एक सीनियर पुलिस ऑफिसर और उसके केस सुलझाने के तरीके पर किताब का भी जिक्र है। यही किताब कहानी को आगे बढ़ने में मदद करती है। ये फिल्म एक बार जरूर देखी जानी चाहिए। IMDB ने इस 8 की शानदार रेटिंग की दी है। अभी ये फिल्म थिएटर में चल रही है। OTT पर आने का इंतजार हो रहा है।

मलयालम फिल्म ने लगाई आग

मलयालम थिएटर में एक फिल्म चल रही है जिसका नाम है प्रधामा दृष्टिया कुट्टक्कर। इस फिल्म की कहानी की शुरुआत दो चोरों से होती है। इन चोरों में एक महिला भी शामिल है। इन चोरों का चोरी करने का तरीका आम नहीं है। बल्कि ये कई दिनों तक एक घर की रेकी करते हैं। वहां के मेन गेट पर एक काला धागा बांधते हैं। अगर वो धागा गेट पर ही रहा मलतब घर में सुबह से शाम तक कोई नहीं आया। दोनों एक घर में घुसते हैं, वहां जो होता है उससे दोनों छोरों के होश उड़ जाते हैं।

दृश्यम से भी धांसू कहानी

अब कहानी एक अब्राहम नाम के पुलिस ऑफिसर पर जाती है जिसकी मौत हो जाती है। उसकी पत्नी अलिनौर बेटी का वही सहारा होता है। अब्राहम की डेथ के बाद पुलिस डिपार्टमेंट उसे निचले दर्जे की नौकरी दे देता है। अलीना दिमाग वाली महिला होती है। उसे इन्वेस्टीगेशन के केस में दिलचस्पी होती है। वो पुलिस ऑफिसर हरीश की किताब को पढ़ती रहती है। वो समझने की कोशिश करती है कि आखिरी किसी केस को सुलझाने के लिए किन बारीकियों पर ध्यान देना पड़ता है। हरीश ने अपने काम करने के तरीकों को किताब में लिखा था। दूसरी तरह अलीना जिस पुलिस स्टेशन में बैठती है वहां के लोगों से उसकी अच्छी दोस्ती हो जाती है। वहां एक महिला और दो पुलिस अधिकारी उसके दोस्त बन जाते हैं। इन चारों की कहानी अलग है, निजी जिंदगी में चोट गाए हुए हैं। किसी के संतान नहीं है तो कोई एक शादीशुदा महिला को उसके पति से बचाना चाहता है।

एक अनजान शख्स की मौत

अब कहानी फिल्म के तीसरे हिस्से पर पर पहुंचती है। अलीना और उसके साथ ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले में एक आदमी को हिरासत में लेते हैं। आदमी ने शराब पी रखी थी। पुलिस उसे हिरासत में लेकर आती है। अलीना कहती है कि इसकी गाड़ी की डिग्गी भी चेक करो उसमें जरूर कुछ मिलेगा। तभी वो आदमी पुलिस के साथ झड़प करने लगता है और बंदूक निकाल लेता है। ये कोई मामूली आदमी नहीं था। पुलिस के चारों अधिकारीयों को उस आदमी से बंदूक छीनने में समय लगता है। छीना-झपटी हो जाती है। इसी दौरान गोली उस आदमी को लग जाती है और पुलिस स्टेशन के सामने ही वो मर जाता है। ये हादसा उन चारो पुलिस वालों के सामने होता है जिसमें अलीना भी शामिल होती है। सभी डर जाते हैं। और उन्हें याद आता है कि अगर उन्हें जेल हुई तो उनकी निजी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। ऐसे में फैसला लेते हैं कि वो इस लाश को कहीं छुपा देंगे।

पुलिस वालों से हो जाती है गलती

इसी दौरान अलीना को याद आता है कि इस आदमी की डिग्गी भी चेक करनी चाहिए। वो जब डिग्गी खोलते हैं तो उसमें एक महिला की लाश पहले से मौजूद होती है। अब चारों की दिक्कतें और बढ़ जाती है।अब उन्हें एक नहीं बल्कि दो लाशों को छुपाना है। सबसे पहले चारों CCTV फुटेज देखते हैं, उसमें वो आदमी नजर आता है, पुलिस वालों के साथ झड़प भी दिखाई देती है। गोली चलने की आवाज भी सुनाई देती है। लेकिन मरने वाला सीन रिकॉर्ड नहीं होता। ये चारों के लिय राहत थी। वो इंतजार करते हैं कि ये मामला बस 14 दिन के लिए शांत रहे ताकि CCTV फुटेज अपने आप खाली हो जाए।

चोर की हो जाती है डेथ

अब कहानी उस चोरी वाले घर पर आती है जो हमने आपको पहले पैराग्राफ में बताया था। दरअसल, जो चोरी करने गए थे वो चोर ही था जो पुलिस के साथ हाथापाई में मारा जाता ही और वो महिला उसकी साथ ही चोर होती है जो चोरी वाले घर में मर जाती है।

एक किताब जो पूरी कहानी को आगे बढ़ाती है

अब इस आदमी का केस उसी पुलिस ऑफिसर के पास जाता है जिसकी अलीना फैन होती है उनकी किताब पढ़ कर इन्वेस्टीगेशन समझती है। जब हरीश उन चोरों की तलाश में उसी पुलिस स्टेशन तक पहुंच जाता है। उसे चारो पुलिस ऑफिसर पर शक भी होता है लेकिन अलीना ने उसकी किताब से पहले ही सारे तरीके पढ़ लिए थे और वो अपना बर्ताव वैसे ही रखती है। लें हरीश को फिर भी अलीना पर शक होता है। वो रंगे हाथों उन्हें पकड़ भी लेते हैं। लेकिन अलीना बाजी पलट देती है। वो अलीना का सच बोलने वाला टेस्ट भी करवाते हैं जिससे बंदूक की गोली का पता लगाया जा सके। वो गोली मिल भी जाती है लेकिन अलीना, हरीश को इतनी अच्छी तरह से पढ़ लेती है कि कोर्ट में उन्हें मुजरिम साबित कर पाना मुश्किल हो जाता है। अलीना जीत जाती है। लेकिन ये कहानी आपको देखने के बाद ज्यादा पसंद आएंगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN