Source :- LIVE HINDUSTAN
Right Time Of Eating Food: आयुर्वेद के मुताबिक आप क्या खा रहे हैं, इसके साथ-साथ ये भी जरूरी है कि कितने बजे खा रहे हैं। सही समय पर अगर खाना खाया जाए तो ये बेहतर तरीके से पचता है और शरीर को भी जरूरी पोषण देता है।
अच्छी सेहत का सबसे पहला नियम है अच्छा खानपान। आजकल लोग इसपर तो ध्यान दे देते हैं कि वो क्या खा रहे हैं, लेकिन कब खा रहे हैं इसका कोई ख्याल नहीं। आयुर्वेद की मानें तो सुबह के नाश्ते से ले कर रात के डिनर का एक सही समय होता है। दरअसल शरीर की पाचन शक्ति यानी अग्नि दिनभर एक जैसी नहीं रहती। इसलिए अगर भोजन इसे ध्यान में रखकर किया जाए, तो बेहतर तरीके से पचता भी है और उसके गुण भी शरीर में बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब होते हैं। आजकल तो खाने की गलत टाइमिंग की वजह से लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां भी कॉमन होती जा रही हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि एक परफेक्ट मील टाइमिंग क्या हो सकती है। तो आइए विस्तार में जानते हैं आयुर्वेद का इसपर क्या कहना है।
सुबह का नाश्ता कब करना चाहिए?
सुबह का नाश्ता दिनभर की सबसे जरूरी मील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आपको उठने के दो घंटे के भीतर ही अपना नाश्ता कर लेना चाहिए। आमतौर पर 7 से 8 बजे के बीच की टाइमिंग एकदम परफेक्ट मानी जाती है। उठने के बहुत देर बाद या 11 बजे के बाद ब्रेकफास्ट अवॉइड ही करना चाहिए क्योंकि इसका कोई खास मतलब नहीं रह जाता।
दोपहर का खाना खाने का सही समय क्या है?
दोपहर के खाने को ले कर आयुर्वेद का सिंपल सा ये नियम याद रखें कि आपके सुबह के नाश्ते और लंच में लगभग चार घंटे का अंतर जरूर होना चाहिए। दोपहर साढ़े 12 से ले कर 2 बजे का समय इसके लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस दौरान शरीर की पाचन शक्ति प्रबल होती है, इसीलिए पौष्टिक और भर पेट भोजन करने की सलाह दी जाती है। हालांकि कोशिश करें कि 3 बजे से लेट लंच ना किया जाए।
रात का खाना कब तक खा लेना चाहिए?
आयुर्वेद के अनुसार रात का भोजन जितना जल्दी हो सके कर लेना चाहिए। सूर्यास्त से पहले का समय उपयुक्त माना जाता है, लेकिन आजकल के लाइफस्टाइल में कई बार ये पॉसिबल नहीं हो पाता। ऐसे में आप कोशिश करें कि शाम 6 से 8 बजे के बीच अपना डिनर खत्म कर लें। रात 10 बजे के बाद खाना अवॉइड ही करना बेहतर है। आयुर्वेदिक नियम कहता है कि रात का खाना सोने से लगभग 3 घंटे पहले खा लेना चाहिए। ये अच्छी तरह पचता है और नींद में भी कोई समस्या नहीं होती।
बार-बार खाने की आदत सही नहीं
आयुर्वेद में बार-बार खाना खाने की आदत को सही नहीं माना जाता है। नियम कहता है कि अगला भोजन तभी करना चाहिए जब पिछला भोजन अच्छी तरह पच गया हो। इसलिए खाने की बीच का गैप और टाइमिंग काफी मायने रखती है। इससे आपके डाइजेशन पर ज्यादा लोड नहीं पड़ता और भूख भी स्वाभाविक रूप से लगती है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।
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