Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Jeff Zelevansky/Getty Images
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 6 मिनट
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि ‘भारत के लोग अखंड भारत में विश्वास’ रखते हैं, जबकि पाकिस्तान के मुसलमान सहन करने में भरोसा करते हैं.
उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय को लेकर भी दावा किया कि वहां क़रीब 4 प्रतिशत हिंदू आबादी है और उन्हें अन्य लोगों की तरह ही स्वतंत्रता प्राप्त है.
उनकी इस टिप्पणी को लेकर गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने ज़रदारी के ‘मिस्टर 10 परसेंट’ वाले आरोप का ज़िक्र करते हुए तंज़ कसा है.
वहीं, कई लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी निरंतर घट रही है.
ज़रदारी ने क्या कहा
इमेज स्रोत, Vishal Bhatnagar/NurPhoto via Getty Images
दरअसल, पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर 14 अगस्त को आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने संबोधन दिया. इसी दौरान उन्होंने अखंड भारत और पाकिस्तान में हिंदू आबादी को लेकर अपनी बात रखी.
ज़रदारी ने कहा, “भारतीयों का नज़रिया अलग है. उनकी अपनी सोच और अपने एजेंडा है. भारत अखंड भारत में विश्वास रखता है. लेकिन हम मुसलमान हैं. वे नहीं हैं. लेकिन हम ऐसे सोच वाले मुसलमान हैं जो सहन करते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान में 4 प्रतिशत हिंदू आबादी है. वे यहां उतने ही आज़ाद हैं, जितने कहीं और. वे भारत के बजाय हमारे साथ रहना ज़्यादा पसंद करेंगे.”
ज़रदारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जावेद अख़्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट की.
जावेद अख़्तर ने लिखा, “मिस्टर ज़रदारी, पाकिस्तान के वह शख़्स हैं जो बेनज़ीर भुट्टो से शादी के बाद सुर्ख़ियों में आए, कहते हैं कि उनका देश अपनी 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को सहन करता है. मिस्टर ज़रदारी, मैं समझता हूं कि आप उन सभी के प्रति असंवेदनशील रहते हैं जो 10 परसेंट से कम हैं.”
जावेद अख़्तर ने ’10 परसेंट’ का ज़िक्र क्यों किया?
इमेज स्रोत, AAMIR QURESHI/AFP via Getty Images
जावेद अख़्तर की पोस्ट में ’10 परसेंट’ का ज़िक्र आसिफ़ अली ज़रदारी के पुराने राजनीतिक दौर से जोड़कर देखा जा रहा है.
बेनज़ीर भुट्टो की मौत से पहले ज़रदारी की सार्वजनिक छवि काफ़ी विवादित रही थी. फ़रवरी 2008 में हुए पाकिस्तान के नेशनल इलेक्शन के प्रचार के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने भी उन्हें सार्वजनिक तौर पर कम से कम सामने रखने की कोशिश की थी.
उस दौर में ज़रदारी को पार्टी के लिए राजनीतिक बोझ के तौर पर देखा जाता था. वह भ्रष्टाचार के आरोपों में कई साल जेल में भी रह चुके थे.
उन पर कथित तौर पर कमीशन और रिश्वत लेने के आरोप लगे थे. इन्हीं आरोपों के चलते उन्हें विरोधी ‘मिस्टर 10 परसेंट’ भी कहने लगे थे.
1990 में ज़रदारी एक अन्य विवाद में घिर गए थे. उन पर एक कारोबारी के पैर में रिमोट से संचालित बम बांधकर उसे बैंक भेजने का आरोप लगा था.
आरोप था कि कारोबारी को अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए मजबूर किया गया था.
हालांकि, ज़रदारी पर लगाए गए ये आरोप कभी साबित नहीं हुए. उस समय पीपीपी ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की शक्तिशाली ख़ुफ़िया व्यवस्था ज़रदारी को बदनाम करने की कोशिश कर रही है, ताकि इसका असर बेनज़ीर भुट्टो की राजनीतिक छवि पर पड़े.
पाकिस्तान में हिंदू आबादी
इमेज स्रोत, ASIF HASSAN/AFP via Getty Image
पाकिस्तान के राष्ट्रपति के दावे पर भारत के कुछ लोगों ने दावा किया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी घट रही है.
सीएनएन-न्यूज़18 की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर नबीला जमाल ने ज़रदारी का वीडियो पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान की अपनी जनगणना के आंकड़े आबादी की एक अलग तस्वीर दिखाते हैं: 1947 में उसकी आबादी में हिन्दुओं की हिस्सेदारी क़रीब 14.6% थी, जो 2023 की जनगणना के मुताबिक़ घटकर 2.17% रह गई है.”
दरअसल, पाकिस्तानी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वहां पर हिन्दू आबादी क़रीब 55 लाख है. जबकि पाकिस्तान हिन्दू पंचायत और हिन्दू काउंसिल कहती है कि ये संख्या क़रीब 80 लाख है. सबसे ज़्यादा हिन्दू आबादी सिंध प्रांत में रहती है.
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसतुल्लाह ख़ान का कहना है कि पाकिस्तान में 90 फ़ीसदी हिन्दू आबादी सिंध के 10 ज़िलों में रहती है. पंजाब में ढाई लाख, बलूचिस्तान में 60 हज़ार और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में तक़रीबन 6 हज़ार हिन्दू आबादी बताई जाती है.
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के ईशनिंदा क़ानूनों की ओर ध्यान दिलाया है.
उसका कहना है कि इन क़ानूनों को साफ़ तरीक़े से नहीं बनाया गया है और पुलिस और अदालतें इन्हें मनमाने तरीक़े से लागू करती हैं. इससे धार्मिक अल्पसंख्यकों को परेशान किया जाता है और उनके साथ भेदभाव होता है.
हाल के सालों में पाकिस्तान से भारत आए हिंदुओं ने बीबीसी को बताया कि उन्हें सामाजिक और धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ता था. ख़ास तौर पर सिंध प्रांत में हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाया जाना एक बड़ी समस्या है.
शहबाज़ शरीफ़- ‘पाकिस्तान शांति चाहता है’
इमेज स्रोत, AHMAD GHARABLI/AFP via Getty Images
इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी भारत को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की एक-एक बूंद उनके देश के लिए ‘रेड लाइन’ है और अगर भारत इसे नहीं मानता है तो उसे सीधा जवाब दिया जाएगा.
शहबाज़ शरीफ़ ने यह बयान गुरुवार को इस्लामाबाद में ‘विजय स्मारक’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए दिया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है लेकिन इसे कमजोरी समझे जाने की भूल नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं. लेकिन शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए.”
दरअसल, भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराते हुए सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा तौर पर रोकने का एलान किया था.
शहबाज़ शरीफ़ ने अपने भाषण में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के साथ-साथ सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए समझौतों का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया को सभी तरह के संघर्षों से मुक्त देखना चाहता है और नए संघर्षों को रोकने की कोशिश कर रहा है. शरीफ़ के मुताबिक़, इसी वजह से पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच ज़िम्मेदार मध्यस्थ की भूमिका निभाई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
SOURCE : BBC NEWS




