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पाकिस्तान में गुलामी अभी खत्म नहीं हुई, केवल तरीका बदला है; मौलाना ने खूब सुनाया

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Source :- LIVE HINDUSTAN

फजलुर रहमान ने पूछा कि बलूचिस्तान के रेको डिक में खनन कौन कर रहा है और वहां से निकाले जा रहे संसाधनों का लाभ किसे मिला है? उनका आरोप है कि पाकिस्तान अपने विशाल खनिज भंडार का वास्तविक लाभ नहीं उठा पा रहा है।

पाकिस्तान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने देश के हालात को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में राजनीतिक गुलामी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। वैश्विक संस्थाओं का प्रभाव अब भी पाकिस्तान की संप्रभुता पर बना हुआ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और अन्य कर्जदाताओं पर पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि देश की आर्थिक मजबूरियां उसकी नीतिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं और पाकिस्तान को अपने संसाधनों व आर्थिक फैसलों पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की जरूरत है।

JUI-F प्रमुख ने कहा कि चीन पाकिस्तान से खुश नहीं है और बलूचिस्तान में खनन परियोजनाओं से धीरे-धीरे पीछे हट रहा है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के खनिज संसाधनों और खनन परियोजनाओं को लेकर देश में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वायरल वीडियो में फजलुर रहमान को पाकिस्तान के खनिज संसाधनों, खनन परियोजनाओं, आर्थिक निर्भरता और देश की संप्रभुता पर चर्चा करते दिख रहे हैं।

‘पाकिस्तान में राजनीतिक गुलामी खत्म नहीं हुई’

फजलुर रहमान ने कहा कि बलूचिस्तान की कुछ प्रमुख परियोजनाएं अभी ठीक से चल रही हैं। उन्होंने पाकिस्तान के खनिज संसाधनों से होने वाले लाभ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि बलूचिस्तान प्रांत के चगाई जिले में स्थित रेको डिक में आखिर खनन कौन कर रहा है और वहां से निकाले जा रहे संसाधनों का लाभ किसे मिल रहा है? उनका आरोप है कि पाकिस्तान अपने विशाल खनिज भंडार का वास्तविक लाभ नहीं उठा पा रहा है। उन्होंने सैंदक प्रोजेक्ट के प्रदर्शन की भी आलोचना की और कहा कि दशकों तक काम होने के बावजूद यह परियोजना अपेक्षित नेतीजे देने में विफल रही है।

फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की समस्याओं के समाधान के लिए प्रांतों के बंटवारे के प्रस्तावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि नए प्रांत बनाना देश की समस्याओं का सीधा समाधान नहीं है। उनके अनुसार, अगर नए प्रांत बनाने का कोई प्रस्ताव सामने आता है तो उसका आकलन जमीनी परिस्थितियों और व्यावहारिक संभावनाओं के आधार पर किया जाना चाहिए। चीन के बलूचिस्तान की खनन परियोजनाओं से पीछे हटने संबंधी उनका दावा ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को विदेशी निवेश आकर्षित करने और आर्थिक स्थिति सुधारने के अहम माध्यम के रूप में देख रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN