Source :- LIVE HINDUSTAN
इस ताजा कार्रवाई के बाद यूरोपीय संघ द्वारा अब तक रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की कुल संख्या बढ़कर 4,500 से अधिक हो गई है। यूरोपीय देश ट्रंप के हालिया ऐलान से बेहद नाराज हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नरम रुख के बीच रूस के सैन्य ढांचे को निशाना बनाते हुए यूरोपीय संघ ने सोमवार को मॉस्को पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की। उसने 1600 रूसी लोगों, कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए। ये सभी रूसी हथियार उद्योग से जुड़े हैं। ईयू ने कड़े प्रतिबंधों का ऐलान ऐसे समय किया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ तेल समझौते की घोषणा की थी।
ये प्रतिबंध मुख्य रूप से रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे और हथियार निर्माण, सप्लाई चेन से जुड़े लोगों और कंपनियों पर लगाए गए हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि नए प्रतिबंधों में आधे से अधिक नाम रूस की बैलिस्टिक मिसाइल आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित हैं।
इसके अलावा यूक्रेन के कब्जे वाले हिस्सों में फर्जी चुनावों को आयोजित करने या उसमें शामिल होने के आरोप में 77 लोगों को भी इस दायरे में लाया गया है। इन लोगों और संस्थाओं की संपत्ति फ्रीज कर दी जाएगी। इस ताजा कार्रवाई के बाद यूरोपीय संघ द्वारा अब तक रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की कुल संख्या बढ़कर 4,500 से अधिक हो गई है।
डीजल आयात करने की डील
इससे पहले अमेरिका में ईंधन की कीमतें कम करने के दबाव बढ़ने की वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने के समझौते की घोषणा की है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा कि पुतिन अमेरिकी और वैश्विक बाजार के लिए तुरंत तीन लाख टन डीज़ल जारी करने पर सहमत हो गए हैं, इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और उसके बाद दस लाख टन डीजल जारी किया जाएगा। अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि रूस से और तीस लाख टन डीजल कम समय में उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं बाद में पुतिन ने कहा कि रूस, जिसने इस साल की शुरुआत में डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था, अमेरिका और वैश्विक बाज़ारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्ति करने के लिए तैयार है, लेकिन उनके बयान में मात्रा का जिक्र नहीं था। हालांकि विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि क्या रूस इतनी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने में सक्षम है और ऐसा करने से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें किस हद तक कम होंगी। इधर बीते शुक्रवार को उठाए गए इस कदम से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की बेहद नाराज हो गए। उन्होंने इसे पुतिन के लिए एक तोहफा बताया।
यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमले जारी
इस बीच यूक्रेन ने सोमवार को कहा कि रूस उसके ऊर्जा संयंत्रों पर लगातार हमले कर रहा है। ये दावा ऐसे समय किया गया, जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में संघर्ष विराम हो गया है और तत्काल लागू है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि खार्किव के बाहरी इलाके में एक ऊर्जा प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया। सरकारी एनर्जी कंपनी नाफ्टोगैस के कई उपकरणों को नुकसान पहुंचा है। उधर, रूस के एक हमले में तीन यूक्रेनी नागरिकों की मौत हो गई।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




