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पेट्रोल-डीजल के दाम पर अभी नहीं मिलेगी राहत, तेल कंपनियों का ये है प्लान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद फिलहाल आम लोगों को पेट्रोल और डीजल सस्ता मिलने की उम्मीद कम है। एक्सपर्ट का मानना है कि सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के मूड में नहीं हैं।

तुरंत बदलाव की संभावना कम

मनीकंट्रोल की एक खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया, “ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के तुरंत कीमतें बदलने की संभावना कम है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के नतीजे का इंतजार है। तेल कंपनियों को होने वाला नुकसान (अंडर-रिकवरी) बहुत ज्यादा रहा है। पहले यह हर दिन 1000 करोड़ रुपये था, जो बाद में घटकर 500-600 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया। चूंकि तेल कंपनियों का नुकसान बहुत ज्यादा है इसलिए सरकार, नुकसान की भरपाई के लिए कुछ समय दे सकती है। ”

बता दें कि मई में तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर कुल मिलाकर हर दिन 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ था। बाद में सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह नुकसान घटकर 500-600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया। मार्च-मई 2026 के दौरान पेट्रोल, डीजल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पर कुल अंडर-रिकवरी का अनुमान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है।

क्या है कच्चे तेल की कीमतों का हाल?

वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत टूटकर लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। बता दें कि इस साल की शुरुआत में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। दोनों मानक अब फरवरी के आखिर के स्तर के करीब आ गए हैं। हाल ही में वैश्विक स्तर पर तेल के दाम में तेजी के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

जानकारों ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तीन खुदरा ईंधन विक्रेता अभी पेट्रोल पर अच्छा मार्केटिंग मार्जिन कमा रहे हैं। हालांकि, डीजल की बिक्री से अब भी थोड़ा नुकसान हो रहा है। कंपनियों ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद लगभग ढाई महीने तक खुदरा कीमतें स्थिर रखी थीं और उसके बाद ही कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी की थी।

जानकारों के मुताबिक ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल बाजार में रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर तय नहीं की जाती हैं, बल्कि आमतौर पर पिछले दो सप्ताह या महीने की औसत तेल कीमतों के आधार पर तय की जाती हैं। इसके कारण, अगर अंतरराष्ट्रीय दरें कम बनी रहती हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में हाल की गिरावट का फायदा पेट्रोल पंप तक पहुंचने में समय लग सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN