Source :- LIVE HINDUSTAN
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल आवासीय बिक्री में 50 फीसदी रही। रोजगार के बड़े केंद्र होने के कारण इन शहरों में अतिरिक्त मांग का असर पहले दिखाई दे सकता है।
अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया से जुड़ी पाबंदियों के बाद भारतीय IT प्रोफेशनल्स के सामने अपने भविष्य को लेकर नई अनिश्चितता खड़ी हो गई है। अमेरिकी सरकार ने 8 बड़ी आईटी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। यह फैसला 8 अक्टूबर को घोषित किया गया। इससे अमेरिका में काम कर रहे कुछ भारतीय पेशेवर अपनी लंबी अवधि की योजनाओं पर दोबारा विचार कर सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वे अपनी डॉलर में जमा बचत भारत भेजकर यहां घर खरीदेंगे या हालात साफ होने तक निवेश का फैसला टाल देंगे।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल ज्यादातर प्रभावित पेशेवर सावधानी बरत सकते हैं। भारत लौटने वाले कुछ लोग घर खरीद सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर डॉलर की बचत भारत आने की संभावना कम है। एक्सपर्ट गुलाम जिया का कहना है कि डॉलर में कमाई करने वाले लोगों के लिए भारत में निवेश करना हमेशा फायदे का सौदा नहीं हो सकता। मुद्रा की कीमत में बदलाव से निवेश पर मिलने वाला रिटर्न घट सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मंजूरी और रोजगार के अवसर सीमित होते हैं, तो जरूरी कौशल रखने वाले भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में मांग बढ़ सकती है। हालांकि, यह देखना होगा कि वहां पहले से रह रहे कितने भारतीय वास्तव में वापस लौटना चाहेंगे।
बढ़ सकती है महंगे घरों की मांग
एक्सपर्ट आयुष पुरी के मुताबिक, PERM प्रक्रिया पर रोक से ग्रीन कार्ड मिलने में देरी हो सकती है, लेकिन मौजूदा वीजा पर इसका सीधा असर नहीं है। इसलिए बहुत कम लोग तुरंत भारत लौटने का फैसला करेंगे। जो लोग लौटेंगे, वे घर खरीद सकते हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच तैयार या जल्द तैयार होने वाले मकानों और भरोसेमंद बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स की मांग बनी रह सकती है। अगर भारत लौटने वाले IT पेशेवरों की संख्या बढ़ती है, तो बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में महंगे घरों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, इसका असर सीमित और धीरे-धीरे होने की संभावना है।
क्या घरों के दाम तेजी से बढ़ेंगे
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल आवासीय बिक्री में 50 फीसदी रही। रोजगार के बड़े केंद्र होने के कारण इन शहरों में अतिरिक्त मांग का असर पहले दिखाई दे सकता है। फिर भी, प्रवासी भारतीयों की खरीदारी देश के कुल आवासीय बाजार का छोटा हिस्सा है। इसलिए उनके फैसलों में बदलाव से देशभर में घरों की बिक्री पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। PERM पर रोक का मकानों की कीमतों पर भी तत्काल कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कीमतें मुख्य रूप से जमीन, निर्माण सामग्री और दूसरी लागतों के साथ महंगी परियोजनाओं की बढ़ती हिस्सेदारी से प्रभावित होती हैं।
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