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फौरन चुप हो जाना चाहिए! इन 4 जगहों पर बोला तो पछताना पड़ सकता है

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जुबान खोलते वक्त बहुत ही सोच-समझकर बोलना चाहिए। नहीं तो आपके बने हुए काम मिनटों में बिगड़ जाएंगे। जैसे इन 4 जगहों पर सोच-समझकर बोलना चाहिए या फिर चुप हो जाना चाहिए।

‘सही समय पर बोला गया एक शब्द हजार शब्दों से बेहतर होता है।’ बोलने के लिए कई सारे मुहावरे मिल जाएंगे, ‘मुंह से निकले शब्द और तरकश से निकला तीर वापस लौटकर नहीं आता।’ जो हमे सिखाते हैं कि हमारी जबान का बहुत महत्व होता है। इसे सही समय पर सही चीजों को बोलने में ही इस्तेमाल करना चाहिए। एक गलत शब्द आपके बने-बनाए काम को बिगाड़ कर रख सकते हैं। बड़ी से बड़ी मुसीबत में फंसा सकता है और सालों की दोस्ती को जानलेवा दुश्मनी में बदल सकता है। इसलिए हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए। खासतौर पर इन 4 जगहों पर भूलकर भी नहीं बोलना चाहिए नहीं तो बाद में पछताना पड़ सकता है और आपके बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं।

जब गुस्से में हों

जब आप गुस्से में हो तो उस वक्त भूलकर भी नहीं बोलना चाहिए। आपके मुंह से निकला एक शब्द भी उस वक्त किसी के लिए तीर समान हो सकता है क्योंकि गुस्से में इंसान और शैतान का फर्क मिट जाता है। यहां तक कि हमारा विवेक काम करना बंद कर देता है तभी तो गुस्से में गलत काम करते हैं और गलत फैसले भी लेते है। इसलिए जब भी भी गुस्से में हों तो अपनी जुबान को बंद रखना चाहिए। जिससे आप किसी को ना केवल बुरे शब्दों को बोलने से बचें बल्कि किसी गलत फैसले को लेने से भी बचें।

जब आप रो रहे हों

जब आप रो रहें हो या फिर रोना आ रहा हो तब भी हमें चुप रहना चाहिए। रोते वक्त इंसान के इमोशन उसके काबू में नहीं होते और हम अपनी कमजोरी को किसी के सामने भी बता देते हैं। और, यहीं बताई हुई कमजोरी आपके लिए नुकसानदेह हो सकती है क्योंकि वो इंसान उन कमजोरियों को फायदा उठा सकता है। इसलिए जब आप उदास हों और रोना आ रहा हो उस वक्त भी एकांत में मौन हो कर बैठें, किसी से बातें ना करें।

जहां पर किसी की बुराई हो रही हो

जिस जगह पर किसी इंसान की बुराई हो रही हो उस जगह पर भी चुप रहना चाहिए। ऐसी जगह पर चुप रहना बेहद जरूरी क्योंकि जो इंसान दूसरों की बुराई आपके साथ मिलकर कर रहा है वो आपके जाने के बाद आपकी बुराई किसी और से करेगा। इसलिए किसी की भी बुराई करने में शामिल ना हो और उन जगहों से दूर ही रहें।

बहस या शोर वाली जगह

ऐसी जगह जहां पर कई सारे मिलकर शोर कर रहे हों या फिर आपस में बहस कर रहे हों वहां पर चुप रहना चाहिए। ऐसी जगहों पर बोलना मतलब मुसीबत को न्योता देने के बराबर है। उदाहरण के लिए जैसे वहीं मछली कांटे में फंसती है जिसका मुंह खुला रहता है। जिनका मुंह बंद है वो कांटे में नहीं फंसती। उसी तरह से समझ लें कि जब आपका मुंह बंद रहेगा तो किसी भी बहस में पड़कर आप मुसीबत से पड़ने से भी बचे रहेंगे।

तो ध्यान में रखें कि इन 4 जगहों पर भूलकर भी अपनी जुबान नहीं खोलनी चाहिए नहीं तो मुसीबत में पड़ना तय है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN