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Polymer currency note: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक बार फिर देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक आधारित करेंसी नोट शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। ये जानकारी आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी है। उन्होंने कहा कि अभी यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है।

ये ऐसे बैंक नोट होते हैं जो पारंपरिक कागज की बजाय एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बनाए जाते हैं। इन नोटों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला माना जाता है। ये नोट पानी और नमी से कम प्रभावित होते हैं। कहने का मतलब है कि गर्मी या बारिश के मौसम में नोट के गीला होने की टेंशन नहीं रहेगी। इन पर गंदगी कम जमती है और इन्हें आसानी से साफ किया जा सकता है। इस नोट में कुछ ऐसे सुरक्षा फीचर भी शामिल किए जा सकते हैं, जिससे जालसाजी मुश्किल हो जाती है।

क्या कहा गवर्नर ने?

संजय मल्होत्रा ​​ने बताया कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और आरबीआई इसके संभावित फायदों और चुनौतियों का आकलन कर रहा है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद गवर्नर मल्होत्रा ​​ने कहा- पॉलीमर करेंसी नोट लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। हम इसके फायदे और नुकसान की जांच कर रहे हैं और यह भी देख रहे हैं कि इसे लागू करना फायदेमंद होगा या नहीं। यह अभी शुरुआती चरण में है।

एक दशक बाद फिर से चर्चा

जानकारी के मुताबिक कागजी नोटों की छपाई की अधिक लागत और बेकार होने वाली मुद्रा की बढ़ती मात्रा के कारण पॉलीमर विकल्प पर विचार किया जा रहा है। बता दें कि एक दशक पहले भी इस तरह की करेंसी नोट लाने की चर्चा हुई थी।

दरअसल, फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को सूचित किया था कि भौगोलिक और जलवायु संबंधी विविधता के आधार पर चुने गए पांच शहर- कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में ट्रायल के तौर पर एक अरब पॉलीमर ₹10 के नोट जारी किए जाएंगे। हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण बाद में इस पहल को रोक दिया गया था।

रेपो रेट में बदलाव नहीं

आरबीआई ने उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

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