Source :- LIVE HINDUSTAN
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपदस्थ पीएम शेख हसीना की तुलना कंस से की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में भी कंस जैसे क्रूर शासक ने डेढ़ दशक तक शासन किया और आम लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रखा।
Tarique Rahman compared Sheikh Hasina to Kansa: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में शेख हसीना पर निशाना साधा है। उन्होंने बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम की तुलना मथुरा के क्रूर राजा कंस से करते हुए कहा कि कंस जैसे शासक ने डेढ़ दशक तक बांग्लादेश के लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रखा। इसके बाद सभी लोग एक साथ आए और उन्होंने ‘कंस जैसे फासीवादी शासन’ को उखाड़ फेंका। बता दें, राजधानी ढाका में आयोजित इस कार्यक्रम में बांग्लादेशी पीएम ने हिंदू पुजारियों से मुलाकात की और समुदाय के अन्य लोगों को सम्मान राशि भी बांटी।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी सरकार के धार्मिक मामलों के मंत्रालय और हिंदू धार्मिक कल्याण ट्रस्ट की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में पीएम तारिक को विशिष्ट अतिथि बनाया गया था। गुरुवार को प्रधानमंत्री तारिक रहमान जन्माष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उस्मानिया मेमोरियल ऑडिटोरियम तक पैदल गए। इस आयोजन में शामिल होने के बाद तारिक ने दुनियाभर में मौजूद हिंदु धर्म को मानने वाले लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “मैं बांग्लादेश और दुनियाभर के सभी हिंदुओं और सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को जन्माष्टमी के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।”
शेख हसीना पर नाम लिए बिना साधा निशाना
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने नाम लिए बिना शेख हसीना पर निशाना साधा। उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म की कहानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण का जन्म लगभग 5000 साल पहले मथुरा में हुआ था। उस समय मथुरा पर अत्याचारी राजा कंस का शासन हुआ करता था। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले मानते हैं कि श्री कृष्ण ने अंत में कंस को हराकर बुराई का नाश किया और धर्म की स्थापना की।
भगवान कृष्ण की कहानी की तुलना बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थिति से करते हुए तारिक रहमान ने बिना नाम लिए शेख हसीना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कंस जैसे शासक ने डेढ़ दशक तक बांग्लादेश पर शासन किया है। लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रखा। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग एकजुट हुए और उन्होंने उस “कंस जैसे फासीवादी” शासन को गिराने के लिए बलिदान दिया।
तारिक रहमान ने कहा, “बांग्लादेश अब फिर से लोकतंत्र की राह पर है। अर्थव्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष प्रशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था के साथ, अब देश के पुनर्निर्माण का समय आ गया है।”
बता दें, 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश की राजनीति में काफी कुछ बदल गया है। हसीना की सत्ता जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने सत्ता संभाली। इस दौरान हसीना की पार्टी आवामी लीग पर बैन लगा दिया गया। भारत में मौजूद शेख हसीना की तरफ से दिए जाने वाले बयानों से दोनों देशों के रिश्तों में भी फर्क पड़ा। इसके बाद बांग्लादेश में हुए आम चुनावों तारिक रहमान की बीएनपी ने बहुमत हासिल किया। एक दशक से ज्यादा समय से निर्वासित रहे तारिक रहमान की सत्ता में वापसी हुई। तब से लेकर अब तक बांग्लादेश लगातार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
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