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बैंक खाते से कट गए पैसे? तो 60 मिनट का यह ‘गोल्डन रूल’ जान लीजिए, वापस मिल जाएगी पूरी रकम!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • सोचिए, अचानक बैंक का मैसेज आता है और पता चलता है कि आपके खाते से हजारों या लाखों रुपये निकल गए हैं
  • आपने न कोई पेमेंट किया, न OTP किसी को दिया, फिर भी खाते से पैसा गायब हो गया

सोचिए, अचानक बैंक का मैसेज आता है और पता चलता है कि आपके खाते से हजारों या लाखों रुपये निकल गए हैं। आपने न कोई पेमेंट किया, न OTP किसी को दिया, फिर भी खाते से पैसा गायब हो गया। ऐसी स्थिति में घबराकर फोन करने, लगातार अकाउंट चेक करने या ठगी करने वाले नंबर पर वापस कॉल करने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है। साइबर फ्रॉड में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम हो सकते हैं।

सबसे पहले बैंक को तुरंत बताएं

अगर खाते से कोई ऐसा ट्रांजैक्शन हुआ है जो आपने नहीं किया, तो सबसे पहले अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, ऐप या वेबसाइट के जरिए शिकायत दर्ज करें। बैंक से कहें कि संदिग्ध ट्रांजैक्शन को तुरंत रिपोर्ट किया जाए और जरूरत के मुताबिक कार्ड, अकाउंट या डिजिटल बैंकिंग चैनल को ब्लॉक किया जाए। साथ ही अपने बैंकिंग ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और दूसरे जुड़े हुए डिजिटल चैनलों के पासवर्ड या पिन बदल दें। अगर कार्ड या यूपीआई से जुड़ी जानकारी के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो उन्हें भी सुरक्षित करना जरूरी है।

1930 पर तुरंत कॉल करें

बैंक को सूचना देने के साथ ही नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। साइबर अपराध की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। जल्दी शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को ट्रांजैक्शन को ट्रेस करने और जहां संभव हो, रकम को आगे जाने से रोकने या रिकवरी की कोशिश शुरू करने का मौका मिलता है। हालांकि, पैसा वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।

सबूत बिल्कुल डिलीट न करें

ठगी के बाद सबसे बड़ी गलती सबूत मिटाना हो सकती है। फ्रॉड से जुड़े एसएमएस, WhatsApp चैट, ईमेल, कॉल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, स्क्रीनशॉट और पेमेंट लिंक सुरक्षित रखें। किसी संदिग्ध व्यक्ति से हुई बातचीत भी डिलीट न करें। ये जानकारी बैंक और जांच एजेंसियों को शिकायत समझने और आगे की कार्रवाई में मदद कर सकती है।

शिकायत के बाद बैंक क्या करता है?

शिकायत मिलने के बाद बैंक मामले की प्रकृति के आधार पर जरूरी सुरक्षा कदम उठा सकता है। इसमें संबंधित बैंकिंग चैनल को ब्लॉक करना, खाते के ट्रांजैक्शन पर नजर रखना, जिस बैंक खाते में पैसा गया है उस बैंक के साथ संपर्के करना और जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करना शामिल हो सकता है। इसलिए साइबर फ्रॉड होने पर सबसे जरूरी बात है देरी न करें। पहले बैंक और 1930 को सूचना दें, फिर सारे सबूत सुरक्षित रखें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी जल्दी रकम को ट्रेस या रोकने की कोशिश शुरू की जा सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN