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मक्का के पास ड्रोन गिरा, फिर F-15 पर वार! हूतियों के दावे से बढ़ा सऊदी-यमन तनाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सऊदी सीमा पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पहली बार बड़े दबाव में है। हमलों के बावजूद सऊदी अरब ने अभी तक इस संयुक्त रक्षा समझौते के तहत औपचारिक सैन्य सहायता नहीं मांगी है।

पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष बुधवार को और भीषण मोड़ ले चुका है। हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के एक F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह दावा रियाद का मक्का की ओर आ रहे हूती ड्रोन हमलों को नाकाम करने की पुष्टि के कुछ ही घंटों बाद सामने आया।

हालांकि, फाइटर जेट को गिराए जाने के हूती दावों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। विद्रोही गुट का आरोप है कि सऊदी गठबंधन ने बीते एक हफ्ते में उन पर 450 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं।

‘मक्का रक्षा समझौते’ की पहली परीक्षा, लेकिन पाकिस्तान का सैन्य दखल से इनकार

सऊदी सीमा पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पहली बार बड़े दबाव में है।

हमलों के बावजूद सऊदी अरब ने अभी तक इस संयुक्त रक्षा समझौते के तहत औपचारिक सैन्य सहायता नहीं मांगी है।

पाकिस्तान सरकार ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर फिलहाल किसी भी प्रत्यक्ष सैन्य प्रतिक्रिया या पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती पर चर्चा नहीं हो रही है।

बाब अल-मंडेब पर कब्जा और 3 मोर्चों पर भड़की जंग

जुलाई 2026 में हूतियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा के बाद से दोनों पक्षों के बीच अनधिकृत युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका है। अब यह जंग तीन प्रमुख मोर्चों पर लड़ी जा रही है।

हूती मिसाइलों और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों- अभा , खमीस मुशैत, जाज़ान और नज़रान को निशाना बनाया है, जिसमें 73 लोग घायल हुए हैं।

हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी यमन में मोखा और धूबाब के साथ-साथ रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है।

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित पेरिम द्वीप पर कब्जे के बाद हूती विद्रोही अब लाल सागर से गुजरने वाले सऊदी तेल और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए सीधा खतरा बन गए हैं।

ईरान के लिए क्यों फायदेमंद है यह संकट?

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से ईरान को दोहरे कूटनीतिक रास्ते पर बढ़त मिल रही है।

ईरान एक तरफ फारस की खाड़ी में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर अपनी नौसेना के जरिए दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ यमन में अपने समर्थित हूती विद्रोहियों के जरिए बाब अल-मंडेब मार्ग को कंट्रोल कर रहा है।

सऊदी अरब के पास हूतियों पर दोबारा जमीनी हमला शुरू करने का विकल्प जोखिम भरा है, क्योंकि 2015-22 की जंग बेहद खर्चीली साबित हुई थी। दूसरी तरफ, वार्ता करने पर हूतियों के इस रणनीतिक कब्जे को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने का खतरा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN