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ममता बनर्जी की पार्टी से चुनाव लड़ने को लेकर हाँ ना करने वाले कौन हैं रबीउल आलम

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Source :- BBC INDIA

रेजीनगर से ममता बनर्जी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी और ममता बनर्जी

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क़रीब 28 साल पहले बनाई पार्टी के नाम और सिंबल से ममता बनर्जी पहले ही हाथ धो चुकी थीं. अब पार्टी बनने के बाद पहली बार किसी चुनाव/उपचुनाव में उनके उम्मीदवार का मैदान में नहीं होने का ख़तरा भी पैदा हो गया था.

इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद ज़िले की रेजीनगर सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपने उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को मैदान में बने रहने के लिए मना लिया.

रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी बाद में उन्होंने कहा कि वो चुनाव लड़ेंगे.

आगामी छह अक्तूबर को राज्य की दो सीटों-नंदीग्राम और रेजीनगर पर उपचुनाव होने हैं. नंदीग्राम की सीट पर ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था.

इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की. लेकिन पुलिस ने 19 साल पुराने मामले में मिलन प्रधान को गिरफ़्तार कर लिया था.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता की भवानीपुर और पूर्व मेदिनीपुर की नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था.

उन्होंने साल 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हराया था. इस बार उन्होंने भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की थी और बाद में नंदीग्राम से इस्तीफ़ा दे दिया था.

दूसरी ओर, रेजीनगर सीट टीएमसी के पूर्व विधायक और बाग़ी नेता हुमायूं कबीर के इस्तीफ़े से खाली हुई थी.

पहले तो ममता बनर्जी की बनाई पार्टी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और पार्टी के बाग़ियों के बीच चली लंबी खींचतान के बाद चुनाव आयोग ने बीते गुरुवार को पार्टी का नाम और सिंबल फ्रीज़ कर दिया था.

आयोग ने इस उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ का चुनाव चिह्न दिया. दूसरी ओर, पार्टी के बाग़ी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ के नाम के साथ ‘एनवलप’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया.

नंदीग्रीम में झटके के बाद रेजीनगर में नाटकीय घटनाक्रम

सुकांत मजूमदार

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ममता बनर्जी ने आयोग के फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘कानून के ख़िलाफ़’ और ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ बताया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है.

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने इस फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि “लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है.”

हालाँकि उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी निर्दलीय के तौर पर भी नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फ़ैसला करती हैं तो उनका गुट वहां से कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा. वो चाहते हैं कि ममता बनर्जी विधानसभा के लिए चुनी जाएं.

ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम सीट पर संचिता प्रधान डे को पार्टी का उम्मीदवार बनाया था. लेकिन संचिता ने शुक्रवार को यहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाक़ात के बाद अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया.

यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका था. उन्होंने उस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया था. लेकिन उसके कुछ देर बाद ही प्रधान को गिरफ़्तार कर लिया गया.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने उनसे समर्थन नहीं मांगा था. ममता बनर्जी ने ख़ुद ही समर्थन देने का फ़ैसला किया.

अभी यह उथल-पुथल चल ही रही थी कि नाम वापस लेने के अंतिम दिन शनिवार सुबह रेजीनगर सीट पर ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार रबीउल ने नाम वापस लेने का एलान कर राजनीति में हलचल मचा दी.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है. इस वजह से लोग प्रचार के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में चुनाव लड़ना मुश्किल है. इसी कारण मैंने नाम वापस लेने का फ़ैसला किया है.”

रबीउल का कहना था कि चुनाव चिह्न बदलने के कारण लोगों को समझाना मुश्किल हो रहा है.

रबीउल ने क्यों बदला फैसला?

पश्चिम बंगाल सीईओ

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रबीउल के इस एलान ने पहली बार ममता बनर्जी की पार्टी के किसी चुनाव में एक भी उम्मीदवार नहीं होने का ख़तरा पैदा हो गया था.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने पर बीबीसी हिन्दी न्यूज़ को बताया, “ममता बनर्जी ने इसकी सूचना मिलते ही रबीउल से काफ़ी देर तक बातचीत की. उन्होंने रबीउल को पार्टी की पुरानी विरासत का हवाला देते हुए कहा कि वो नाम वापस नहीं लें. ममता और पार्टी उनके साथ हैं. काफ़ी समझाने के बाद रबीउल अपना फ़ैसला बदलने के लिए तैयार हुए.”

दोपहर क़रीब एक बजे उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वो ममता बनर्जी के कहने पर ही अपना फ़ैसला बदलने के लिए तैयार हुए हैं.

उनका कहना था, “मैं दीदी के साथ राजनीति करता हूं. दीदी के निर्देश की हम अनदेखी नहीं कर सकते. उनके भरोसे के आधार पर ही मैंने नाम वापस लेने का फ़ैसला बदला और चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुआ.”

इसके बाद वो बेलडांगा थाने पहुंचे और वहां पुलिस अधिकारियों से बातचीत की.

थाना से बाहर निकलने पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, “पुलिस प्रशासन ने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का भरोसा दिया है. अब दस कार्यकर्ता भी साथ रहें तो मैं चुनाव लड़ूंगा. आज से ही प्रचार शुरू हो जाएगा.”

राजनीतिक प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी

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रबीउल के नामांकन वापस लेने के एलान के बाद केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पत्रकारों से कहा था, “ममता की पार्टी की एक्सपायरी डेट पार हो गई है. अब पार्टी ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी. उनको यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए.”

सीपीएम के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने यहां पत्रकारों से कहा, “विधानसभा चुनाव के नतीजों के सिर्फ़ चार महीनों के भीतर ही टीएमसी ने अपनी मूल पहचान और सिंबल पूरी तरह से खो दिया है. बंगाल में वामपंथी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताक़तें मुख्य विपक्ष के तौर पर उभर रही हैं.”

इस बीच, नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शनिवार को हल्दिया की एक अदालत में पेश किया गया था, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

मौक़े पर मौजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने पत्रकारों से कहा, “पुलिस के जरिए पार्टी के उम्मीदवार की गिरफ़्तारी के बावजूद हम मैदान नहीं छोड़ेंगे. हमारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नंदीग्राम के उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद रेजीनगर के उम्मीदवार के नाम वापसी के एलान ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया था.

दोनों सीटों पर उम्मीदवार नहीं होने के मुद्दे पर बीजेपी नेता और तृणमूल के बाग़ी गुट के लोग ममता और उनकी पार्टी पर निशाना साध रहे थे.

लेकिन अब ममता बनर्जी के मान-मनौव्वल के बाद रेजीनगर के उम्मीदवार के मैदान में बने रहने से पार्टी को फ़िलहाल एक राहत मिली है.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक पुलकेश घोष कहते हैं, “यह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए साख का सवाल था. नंदीग्राम के बाद अगर रेजीनगर में पार्टी का उम्मीदवार मैदान में नहीं होता तो उनकी काफ़ी किरकिरी हो सकती थी. इसलिए जैसे-तैसे रबीउल को मैदान में बने रहने के लिए तैयार किया गया.”

कौन हैं रबीउल आलम चौधरी

रबीउल आलम चौधरी

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मुर्शिदाबाद ज़िले के रहने वाले 61 वर्षीय रबीउल आलम 2013 करीब तेरह साल तक रेजीनगर सीट से ही विधायक रहे हैं.

वो पहले कांग्रेस के टिकट पर साल 2013 और 2016 में इस सीट से विधायक चुने गए थे.

बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया और साल 2021 में वो रेजीनगर सीट से ही विधानसभा चुनाव जीत कर विधायक बने थे.

वो बेलडांगा सीट से तीन बार विधायक रहे नुरुल चौधरी के भतीजे हैं. इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीट बदलते हुए उनको बेलडांगा सीट पुर मैदान में उतारा था.

लेकिन वह सीट बीजेपी ने जीत ली थी.

रबीउल ने साल 1983 में कोलकाता विश्वविद्यालय से बी.काम की डिग्री हासिल की थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS