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“सच्ची बातें बहुत कम ही लोगों तक पहुंचती हैं. आमतौर पर झूठी बातें ही फैलती हैं… और अगर आप सच से शुरुआत नहीं करते, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि शुरुआत कहां से की जाए.”
ये बातें फ़िल्म अभिनेत्री मर्लिन मुनरो ने 1962 में लाइफ़ पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में कहीं थीं, अपनी मौत से कुछ ही समय पहले.
1 जून 1926 को जन्मी, जिनका वास्तविक नाम नॉर्मा जीन मॉर्टेनसन था, मुनरो का जन्म आज से 100 वर्ष पहले हुआ था. 36 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. उन्होंने अपने पीछे विरोधाभासों से भरा जीवन छोड़ा. लाखों लोगों की चहेती होने के बावजूद वह मानसिक और भावनात्मक समस्याओं से जूझती रहीं, जिनका कारण वह अपने बचपन और कुछ हद तक प्रसिद्धि के बोझ को मानती थीं.
लाखों लोगों की चाहत मुनरो मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक समस्याओं से जूझती रही थीं, जिसकी वजह उन्होंने अपने बचपन और कुछ हद तक प्रसिद्धि के बोझ को बताया.
अगस्त 1962 में उनकी मृत्यु को आधिकारिक तौर पर “संभावित आत्महत्या” घोषित किया गया था, लेकिन इसके बाद से अफवाहों और साजिश संबंधी सिद्धांतों का सिलसिला शुरू हो गया, जो आज तक जारी है.
उनकी कहानी में एक हॉलीवुड फ़िल्म के लिए जरूरी लगभग हर मसाला मौजूद है- सेक्स, राजनीति, ख़ुफ़िया एजेंसियां, माफिया की कथित भूमिका, और यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके परिवार से जुड़े आरोप भी.
जांच
1982 में जब लॉस एंजिल्स के जिला अटॉर्नी ने मुनरो की मौत के मामले की दोबारा समीक्षा की, तब ब्रिटिश पत्रकार एंथनी समर्स इस रहस्य की तह तक पहुंचने के लिए कैलिफोर्निया गए.
उन्होंने बीबीसी मुंडो से कहा, “बहुत जल्द मुझे एहसास हो गया कि यह कहानी मेरी सोच से कहीं ज्यादा व्यापक और जटिल है. इसमें जानने के लिए बहुत कुछ था.”
उन्होंने एक कार खरीदी और लोगों के घर-घर जाकर दस्तक देना तथा फोन कॉल करना शुरू किया. उन्हें कुछ लोग टालमटोल करते मिले, जबकि कुछ ने बात करने से ही इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने अपनी कोशिशें जारी रखीं.
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आखिरकार उन्होंने 700 से अधिक लोगों का इंटरव्यू लिया. इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्हें अभिनेत्री के जीवन के आखिरी दिनों और घंटों की बेहद करीबी जानकारी थी, जिनमें उनकी हाउसकीपर यूनिस मरे और मुनरो के अंतिम मनोचिकित्सक डॉक्टर राल्फ़ ग्रीनसन का परिवार भी शामिल था.
इसके बाद आई उनकी किताब ‘गॉडेस: द सीक्रेट लाइव्स ऑफ़ मर्लिन मुनरो’ ने 2022 में बनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री ‘द मिस्ट्री ऑफ़ मर्लिन मुनरो: द अनहर्ड टेप्स’ के लिए आधार के रूप में काम किया.
उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिससे मुझे लगे कि उनकी हत्या की गई थी, लेकिन मुझे इस बात के सबूत मिले कि उनकी मौत की परिस्थितियों पर जानबूझकर पर्दा डाला गया था.”
“और मैं कहूंगा कि सबूत बताते हैं कि यह अभिनेत्री के कैनेडी भाइयों के साथ संबंधों की वजह से किया गया था.”
मर्लिन और कैनेडी
मर्लिन मुनरो की मौत से जुड़े रहस्य के केंद्र में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी और अटॉर्नी जनरल रॉबर्ट ‘बॉबी’ कैनेडी के साथ उनके कथित संबंध हैं.
समर्स के सूत्रों ने उन्हें बताया कि मुनरो और कैनेडी भाइयों की मुलाकातें अक्सर मालिबू स्थित पीटर लॉफ़ोर्ड की समुद्र तट वाली हवेली में होती थीं. लॉफ़ोर्ड, कैनेडी भाइयों के बहनोई और मुनरो के मित्र थे.
उनके कुछ अन्य इंटरव्यूकर्ताओं ने मोनरो और दोनों भाइयों के बीच एक कथित रोमांटिक रिश्ते के बारे में बात की – पहले जॉन, फिर बॉबी – जिसे कैनेडी परिवार ने कभी स्वीकार नहीं किया.
समर्स की रिकॉर्डिंग्स में निजी जासूसों और पूर्व एफबीआई एजेंटों ने कहा कि मर्लिन मुनरो और कैनेडी भाइयों पर नज़र रखी जा रही थी.
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मामले से जुड़े जाँचकर्ताओं ने उन्हें बताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों और माफ़िया समूहों ने मुनरो और लॉफ़ोर्ड के घरों में माइक्रोफोन लगाए गए थे, वो अटॉर्नी जनरल पर दबाव बनाने के लिए संभावित विवादित सामग्री हासिल करना चाहते थे.
उन्होंने यह भी रिपोर्ट किया कि एफबीआई फ़ाइलों में मुनरो की वामपंथी विचारधारा की जांच का ज़िक्र था और कैनेडी भाइयों से उनकी मुलाक़ातों को सुरक्षा कारणों से चिंता का विषय माना गया था.
समर्स कहते हैं कि इसी वजह से कैनेडी भाइयों ने उनसे सारे संपर्क तोड़ दिए. निगरानी विशेषज्ञ रीड विल्सन ने समर्स को बताया कि एक वायरटैप रिकॉर्डिंग में मुनरो ने अपनी मौत के दिन पीटर लॉफ़ोर्ड से कहा था कि वह चाहती हैं कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए.
मुनरो ने कथित रूप से कहा, “मुझे लगता है कि मुझे इस्तेमाल किया गया है. मैं खुद को मांस का टुकड़ा समझ रही हूँ. मुझे लगता है कि मुझे इधर-उधर घुमाया गया है.”
विल्सन ने कहा, “यह दिल टूटने की बात नहीं थी. बल्कि उन्हें लग रहा था कि उनका फ़ायदा उठाया गया है और उनसे झूठ बोला गया है.”
क्या उन्हें मारने की साज़िश थी?
यह धारणा कि मुनरो कैनेडी भाइयों के लिए असुविधाजनक या ख़तरनाक शख़्सियत बन गईं थीं, हत्या की थ्योरी को हवा देती रही. लेकिन एंथनी समर्स कहते हैं कि इसका कोई सबूत नहीं है.
“किसी की हत्या का दावा करने के लिए सबूत चाहिए और यहाँ कोई सबूत नहीं है.”
हालाँकि, वह जोड़ते हैं, “जिस रात वह मरीं, उसके सबूत यह दिखाते हैं कि एक कहानी गढ़ी गई थी, सच्चाई नहीं बताई गई.”
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आधिकारिक बयानों के अनुसार, हाउसकीपर यूनिस मरे ने 5 अगस्त रविवार को सुबह 3 बजे मुनरो के कमरे में रोशनी देखी और मनोचिकित्सक राल्फ़ ग्रीनसन को बुलाया.
ग्रीनसन ने खिड़की से झाँककर देखा कि वह बिस्तर पर पड़ी थीं, शायद उनकी मौत हो चुकी थी. उन्होंने खिड़की तोड़ी और फिर मरे के साथ पुलिस को बुलाया.
लेकिन समर्स के जुटाए गए बयान अलग थे. मुनरो के प्रेस एजेंट की पत्नी नथाली जैकब्स ने याद किया कि उनके पति को 4 अगस्त शनिवार रात 10 या 11 बजे अभिनेत्री से जुड़ी आपात स्थिति की जानकारी मिल गई थी. और कोरोनर थॉमस नोगुची ने मौत का संभावित समय रात 11 बजे या आधी रात बताया, यानी वह 4 अगस्त को ही मरी थीं, 5 को नहीं.
तो यह अंतर क्यों?
समर्स कहते हैं, “मुझे बहुत समय लगा यह समझने में कि इस पहेली के कौन-से हिस्से मुझे मिल पाए हैं और वे कैसे जुड़ते हैं.”
उन्होंने उस एम्बुलेंस की जानकारी जुटाई, जो मुनरो के घर भेजी गई थी, और इससे उन्हें ‘ज़्यादा यथार्थवादी टाइमलाइन’ बनाने में मदद मिली.
उनका मानना है कि “जो हुआ उसके बारे में धोखा ज़रूर था, लेकिन हत्या नहीं हुई थी. पोस्टमॉर्टम में किसी शारीरिक चोट या इंजेक्शन के निशान नहीं मिले.”
“नींद की गोलियाँ मिलीं… यह पूरी तरह संभव था कि वह दुर्घटनावश ओवरडोज़ से मरी हों, या जानबूझकर अपनी जान ली हो – जैसा कि उन्होंने पहले भी कोशिश की थी.”
समर्स कहते हैं, “मुझे लगता है यह ज़्यादा संभव है कि यह एक भयानक हादसा था. अगर उन्होंने आत्महत्या का इरादा किया होता, तो शायद किसी को बताया होता या कोई नोट छोड़ा होता. इसका कोई संकेत नहीं मिला.”
पहेली के नए हिस्से
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अपनी किताब के अपडेट में समर्स ने खोए हुए हिस्से भी जोड़े. इनमें नए बयान जोड़े, जिनमें मुनरो के हेयरड्रेसर और विश्वासपात्र सिडनी गिलारॉफ़ की गवाही भी शामिल थी.
गिलारॉफ़ ने बाद में अपनी आत्मकथा में लिखा कि मुनरो ने मौत की रात 9:30 बजे उन्हें फ़ोन किया था. उनकी आवाज़ थकी हुई और परेशान थी. उन्होंने कहा कि उन्हें चारों ओर ख़तरा महसूस हो रहा है, ताक़तवर पुरुषों ने धोखा दिया है, और दावा किया कि उस दिन रॉबर्ट कैनेडी उनसे मिलने आए थे और बहस की थी.
मुनरो की हाउसकीपर ने भी समर्स को बताया कि कैनेडी उस दोपहर आए थे और गरमागरम बहस हुई थी.
समर्स का मानना है कि कैनेडी को शहर छोड़ना था और मुनरो की मौत की रिपोर्टिंग में हुई देरी शायद इसलिए हुई थी कि ख़बर आने से पहले वह वहाँ से निकल चुके हों.
रॉबर्ट कैनेडी ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि वह उस दिन लॉस एंजिल्स में थे.
एक स्थायी आकर्षण
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मर्लिन मुनरो की ज़िंदगी चमकदार ऊँचाइयों और गहरे दर्द से भरी थी. और जन्म के 100 साल बाद भी वह दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.
समर्स कहते हैं, उनकी छवि “कनेक्टिकट से लेकर कांगो तक हर जगह है… कपों, बैगों और तमाम उन चीज़ों पर जिनकी आप कल्पना कर सकते हैं.”
वह उम्मीद करते हैं कि नई पीढ़ी उन्हें एक असली इंसान के रूप में देखेगी- भावनाओं और बुद्धिमत्ता वाली.
“वह सिर्फ़ एक आइकन नहीं थीं. मर्लिन मुनरो एक शानदार महिला और बेहतरीन अभिनेत्री थीं- पढ़ी-लिखीं, राजनीतिक रूप से जागरूक, बुद्धिमान, और लगभग असहनीय दबाव में. आख़िरकार, कहा जा सकता है कि वही दबाव उनकी मौत का कारण बना.”
लाइफ़ पत्रिका के लिए पत्रकार रिचर्ड मेरिमैन को दिए इंटरव्यू में कही गई उनकी आख़िरी बातों में इस बात की झलक मिलती है कि लोग उन्हें गंभीरता से लें. “कृपया मुझे मज़ाक मत बनाइए… मुझे मज़ाक करना बुरा नहीं लगता, लेकिन मैं खुद मज़ाक का पात्र नहीं दिखना चाहती. मैं एक कलाकार बनना चाहती हूँ, ऐसी अभिनेत्री जिसके पास ईमानदारी और आत्मसम्मान हो.”
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यह लेख मूल रूप से 2022 में मर्लिन मुनरो की मृत्यु की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित किया गया था और इसे उनकी जन्म के शताब्दी वर्ष के लिए अपडेट किया गया है.
मूल रूप से स्पेनिश में लिखे गए इस लेख का अनुवाद करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया है. बीबीसी के पत्रकारों ने अनुवाद की जाँच की और कहानी को संपादित किया, ताकि अन्य भाषाओं में प्रकाशन से पहले इसे छोटा किया जा सके. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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