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आपने माता के भजनों को गाने वाले सिंगर नरेंद्र चंचल को कई वीडियो में देखा होगा। भक्ति गीतों में नरेंद्र चंचल ने खास कमाल किया था। उनके गाए गीतों के बीना माता की चौकी और जागरण जैसे अधूरे लगते थे। मंदिरों में गाना गा कर कमाई करने वाले नरेंद्र चंचल की किस्मत तब पलट गई जब एक प्रोग्राम में फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर-डायरेक्टर ने उन्हें पहली बार लाइव सुना। ये बात 70 के दशक की है। फिर नरेंद्र चंचल के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उनकी दो महीने के लिए आवाज चली गई। इस दौरान उन्होंने कसम खाई कि वो माता के गीतों को ही गाएंगे। आइए माता के भजनों को गा कर अमर कर देने वाले नरेंद्र चंचल के बारे में।
नरेंद्र चंचल की आवाज का दीवाना हो गया था ये एक्टर-डायरेक्टर
अक्टूबर 1940 की बात है अमृतसर के एक परिवार में नरेंद्र चंचल का जन्म हुआ था। उन्हें परिवार से संगीत का ज्ञान हुआ और जैसे-जैसे वो बड़े होते गए शादियों और जागरणों में गीत गाने लगे। नरेंद्र चंचल की आवाज में एक खनक और देसीपन था जो उन्हें सुनने वाले लोगों को बहुत पसंद आता। वो गाने गाते और इससे होने वाली सारी कमाई अपनी मां की झोली में डाल देते। फिर उनकी जिंदगी में एक ऐसा दिन आया जिसके बाद सब कुछ बदल गया। दरअसल, उस दिन नरेंद्र चंचल पकोड़े खा रहे थे, तभी जिस पेपर में पकोड़े रखे थे उस पर बाबा बुल्ले शाह की काफिया लिखी हुई थीं। नरेंद्र चंचल ने उन काफियों को याद किया और अगले दिन एक प्रोग्राम में गा दिया। उनकी आवाज की खनक, देसीपन ने सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी प्रोग्राम में इंडस्ट्री के शोमैन राज कपूर भी बैठे। राज कपूर पहले ही संगीत प्रेमी थे और नरेंद्र चंचल की आवाज की जादूगरी वो पहचान गए थे।
नरेंद्र चंचल ने फिल्मों में गाए ये गाने
उस दिन राज कपूर सिंगर नरेंद्र चंचल की आवाज से इतना प्रभावित हुए कि अपनी अगली फिल्म ‘बॉबी’ में उन्हें एक गाना दे दिया। 1973 में रिलीज हुई ‘बॉबी’ का वो गाना था ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो’। इस गाने ने ऑडियंस पर छाप छोड़ी और फिल्मों में नरेंद्र चंचल की गाड़ी निकल पड़ी। उन्हें अक्सर भक्ति गानों के लिए ही याद किया जाता था। वो नरेंद्र चंचल ही थे जिन्होंने 1983 में आई फिल्म ‘अवतार’ का गाना ‘चलो बुलवाया आया है’ गाया था। 1974 में आई फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ का गाना ‘बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई’, 1985 में आई फिल्म ‘काला सूरज’ का गाना ‘दो घूट पिला दे साकिया’ भी नरेंद्र चंचल ने गाया था।
नरेंद्र चंचल की चली गई थी आवाज
नरेंद्र चंचल फिल्मों में गाना का रहे थे। करियर ठीक ही चल रहा था, लेकिन फिर उनके साथ एक ऐसा हादसा हुआ जिसने उन्हें अंदर से झकझोर दिया। दरअसल, नरेंद्र चंचल को एक दिन मंदिर में माता का भजन गाने का न्योता मिला था, लेकिन उन्होंने ये कहकर जाने से मन कर दिया कि वो बीमार हैं, जबकि असल में वो ठीक थी। इसके बाद उनकी आवाज 2 महीनों के लिए चली गई। सिंगर मानते थे कि ये घटना माता के दरबार से आए न्योते को ठुकराने से हुई है। इसके बाद नरेंद्र चंचल ने अपना पूरा जीवन माता के भजनों के नाम कर दिया।
नरेंद्र चंचल के गाए फेमस भजन
नरेंद्र चंचल ने माता के नाम कई गीत गाए। कई वीडियोज में वो खुद भी नजर आते थे। उनके गाए माता के भजन हैं, ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली हे दुर्गे छप्पर वाली’,’दिल वाली पालकी विच तेनु मां बिठाना’, ‘मेरी छोली छोटी पड़ गई है इतना दिया मेरी माता’, ‘नंगे नंगे पांव चल आ गया री मां मैं तेरा पुजारी’। ये गाने आज भी माता की चौकी, जागरणों में सबसे ज्यादा सुने जाते हैं। नवरात्रि का त्योहार तो इन गानों के बिना अधूरा है। अब नरेंद्र चंचल ओस दुनिया में नहीं हैं। 80 साल की उम्र में साल 2021 में उनका निधन हो गया था।
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