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मैंने अपने पिता के देव गमन पर लिखा था यह गाना और अब शादियों में बजता है- बोले कैलाश खेर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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कैलाश खेर ने अपना यह गाना शादी के लिए नहीं, बल्कि उनके पिता के देवलोक गमन पर लिखा गया था। पिता के आनंद और परमात्मा से मिलन की अनुभूति को उन्होंने इस गीत में पिरोया है।

शादियों में दुल्हन की एंट्री और जयमाला के वक्त बजने वाले कैलाश खेर के इस मशहूर गाने को सुनकर शायद ही किसी के मन में इसकी कहानी का ख्याल आता होगा। इस गाने के बोल भले ही दूल्हा-दुल्हन के मिलन का एहसास कराते हों, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद भावुक और जिंदगी-मौत से जुड़ी है। कैलाश खेर ने बताया है कि उन्होंने यह गाना किसी शादी या प्रेम कहानी के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता देवगमन पर लिखा था।

कौन-से गाने की बात हो रही है?

कैलाश खेर ने रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में कहा, “‘पिया घर आवेंगे’…इस गाने पर लोग रील बनाते हैं और बोलते हैं, ये गाना कैलाश खेर का है। ये शादियों में गाने के लिए नहीं होता, ये दुनिया से जाने के लिए होता है। कभी-कभी हमारी टीम दिखाती है वो रील। वे कहते हैं, उनकी मां जब चली गई थीं तब कैलाश खेर ने अपनी मां की तरफ से अपने पिता के लिए ये गाना बनाया था। हालांकि, तब मेरी मां नहीं गुजरी थी, मेरे पिताजी गुजरे थे।”

कैसे थे पिताजी के आखिरी पल?

कैलाश खेर ने आगे कहा, “मैं पिताजी की अवस्था देख रहा था। मेरे पिताजी मेडिटेशन करते थे। वो मेडिटेशन करते-करते गुजरे। तो वो हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम…पहले धीरे-धीरे बोल रहे थे। बाद में बहुत जोर से बोलने लगे। जैसे कोई आनंद में बहुत जोर-जोर से गाना गा रहा हो। हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम। और मैं पिताजी की वो अवस्था देख रहा था और ऐसे करते-करते वो हंसते-हंसते चले गए। तो वो जो आनंद मैंने देखा, मैंने उस आनंद को, उस मिलन को इस गाने में बताया है। चोक पुराओ, माटी रंगाओ, आज मेरे पिया घर आवेंगे। खबर सुनाऊ जो, खुशी रे बताऊं जो, आज मेरे पिया घर आवेंगे। एरी सखी मंगल गाओ री, धरती अम्बर सजाओ री, उतरेगी आज मेरे पि की सवारी, अरी कोई काजल लाओ री, मोहे काला टिका लगाओ री, उनकी छब से दिखू मै तो प्यारी, लक्ष्मी जी वारों नजर उतारो। ये मैंने पिताजी के देवलोक गमन पर लिखा है।”

पिताजी ने गोद में ली थी आखिरी सांसे- कैलाश खेर

कैलाश खेर की गोद में उनके पिताजी ने आखिरी सांस ली थी। कैलाश खेर बोले, “देवलोक गमन के वक्त मेरी गोद में थे मेरे पिताजी और मेरा शो था उस दिन। तो ब्रह्म मुहूर्त में ये हुआ और फिर हमने हमारे पिताजी का अंतिम संस्कार करने के बाद शाम को शो किया… तो शो में तो सबको खुश रखना होता है, तो सोचिए उस समय हमारी स्थिति कैसी होगी। तो देव गमन से ये गाना निकला, आज मेरे पिया घर आवेंगे। आज आप हैरान हो जाएंगे विवाह में बजता और जयमाला के वक्त ये गाना बजता है। देखिए संसार को तो वैसा ही सुख चाहिए न संसारी… भाई, ये तो हम हैं, कि इतने आगे तक, इतने कपाली तक, इतने अनंत तक हमारा विचार जाता है। हमारे लिए तो संसारिक प्रेम झूठा है। कुछ रिश्ते हैं पृथ्वी पर, जो निभा सकते हैं, कुछ रिश्ते। वो होते हैं माता और पिता। ऐसे रिश्ते होते हैं।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN