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युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं, …एक ही है रास्ता; ईरान का अमेरिका को सीधा संदेश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ चल रही लड़ाई का कोई सैन्य हल नहीं है। उन्होंने कहा कि लड़ाई खत्म करने की बातचीत अभी अटकी हुई है।

अमेरिका संग जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ चल रही लड़ाई का कोई सैन्य हल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत से ही सुलझ सकता है। अराघची के मुताबिक, नए प्रतिबंधों से भी समाधान नहीं निकलेगा और बातचीत अभी अटकी हुई है। विदेशी राजदूतों की बैठक में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन फिर सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो ईरान पहले से ज्यादा मजबूत जवाब देगा। बता दें कि इस विवाद की जड़ होर्मुज स्ट्रेट है, जिसे ईरान नियंत्रित करना चाहता है।

गौरतलब है कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। भारी बमबारी के बावजूद यह लड़ाई पूरी तरह नहीं रुकी। हाल के हफ्तों में वाशिंगटन ने सैन्य कार्रवाई कम की है और आर्थिक दबाव बढ़ाया है। इस विवाद की जड़ होर्मुज है। यह खाड़ी के तेल और गैस के लिए अहम रास्ता है। ईरान इस रास्ते पर नियंत्रण चाहता है। रविवार को ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने बताया कि एक और टैंकर पर किसी अनजान चीज से हमला हुआ। इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा, लेकिन चालक दल सुरक्षित है और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ। एजेंसी ने हमले की तारीख, जगह या जहाज का प्रकार नहीं बताया।

विदेशी राजदूतों की बैठक में अराघची ने कहा कि अगर हमारे दुश्मन फिर सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो हमारा जवाब पहले से ज्यादा मजबूत होगा। उन्होंने आगे कहा कि न तो सैन्य कार्रवाई से और न ही नए प्रतिबंधों से यह मामला सुलझेगा। उनके मुताबिक, केवल न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत ही लड़ाई खत्म कर सकती है। दरअसल, जून में दोनों पक्षों ने एक समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें स्थायी हल की रूपरेखा थी। लेकिन होर्मुज में जहाजों पर ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सैन्य अभियान फिर शुरू हो गए।

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान उन जहाजों पर हमला कर रहा है जो बिना इजाजत के आना-जाना चाहते हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर जवाबी नाकाबंदी लगाई है और नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को निशाना बनाया है। पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग ईरान और अमेरिका के अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष बातचीत की। तेहरान ने होर्मुज फिर खोलने के लिए सात शर्तें रखीं। इनमें मध्य पूर्व में युद्धविराम, विदेश में जमे ईरानी पैसे खोलना, तेल क्षेत्र पर लगा प्रतिबंध हटाना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उन्होंने आगे बातचीत या नई सैन्य कार्रवाई दोनों के दरवाजे खुले रखे।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई ने रविवार को कहा कि अमेरिका का नया प्रस्ताव उसके पुराने परमाणु प्रस्तावों जैसा ही है। उन्होंने साफ किया कि ईरान का ध्यान होर्मुज पर है। जलमार्ग खोलने के लिए ईरानी व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में रुकावटें हटानी होंगी और पाबंदियां खत्म करनी होंगी। वहीं, अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह जंग ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जरूरी है। ईरान लंबे समय से इस आरोप से इनकार करता रहा है। होर्मुज बंद होने से दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचने के बाद ध्यान फिर से इसे खोलने पर चला गया है।

बता दें कि अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद ईरान पर हमला नहीं किया है, लेकिन इलाके में नई सैन्य तैयारी कर रहा है। अमेरिकी मीडिया एक्सियोस के मुताबिक, वाशिंगटन ने सऊदी अरब और कतर में और पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की हैं, ताकि ईरान के संभावित जवाबी हमले से ऊर्जा सुविधाओं को बचाया जा सके। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत और उसका बेड़ा भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। वहां पहले से दो अमेरिकी विमानवाहक समूह मौजूद हैं। एक्सियोस ने यह भी बताया कि ट्रंप के शीर्ष मंत्रियों ने शुक्रवार को ईरान युद्ध और यमन की लड़ाई पर चर्चा की। यमन में तेहरान समर्थित हूती लड़ाके सरकारी सेना और सऊदी अरब से टकरा रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN