Source :- LIVE HINDUSTAN

रूस ने एक बार फिर यूक्रेन में अमेरिका समर्थित जैविक गतिविधियों का गंभीर आरोप लगाया है। रूसी जांच समिति ने दावा किया है कि उसे ठोस सबूत मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े जैविक अनुसंधान कार्यक्रमों को अमेरिकी रक्षा विभाग की वित्तीय सहायता प्राप्त थी।

रूस ने एक बार फिर यूक्रेन में अमेरिका समर्थित जैविक गतिविधियों का गंभीर आरोप लगाया है। रूसी जांच समिति ने दावा किया है कि उसे ठोस सबूत मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े जैविक अनुसंधान कार्यक्रमों को अमेरिकी रक्षा विभाग की वित्तीय सहायता प्राप्त थी। स्पुतनिक इंडिया के अनुसार, जांच समिति की प्रवक्ता स्वेतलाना पेट्रेंको ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर कहा कि जांचकर्ताओं को ‘सामूहिक विनाश के हथियारों के विकास और भंडारण’ से संबंधित सामग्री मिली है। उनके बयान में प्लेग, एंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस और टुलारेमिया जैसे खतरनाक रोगाणुओं पर किए गए शोध का जिक्र किया गया। ये सभी रोगाणु संभावित जैविक युद्ध एजेंट माने जाते हैं।

रूस का क्या है आरोप?

2022 में यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से रूस लगातार यह दावा कर रहा है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करते हुए यूक्रेन में गुप्त जैविक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क संचालित किया। रूसी अधिकारियों का कहना है कि दर्जनों प्रयोगशालाएं अमेरिकी समर्थन से चल रही थीं, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की आड़ में सैन्य-जैविक गतिविधियां हो रही थीं> मॉस्को ने यह भी आरोप लगाया है कि युद्ध शुरू होने के बाद संबंधित दस्तावेजों और सामग्रियों को यूक्रेन से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया था। इन कार्यक्रमों में प्रवासी पक्षियों और चमगादड़ों पर किए गए अध्ययन भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्हें रूस अपने लिए प्रत्यक्ष खतरा मानता है।

अमेरिका और यूक्रेन क्या बोला?

अमेरिका और यूक्रेन ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन की प्रयोगशालाएं हथियार निर्माण के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोग निगरानी और महामारी रोकथाम के उद्देश्य से थीं। यह विवाद मुख्य रूप से 2005 में अमेरिकी रक्षा विभाग और यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए सहयोग समझौते पर केंद्रित है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने यूक्रेन में करीब 46 प्रयोगशालाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण में सहायता दी थी।

अमेरिका का दावा है कि यह कार्यक्रम सोवियत काल के खतरनाक जैविक पदार्थों को सुरक्षित करने और संभावित प्रकोपों को रोकने के लिए शुरू किया गया था, जिसे ‘नुन-लुगर’ (Cooperative Threat Reduction) कार्यक्रम के अंतर्गत चलाया जाता है। 2022 में अमेरिका की पूर्व उप विदेश मंत्री विक्टोरिया नुलैंड ने सीनेट में गवाही देते हुए स्वीकार किया था कि यूक्रेन में जैविक अनुसंधान केंद्र मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ये केंद्र हथियार विकास के बजाय जन स्वास्थ्य और खतरा न्यूनीकरण के लिए काम करते हैं।

आपको यहां बता दें कि जैविक हथियार वैश्विक सुरक्षा का अत्यंत संवेदनशील मुद्दा रहा है। अमेरिका ने 1969 में अपने आक्रामक जैविक हथियार कार्यक्रम को समाप्त कर दिया था और 1972 में जैविक तथा विषैले हथियार सम्मेलन (Biological Weapons Convention) पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, इस संधि के अनुपालन और पारदर्शिता को लेकर प्रमुख देशों के बीच विवाद लंबे समय से जारी हैं। फिलहाल यह मामला फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है।

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