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राज कपूर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ साल 1985 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने उस दौर में काफी सफलता हासिल की थी। फिल्म के साथ-साथ इसके बोल्ड सीन और गाने काफी सुर्खियों में रहे थे। मूवी में मंदाकिनी ने बतौर एक्ट्रेस अपना डेब्यू किया था। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया था। मूवी में उनके अपोजिट एक्टर राजीव कपूर लीड रोल में थे। फिल्म रिलीज के सालों के बाद मंदाकिनी ने पहली बार ‘राम तेरी गंगा मैली’ को लेकर बात की है। उन्होंने बताया कि उन्हें 16-17 फिल्मों के लिए पैसे नहीं मिले। आइए जानते हैं आखिर क्यों?
माहौल मजेदार और बिल्कुल घर जैसा था
मंदाकिनी उर्फ यासमीन जोसेफ ने हाल ही में न्यूज एजेंसी एएनआई को अपना इंटरव्यू दिया। इस दौरान बातचीत में मंदाकिनी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दिनों के बारे में बात की है। उन्होंने फिल्म सेट पर अनौपचारिक और आपसी मेलजोल वाले माहौल को याद करते हुए बताया कि अपने करियर के दौरान उन्हें लगभग 16 से 17 फिल्मों के लिए कभी पैसे नहीं मिले। मंदाकिनी ने याद करते हुए कहा, ‘मुझे फिल्मों में काम करने में बहुत मजा आया। वे सभी बहुत अच्छी फिल्में थीं। सभी बहुत को-ऑपरेटिव थे। माहौल मजेदार और बिल्कुल घर जैसा था।’
किसी भी एक्टर से बिना परमिशन मिल सकते थे
मंदाकिनी ने उस दौर के काम करने के माहौल की तुलना आज के समय से करते हुए कहा कि एक्टर्स और फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे लोगों के बीच बातचीत बहुत अनौपचारिक होती थी। उन्होंने कहा, ‘माहौल बहुत अच्छा होता था। सब सेट पर ही एक साथ में खाना खाते थे और किसी एक्टर से मिलने से पहले पूछने जैसी कोई बात नहीं होती थी। सब साथ बैठते थे और कोई भी किसी के भी कमरे में जा सकता था। यह अच्छा लगता था और घर जैसा महसूस होता था।’
फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट बहुत अनौपचारिक होते थे
एक्ट्रेस ने कहा कि उस समय फिल्म साइन करने और पेमेंट के मामले में भी अनौपचारिकता बरती जाती थी। मंदाकिनी ने याद किया कि कॉन्ट्रैक्ट अक्सर बहुत आसान होते थे। कभी-कभी लोग बस एक्टर से फिल्म साइन करने के लिए कहते थे और पेमेंट की बात बाद में तय होती थी। एक्ट्रेस ने बताया, ‘फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट बहुत अनौपचारिक होते थे। लोग कहते थे, ‘आइए, फिल्म साइन कर लीजिए।’ और उसके बाद, कभी पेमेंट मिलता था, तो कभी नहीं। ऐसा भी होता था।’
’16 से 17 फिल्मों के नहीं मिले पेमेंट’
मंदाकिनी ने आगे बताया कि कभी-कभी वह बिना फीस लिए फिल्मों में काम करने के लिए तैयार हो जाती थीं, खासकर तब जब फिल्म बनाने वाले या साथी कलाकार कुछ दिनों काम करने को लेकर उनसे मदद मांगते थे।
‘राम तेरी गंगा मैली’ के बारे में
बता दें कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ उस दौर की सुपरहिट फिल्म थी। ये फिल्म भले ही अपने बोल्ड कंटेंट के लिए काफी विवादों में रही, लेकिन इसके बावजूद इसने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की। फिल्म में मंदाकिनी के झरने के नीचे नहाने वाले और ब्रेस्ट फीडिंग सीन काफी सुर्खियों में रहा। इस फिल्म को राज कपूर ने डायरेक्टर किया था। फिल्म ने 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे। ‘राम तेरी गंगा मैली’ को बेस्ट फिल्म, राज कपूर को बेस्ट डायरेक्टर, रविंद्र जैन को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर, राज कपूर को बेस्ट एडिटर और सुरेश सावंत को बेस्ट आर्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। राज कपूर की 1985 की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का बजट लगभग 1.44 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के बीच था। वहीं, इसने लगभग 19 करोड़ रुपये की कमाई की थी। ये बॉक्स ऑफिस पर ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर मूवी है।
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