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रिटेल के बाद अब थोक महंगाई ने दिया टेंशन, सितंबर में 11.39% पर पहुंची

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • WPI आधारित महंगाई दर बढ़कर सितंबर में 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.9 प्रतिशत थी
  • महंगाई को बढ़ाने में खनिज तेल, खाद्य वस्तुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कोयला, बुनियादी धातुओं, रसायनों, कपड़ा, रबर-प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में तेजी ने अहम भूमिका निभाई

देश में खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई ने भी रफ्तार पकड़ ली है। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI आधारित महंगाई दर बढ़कर सितंबर में 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.9 प्रतिशत थी। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनीस्ट्री द्वारा 14 अक्टूबर यानी आज जारी आंकड़ों के मुताबिक कीमतों में तेजी से अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। बता दें रिटेल महंगाई भी अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर 2026 में 5.54% हो गई। यह डेटा इस हफ्ते के शुरुआत में ही आया था।

खनिज तेल, खाद्य वस्तुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कोयला, बुनियादी धातुओं, रसायनों, कपड़ा, रबर-प्लास्टिक उत्पादों और बिजली के उपकरणों की कीमतों में तेजी ने थोक महंगाई को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

सितंबर में ईंधन और बिजली की महंगाई बढ़कर 25.85% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 22.93% थी। वहीं, खाद्य महंगाई को लेकर भी आने वाले महीनों में राहत मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है।

सितंबर में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़कर 9.76% हो गई, जो अगस्त में 8.37% थी। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई भी 7.76% से बढ़कर 8.67% पर पहुंच गई। इसमें खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं के साथ खनिज शामिल हैं।

खाद्य महंगाई भी बढ़ी: खाद्य वस्तुओं और खाद्य उत्पादों को शामिल करने वाले थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई सितंबर में बढ़कर 8.66% हो गई। अगस्त में यह 7.05% थी। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगले तीन से छह महीनों तक खाद्य महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। कुछ विशेषज्ञों ने इसके 7-8% तक पहुंचने की आशंका जताई है।

थोक महंगाई बढ़ने का आम लोगों पर क्या होगा असर?

थोक महंगाई दर में तेजी का असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका रहती है। थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी कारोबारियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए लागत का दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि, थोक महंगाई बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि खुदरा बाजार में सभी वस्तुएं उसी अनुपात में महंगी हो जाएंगी। खुदरा कीमतों पर मांग, सप्लाई, माल भाड़ा और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति का भी असर पड़ता है।

RBI भी महंगाई को लेकर सतर्क

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की शुरुआत में नीतिगत रेपो रेट बढ़ाकर 5.5% कर दी थी। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी थी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया था कि महंगाई और इसके भविष्य के अनुमान पिछले साल की तरह अनुकूल नहीं हैं। महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रहने पर ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश प्रभावित हो सकती है। इसका असर कर्ज लेने वालों और कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।

नए आधार वर्ष पर जारी हुए महंगाई के आंकड़े

सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित श्रृंखला के तहत जारी किए गए हैं। सरकार ने जून में WPI के लिए 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया था, ताकि अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके। नई श्रृंखला में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसमें सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसी न्यू एनर्जी कैटेगरी को भी शामिल किया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN