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लादेन 10 साल छिपा रहा, पाकिस्तान की असलियत याद रहे; अमेरिकी सांसद ने की गजब बेइज्जती

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इससे पहले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल के प्रति रुख लंबे समय से नकारात्मक रहा है और ऐसी परिस्थितियों में उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर अमेरिकी सांसदों ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिया गया बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका को यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान वास्तव में कैसा देश है। जिस देश में ओसामा बिन लादेन वर्षों तक छिपा रहा, जहां ईशनिंदा कानूनों का चुनिंदा तरीके से इस्तेमाल होता है। जिसके प्रधानमंत्री ने ईरान के पूर्व नेता की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की हो, वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने के लिए सही नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अली खामेनेई को विद्वान और दूरदर्शी नेता बताया था। उन्होंने कहा कि खामेनेई ने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ ईरान की सेवा की। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान उन्हें याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और ईरान भाईचारे वाले देश हैं और दोनों हर परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे। इस बयान पर अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी टीवी टिप्पणीकार मार्क लेविन ने भी सवाल उठाया कि क्या ऐसा देश वास्तव में ईरान के साथ किसी शांति प्रक्रिया में भरोसेमंद मध्यस्थ हो सकता है।

पाकिस्तान की भूमिका पर पहले भी उठे सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिकी नेताओं ने आपत्ति जताई हो। इससे पहले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल के प्रति रुख लंबे समय से नकारात्मक रहा है और ऐसी परिस्थितियों में उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्राहम ने दावा किया था कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के कुछ हवाई अड्डों पर मौजूद रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कभी भी अब्राहम अकार्ड्स में शामिल नहीं होगा क्योंकि उसे इजरायल पर भरोसा नहीं है।

रिक स्कॉट ने पिछले महीने भी पाकिस्तान और कतर को लेकर इसी तरह की टिप्पणी की थी। उनका कहना था कि दोनों देशों पर लंबे समय से आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। वे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के हितों का समर्थन करते दिखाई देते हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन अमेरिकी नेताओं की ताजा टिप्पणियों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अमेरिका में उठी इन आपत्तियों के बाद पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN