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वेनेजुएला ऑपरेशन से पहले ट्रंप ने Grok से ली थी सलाह? चैट रिकॉर्ड को लेकर अमेरिका में हलचल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी हाउस की दो कमेटियों के डेमोक्रेटिक नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि वे एलन मस्क के ग्रोक समेत अन्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट्स के साथ की गई अपनी बातचीत के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को पकड़ने वाले ऑपरेशन से पहले एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok से सलाह ली थी या नहीं, इस बात को लेकर अमेरिका में हलचल मच गई है। डेमोक्रेटिक सांसद अब ट्रंप के AI चैट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की दो कमेटियों के डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रंप को पत्र लिखकर कहा है कि वे एलन मस्क के ग्रोक समेत अन्य प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स के साथ की गई अपनी पूरी बातचीत के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और उन्हें नष्ट न होने दें।

इस पत्र में सांसदों ने साफ मांग की है कि आधिकारिक काम के दौरान ट्रंप, उनके करीबी स्टाफ और सलाहकारों द्वारा AI चैटबॉट्स में डाले गए सभी प्रॉम्प्ट्स (सवाल) और सिस्टम द्वारा दिए गए जवाबों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। जिन AI टूल्स का नाम लिया गया है, उनमें एलन मस्क का ग्रोक, OpenAI का ChatGPT, Anthropic का Claude, Google का Gemini और Perplexity शामिल हैं।

ग्रोक से क्या पूछा गया था?

पत्र में विस्तार से लिखा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रपति के कामों को पूरा करने के लिए चैटबॉट्स से सलाह मांगी थी। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा वाले मामले में उन्होंने ग्रोक से पूछा था कि अगर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया जाए तो वहां के आम लोग क्या प्रतिक्रिया देंगे। ग्रोक ने जवाब में कहा था कि राष्ट्रपति मादुरो एक ‘बहुत ज्यादा नापसंद किए जाने वाले तानाशाह’ हैं और कई वेनेजुएला के लोग शायद उनके गिरने का जश्न मनाएंगे।

टाइम की रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

दरअसल, इस महीने की शुरुआत में टाइम पत्रिका ने वाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रंप ने एक बार ग्रोक से अपने राष्ट्रपति पद और अपनी राजनीतिक विरासत के बारे में घंटों तक सवाल पूछे थे। उसी समय वे वेनेजुएला की उन नावों पर मिसाइल हमले का आदेश दे रहे थे, जिन पर उनका आरोप था कि वे अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी कर रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ग्रोक से सीधे पूछा था कि अगर अमेरिका मादुरो को गिरफ्तार कर ले तो वेनेजुएला के लोग क्या प्रतिक्रिया देंगे। वहां मौजूद अधिकारी ने बताया कि चैटबॉट ने जवाब दिया कि मादुरो एक दबाने वाला और बहुत ज्यादा नापसंद किया जाने वाला तानाशाह है, और कई वेनेजुएला के लोग उसके गिरने पर खुशी मनाएंगे।

सांसद क्या जांच करना चाहते हैं?

मैरीलैंड के प्रतिनिधि जेमी रस्किन और कैलिफोर्निया के प्रतिनिधि रॉबर्ट गार्सिया इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या AI चैटबॉट्स से मिले इन जवाबों ने अमेरिकी सरकार की नीति बनाने या सैन्य फैसले लेने में कोई भूमिका निभाई है। दोनों सांसदों ने 11 नवंबर को शाम 5 बजे तक इस पूरे मामले पर एक विस्तृत ब्रीफिंग देने की भी मांग की है। उन्होंने पत्र में साफ कहा है कि राष्ट्रपति, वाइट हाउस के स्टाफ या राष्ट्रपति के कार्यकारी कार्यालय (EOP) में काम करने वाले सलाहकारों द्वारा संवैधानिक, कानूनी, आधिकारिक या औपचारिक काम करते समय AI चैटबॉट को दिए गए किसी भी प्रॉम्प्ट को सिस्टम के जवाबों के साथ सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

पत्र में आगे लिखा गया है कि आप, आपके स्टाफ या राष्ट्रपति के कार्यकारी कार्यालय में सलाहकारों ने अपने संवैधानिक, कानूनी या अन्य आधिकारिक और औपचारिक कामों को पूरा करने के लिए AI चैटबॉट्स को जो भी प्रॉम्प्ट दिए हैं… वे पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका की संपत्ति हैं और कानूनी तौर पर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

वाइट हाउस का जवाब

इस मांग पर वाइट हाउस के एक अधिकारी ने पोलिटिको को बताया कि प्रशासन कानून के तहत जरूरी सभी रिकॉर्ड पहले से ही सुरक्षित रखता है। अधिकारी ने कहा कि वे सभी जरूरी दस्तावेज कानून के मुताबिक संभालकर रखते हैं।

सरकार में AI का बढ़ता इस्तेमाल

बता दें कि यह पूरी जांच ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी सरकार अपने आधिकारिक कामों में AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रही है। जुलाई 2025 में पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने सरकारी कामों के लिए AI सिस्टम को बड़े पैमाने पर लागू करने के हिस्से के रूप में ग्रोक का इस्तेमाल शुरू करने के लिए कई मिलियन डॉलर के समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा पेंटागन ने OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों के AI टूल्स का भी इस्तेमाल किया है, हालांकि इन कंपनियों के सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग नियम और शर्तें लागू की गई हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN