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शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर क्या LTCG टैक्स खत्म होगा? अभी कितना लगता है?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • LTCG: SBI रिसर्च ने अपनी ईकोरैप रिपोर्ट में इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव दिया था
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार LTCG टैक्स पर स्टेकहोल्डर्स के विचार और इस विषय पर होने वाली बहस को सुनने के लिए तैयार है

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर अहम चर्चा शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार LTCG टैक्स पर स्टेकहोल्डर्स के विचार और इस विषय पर होने वाली बहस को सुनने के लिए तैयार है। इससे टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलावों को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई है।

LTCG टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव

इससे पहले SBI रिसर्च ने अपनी ईकोरैप रिपोर्ट में इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव दिया था। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देने और भारतीय बाजार में स्टेबल कैपिटल फ्लो को आकर्षित करने के लिए शेयरों को लॉन्ग टर्म निवेश मानने की अवधि बढ़ाकर 2 से 3 साल की जा सकती है। हालांकि, ये केवल सुझाव हैं। सरकार ने मौजूदा टैक्स नियमों में बदलाव की घोषणा नहीं की है।

कितना लगता है LTCG टैक्स?

मौजूदा नियमों के तहत लिस्टेड इक्विटी शेयर, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड और पात्र घरेलू इक्विटी ETF को 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) का लाभ मिलता है।

LTCG टैक्स: एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के पात्र लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। लागू सेस और सरचार्ज अतिरिक्त हो सकते हैं।

STCG टैक्स: 12 महीने या उससे कम अवधि में बेचे गए पात्र निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20% है।

1.25 लाख रुपये की छूट: पात्र इक्विटी निवेश से होने वाले कुल सालाना LTCG में यह सीमा टैक्स से मुक्त रहती है।

सीए अभिनंदन पांडेय ने इसे एक उदाहरण के साथ बताया, “मान लीजिए किसी निवेशक को एक वित्त वर्ष में 3 लाख रुपये का पात्र LTCG होता है, तो 1.25 लाख रुपये की छूट घटाने के बाद 1.75 लाख रुपये पर 12.5% की दर से 21,875 रुपये टैक्स बनेगा। यह रकम सेस और सरचार्ज से पहले की है।”

12 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का LTCG पर लाभ नहीं

न्यू टैक्स रिजीम में सामान्य इनकम पर मिलने वाली 12 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ इन विशेष दरों से टैक्सेबल कैपिटल गेन पर नहीं मिलता। इसलिए निवेशकों को सामान्य आय और शेयर बाजार से होने वाले मुनाफे की टैक्स गणना अलग-अलग समझनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय, गोल्ड और डेट ETF पर भी इक्विटी निवेश जैसी LTCG छूट अपने आप लागू नहीं होती। इन पर टैक्स संबंधित इन्वेस्टमेंट कैटेगरी और लागू नियमों पर निर्भर करता है।

SIP निवेशकों को सेल की डेट पर ध्यान देना जरूरी

म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करने वालों के लिए हर किस्त की खरीद तारीख अलग होती है। इसलिए प्रत्येक किस्त की होल्डिंग अवधि अलग-अलग गिनी जा सकती है। बिक्री में कुछ दिनों का अंतर भी यह तय कर सकता है कि मुनाफे पर शॉर्ट टर्म टैक्स लगेगा या लॉन्ग टर्म टैक्स।

टैक्स बचाने में कैपिटल लॉस भी मददगार

  • निवेशक अपने कैपिटल लॉस का इस्तेमाल टैक्स लॉयबिलिटी घटाने के लिए कर सकते हैं।
  • शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म, दोनों तरह के कैपिटल गेन के मुकाबले एडजस्ट किया जा सकता है।
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को केवल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के मुकाबले एडजस्ट किया जा सकता है।
  • एडजस्ट नहीं हो पाने वाले नुकसान को निर्धारित समयसीमा में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की शर्त पूरी होने पर अधिकतम आठ साल तक आगे ले जाया जा सकता है।

STT और अन्य खर्चों का भी रखें ध्यान

शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) एक अतिरिक्त लागत है। इसे कैपिटल गेन की गणना में कटौती के रूप में नहीं घटाया जा सकता।

डिलीवरी आधारित इक्विटी शेयरों की खरीद और बिक्री पर सामान्यतः प्रत्येक तरफ 0.1% STT लगता है। वहीं, इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट्स भुनाने पर लागू STT की दर 0.001% है। निवेशकों को सेल से पहले होल्डिंग अवधि, बची हुई टैक्स छूट, उपलब्ध कैपिटल लॉस, एग्जिट लोड और लेनदेन लागत का हिसाब रखना चाहिए। अधिक पूंजीगत लाभ होने पर एडवांस टैक्स की देनदारी भी बन सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN