Home BUSINESS NEWS HINDI सरकार ने अचानक बदले पेट्रोल-डीजल के नियम! 1 जुलाई से पूरे देश...

सरकार ने अचानक बदले पेट्रोल-डीजल के नियम! 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगा ये बड़ा फैसला

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी। अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, उद्योग और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ता पहले की तरह बिना किसी मात्रा सीमा के सीधे पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब पश्चिम एशिया (Middle East) में कई महीनों तक चले तनाव के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और भारत में ईंधन की उपलब्धता भी पहले से बेहतर हो गई है।

क्यों लगाई गई थी पाबंदी?

दरअसल, जून 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उस दौरान सरकार को आशंका थी कि कहीं देश में पेट्रोल और डीजल की कमी न पैदा हो जाए। इसी वजह से सरकार ने आपातकालीन कदम उठाते हुए व्यावसायिक खरीदारों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी थी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी रोकना और ईंधन की समान आपूर्ति सुनिश्चित करना था।

कीमतों में अंतर भी थी बड़ी वजह

सरकार के इस फैसले के पीछे एक और बड़ी वजह डीजल की कीमतों में अंतर था। उस समय औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों को मिलने वाला डीजल खुदरा कीमत की तुलना में करीब 40 रुपये प्रति लीटर महंगा पड़ रहा था। ऐसे में कई कंपनियां और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर महंगे औद्योगिक डीजल की बजाय सीधे पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीदने लगे। इसका असर यह हुआ कि सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर डीजल की डिमांड अचानक बढ़ गई, जबकि निजी कंपनियों के पंपों पर बिक्री घटने लगी।

भारत में इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) मिलकर देश के लगभग 90 प्रतिशत यानी एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप संचालित करती हैं। इन सरकारी कंपनियों के पंपों पर डीजल की डिमांड तेजी से बढ़ने के कारण कई जगह सप्लाई पर दबाव देखा गया। वहीं, निजी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री अपेक्षाकृत कम रही, क्योंकि वे बाजार आधारित कीमतों पर ईंधन बेच रही थीं।

भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में शामिल है, लेकिन देश अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह का संकट सीधे भारतीय ईंधन बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से सरकार ने समय रहते अस्थायी प्रतिबंध लगाकर स्थिति को नियंत्रित किया था।

पहले की तुलना में सामान्य हुए हालात

अब जबकि पश्चिम एशिया में हालात पहले की तुलना में काफी सामान्य हो चुके हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी स्थिर होने लगी है, सरकार ने इन प्रतिबंधों को हटाने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर, फैक्ट्रियां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ता फिर से सामान्य तरीके से रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे।

एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला बताता है कि सरकार को देश में ईंधन की उपलब्धता पर पूरा भरोसा है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलेगी और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को फ्यूल खरीदने में पहले जैसी सुविधा मिलेगी। साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और आपूर्ति सामान्य होने से आने वाले समय में फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। 1 जुलाई से लागू यह बदलाव आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग और परिवहन क्षेत्र के लिए भी राहतभरी खबर माना जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN