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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/01/1200x900/sitaro_ki_dhal_1780315788585_1780315803262_b1ce6a9a-99d1-4cb0-9318-9ba387faabf8.jpgPersonality Rights Protection Case: अमिताभ बच्चन, नागा चैतन्य, अल्लू अर्जुन जैसे बड़े बड़े सुपरस्टार दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। आखिर इन सितारों को किस बात का डर था, जो अपने-अपने इलाकों की अदालतों को छोड़कर दिल्ली का रुख किया। जानिए इस खबर में।
Personality Rights Protection Case: AI के दौर में सेलिब्रिटीज के लिए सबसे बड़ा खतरा अब सिर्फ अफवाहें या फेक न्यूज नहीं, बल्कि डीपफेक वीडियो, फर्जी विज्ञापन और उनकी पहचान का गलत तरीके से किया गया इस्तेमाल बन गया है। ताजा मामला बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन से जुड़ा है। दिल्ली HC ने हाल ही में उनके नाम, तस्वीर और AI से तैयार किए गए डीपफेक कंटेंट के खिलाफ बड़ा आदेश जारी किया है।
अदालत ने तमाम वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स पोर्टलों को ऐसे कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है, जिनमें वरुण धवन को आपत्तिजनक या भ्रामक परिस्थितियों में दिखाया गया था। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि जब वरुण धवन मुंबई के हैं, तो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया? और ऐसा सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ है। पिछले कुछ सालों में देश के अलग-अलग हिस्सों के कई बड़े सितारे अपनी डिजिटल पहचान बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुके हैं।
दिल्ली HC क्यों बन रहा सेलिब्रिटीज की पहली पसंद?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले कुछ सालों में “पर्सनैलिटी राइट्स” और “डिजिटल राइट्स” से जुड़े मामलों में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। यही वजह है कि यह अदालत अब ऐसे विवादों की सबसे प्रमुख न्यायिक जगह बनती जा रही है। इससे पहले अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्राफ, अल्लू अर्जुन, नागा चैतन्य और अरिजीत सिंह जैसे कई बड़े नाम भी अपनी आवाज, चेहरा, फोटो और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुके हैं। अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाकर उन्हें राहत भी दी।
आखिर क्या होता है पर्सनैलिटी राइट्स का मामला?
अच्छा, हम तब से पर्सनैलिटी राइट्स शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्या आपको इसका मतलब मालूम है? अगर नहीं, तो हम आपको बताते हैं। आसान शब्दों में कहें तो- किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज, हस्ताक्षर या सार्वजनिक छवि पर उसका अधिकार होता है। अब अगर किसी सेलिब्रिटी की फोटो लगाकर फर्जी विज्ञापन चलाया जा रहा है, उसकी आवाज की नकल करके AI वीडियो बनाए जा रहे हैं या उसके नाम से सामान बेचा जा रहा है; तो इस तरह के मामलों में इस अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
देश-दुनिया में AI तकनीक बहुत तेजी से अपने पैर पसार रही है। ऐसे में इस तकनीक की मदद से डीपफेक और फर्जी फोटो वीडियो बनाना और भी आसान हो गया है। आज कुछ मिनटों में किसी अभिनेता या खिलाड़ी का नकली वीडियो तैयार की जा सकती है। इससे न केवल जनता को गलत जानकारी मिलती है, बल्कि सेलीव्रिटी की प्रतिष्ठा और करियर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
साउथ से बॉलीवुड तक क्यों पहुंच रहे हैं दिल्ली?
दिल्ली हाई कोर्ट को कई कानूनी जानकार अब देश का “डिजिटल राइट्स हब” मानने लगे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े बड़े मुद्दों को अक्सर दिल्ली हाईकोर्ट में सुना जाता है। इसे थोड़ा और आसान करके समझते हैं। अधिकतर राष्ट्रीय स्तर के विवादों में केंद्र सरकार, तकनीकी कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पक्षकार बनते हैं। इनमें से कई मामले दिल्ली हाईकोर्ट में सुने जाते हैं।
यही कारण है कि चाहे बॉलीवुड का स्टार हो, दक्षिण भारत का अभिनेता हो या कोई मशहूर गायक, डिजिटल पहचान और AI डीपफेक के खतरे से बचने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है। मानों ये एक आम कानूनी रणनीति बनती जा रही है। AI के बढ़ते दौर में यह अदालत सेलिब्रिटीज की डिजिटल सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल बनकर उभरी है।
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