मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को हजारों लोग एकजुट हुए और असहमति का शक्तिशाली प्रदर्शन किया। संस्थापक Abhijeet Dipke तथा सह-संयोजक Ashutosh Ranka, Saurav Das और Ratna Singh के नेतृत्व में Cockroach Janta Party (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी सूचियों में अनियमितताओं का आरोप लगाया और Election Commission की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया का विरोध किया।
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## अनधिकृत प्रदर्शन, बुलंद होती आवाजें
पुलिस द्वारा सभा की अनुमति देने से इनकार किए जाने और 2013 के Bombay High Court के फैसले के तहत Shivaji Park को साइलेंस ज़ोन घोषित किए जाने का हवाला देते हुए लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे। लगभग 4,000 से 5,000 लोग हाथों में भारत का तिरंगा लेकर Dadar स्थित Shivaji Park के गेट पर जमा हुए। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कथित तौर पर दंगा नियंत्रण इकाइयों समेत करीब 800 अधिकारियों को तैनात किया।
पार्क में नारे गूंजते रहे। इनमें “Gyanesh, it’s done bro,” “Go Gyanu Go,” “Gaddaar Gyanu Must Go,” और “Gyanu kaka… rajinama dya, rajinama dya” शामिल थे। इन नारों के बीच *Rang De Basanti* जैसे देशभक्ति गीत बजते रहे और पृष्ठभूमि में तेज़ संगीत बढ़ते आक्रोश को और मुखर कर रहा था।
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## प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं
CJP की मांगों की सूची जवाबदेही की व्यापक मांग को दर्शाती है:
– Gyanesh Kumar का तत्काल इस्तीफा।
– SIR प्रक्रिया को मंजूरी देने वालों का खुलासा करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए।
– विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर रोक लगाई जाए।
– मतदाता सूची को जनवरी 2025 के संस्करण पर बहाल किया जाए।
– Election Commissioners की नियुक्ति का तरीका तय करने वाले 2023 के कानून को निरस्त किया जाए।
– नागरिक समाज की भागीदारी वाली Election Commission की पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया स्थापित की जाए।
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## नारे, भाषण और सितारों की मौजूदगी
Abhijeet Dipke ने भीड़ को संबोधित करते हुए चेतावनी दी, “If Gyanu is gone, then Prime Minister Narendra Modi will also go.” Ashutosh Ranka ने भी कहा कि “this is just a trailer as the picture will be at Jantar Mantar in Delhi.” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से गिरफ्तारी से न डरने की अपील की और कहा कि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिशें उनके संकल्प को कमजोर नहीं करेंगी।
हस्तियों ने भी इस संदेश को मजबूती दी। अभिनेता Shabana Azmi और Naseeruddin Shah, संगीतकार Vishal Dadlani तथा निर्देशक Vishal Bhardwaj मौजूद रहे। Azmi ने कहा: “Since childhood we have been hearing voting is our right, but if the same right is taken away, then what will we do, we protest… the Constitution of this country gives this right.”
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## व्यक्तिगत कहानियां, कमजोर वर्गों की आवाजें
Somaiya College के 70 वर्षीय शिक्षक Gangadhar Menon ने गहरी चिंताओं को उजागर करते हुए कहा: “So far, we were talking that VVPAT had problems, but this has gone way too deep. Now, they are going for voters list itself.”
NCP नेता Anish Gawande ने बताया कि SIR प्रक्रिया ने हाशिए पर रहने वाले समुदायों को किस तरह प्रभावित किया। उन्होंने Assam के उन लोगों का उदाहरण दिया, जो बाढ़ के कारण दस्तावेज हासिल नहीं कर सके, और उन ट्रांसजेंडर लोगों का भी उल्लेख किया, जिनके पास पहचान पत्र नहीं होने के कारण उनके नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए।
प्रदर्शन के दौरान दुखद रूप से 75 वर्षीय प्रतिभागी Gopalakrishna Subbaiya Pillai को करीब शाम 5:00 बजे Shivaji Park के पास दिल का दौरा पड़ा। उन्हें Sushrusha Hospital ले जाया गया, लेकिन उन्होंने बीमारी के आगे दम तोड़ दिया।
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## टकराव, गिरफ्तारियां और राष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी
जब मुंबई में हजारों लोग जवाब मांग रहे थे, वहीं Delhi में इसी सिलसिले में हुए प्रदर्शनों के दौरान 700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इसमें प्रमुख विपक्षी नेता, छात्र संगठन और नागरिक समाज के कार्यकर्ता शामिल थे। सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए पुलिस ने पूरे New Delhi में निषेधाज्ञा लागू कर दी। इस बीच, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दौरान मध्य जिलों में इंटरनेट सेवाएं और मेट्रो स्टेशन के गेट भी प्रभावित हुए।
मुंबई में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP के सदस्य और युवा नागरिक पुलिस बैरिकेड पार कर Shivaji Park में एकत्र हुए। Gandhi Jayanti के दिन आयोजित यह प्रदर्शन उस बड़े अभियान का हिस्सा था, जिसे CJP आगे भी जारी रखने का इरादा रखती है।
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## बड़ी तस्वीर: SIR विवाद और संस्थागत असहमति
इन प्रदर्शनों के केंद्र में SIR यानी Special Intensive Revision है—यह मतदाता सूचियों को अपडेट करने के उद्देश्य से Election Commission द्वारा शुरू की गई देशव्यापी प्रक्रिया है। आरोप सामने आए हैं कि इस प्रक्रिया के चलते मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि पिछले करीब 10 महीनों के दौरान दो Election Commissioners—Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi—ने कई मौकों पर आपत्तियां उठाईं और Gyanesh Kumar द्वारा उनकी भागीदारी के बिना लिए गए फैसलों का विरोध किया। आलोचकों का कहना है कि यह आंतरिक सहमति और संस्थागत पारदर्शिता की कमी का संकेत है।
CJP के प्रदर्शन को क्षेत्रीय दलों, युवा संगठनों और छात्र समूहों से व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि दांव पर खुद लोकतंत्र है। भाषणों में नागरिक अवज्ञा आंदोलनों से तुलना अक्सर की जा रही है, जिससे प्रदर्शन का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ गया है।
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## अब आगे क्या होगा
CJP नेताओं ने चेतावनी दी है कि मुंबई की कार्रवाई केवल शुरुआत है। उन्होंने Bengaluru, Kolkata, Goa और Ranchi समेत कई शहरों में आगे विरोध प्रदर्शन की योजनाओं का संकेत दिया है। यदि मांगें पूरी नहीं की गईं, तो Delhi में “Jantar Mantar 2.0” की संभावना बनी हुई है।
इस समय सभी की नजरें Election Commission की प्रतिक्रिया पर हैं। क्या वह कथित मतदाता सूची हेरफेर को लेकर उठाई गई चिंताओं का समाधान करेगा? क्या CEC Gyanesh Kumar को इसके परिणाम भुगतने होंगे, या संस्थागत दीवारें मजबूती से कायम रहेंगी? आने वाले सप्ताह यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि यह आंदोलन खत्म हो जाता है या भारत में मतदाता अधिकारों और संस्थागत ईमानदारी के लिए एक निर्णायक क्षण में बदल जाता है।
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