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सीबीएसई ने राहुल गांधी के ‘रिज़ल्ट में हेर-फेर’ के आरोपों पर दिया जवाब

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Source :- BBC INDIA

राहुल गांधी

इमेज स्रोत, ANI

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पढ़ने का समय: 4 मिनट

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) परीक्षा परिणामों में ‘हेर-फे़र’ का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की कंपनी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

‘कोएम्प्ट एडुटेक’ की वेबसाइट के मुताबिक़ ये एक टेक और एग्ज़ाम टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो सीबीएसई को परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है.

हालांकि सीबीएसई ने राहुल गांधी के इन आरोपों को ख़ारिज किया है.

सीबीएसई के मुताबिक़ राहुल गांधी के आरोप ग़लत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.

वेदांत ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूशन प्रोसेस के तहत उन्होंने जो स्कैन कॉपी डाउनलोड की वो उनकी नहीं किसी और की थी. बाद में सीबीएसई ने इस मामले में अपनी ग़लती मानते हुए बताया कि बताया कि वेदांत को उनकी सही आंसर शीट भेज दी गई है.

राहुल गांधी के आरोप

राहुल गांधी के सीबीएसई और केंद्र सरकार पर आरोप

इसी का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “सीबीएसई परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हुई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं.”

उन्होंने दावा किया कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ पहले ‘ग्लोबारिना’ के नाम से तेलंगाना में 2019 में विवादों में रही है.

राहुल गांधी ने सवाल किया कि कंपनी को सीबीएसई का ठेका “क्यों और किसके कहने पर” दिया गया और क्या नियमों और प्रक्रिया को दरकिनार किया गया.

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उन्होंने यह भी पूछा कि कंपनी के पुराने विवादों के बावजूद “बैकग्राउंड चेक” क्यों नहीं किए गए और कंपनी प्रबंधन और केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं.

राहुल गांधी ने मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी गठन की मांग की.

उन्होंने लिखा, “जिस कंपनी कोएम्प्ट को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले ग्लोबारिना के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है. नाम बदला- पर नीयत वही, फितरत वही. इतिहास सबको पता था, फिर भी ठेका दिया गया. ऐसी कंपनी के हाथ में 18.5 लाख बच्चों का भविष्य सौंप दिया गया और किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ा.”

सीबीएसई का जवाब

सीबीएसई का राहुल गांधी के आरोप पर जवाब

वहीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने इन आरोपों को खारिज किया है.

सीबीएसई ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए एक्स पर लिखा, “कोएम्प्ट एडुटेक को ठेका दिए जाने को लेकर लगाए गए आरोप ग़लत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.

बोर्ड ने कहा कि उसने अनुबंध देने की प्रक्रिया में जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफ़आर) के प्रावधानों का पालन किया है.

सीबीएसई के मुताबिक, बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का आरएफ़पी (रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल यानी औपचारिक दस्तावेज़ या टेंडर डॉक्यूमेंट) 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर जारी किया गया था और अनुबंध क्वालीफ़ाइड बिडर (योग्य बोलीदाता) को दिया गया.

विवाद कैसे शुरू हुआ?

एग्ज़ाम की तैयारी करते बच्चे

इमेज स्रोत, Vipin Kumar/Hindustan Times via Getty Images

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से सीबीएसई परीक्षा परिणामों और उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई पोस्ट और दावे शेयर किए जा रहे हैं.

कुछ यूज़र्स ने ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ और ‘ग्लोबारिना’ के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं और तेलंगाना में 2019 से जुड़े पुराने विवादों का ज़िक्र किया है.

हालांकि, इन दावों को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं और अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है.

कोएम्प्ट क्या है?

‘कोएम्प्ट एडुटेक’ एक एडटेक और एग्ज़ाम टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है.

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह डिजिटल इवैल्यूएशन, ऑनलाइन टेस्टिंग, आंसर बुक डिजिटाइजेशन, एग्ज़ाम मैनेजमेंट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) जैसी सेवाएं देती है. इसके ‘ऑनमार्क’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल डिजिटल मूल्यांकन के लिए किया जाता है.

सीबीएसई विवाद में भी मुख्य मुद्दा यही ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम)’ है और उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ा है.

कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सीबीएसई के 2026 ओएसएम सिस्टम में इस्तेमाल हुए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का संबंध ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ और उसके ‘ऑनमार्क’ प्लेटफॉर्म से था.

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, वह विश्वविद्यालयों, शिक्षा बोर्डों और अन्य संस्थानों के लिए ‘एंड-टू-एंड एग्ज़ामिनेशन सॉल्यूशंस’ उपलब्ध कराती है.

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ पहले ‘ग्लोबारिना टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से जानी जाती थी. हालांकि बीबीसी इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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SOURCE : BBC NEWS