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समाचार एजेंसी पीटीआई ने बीते बुधवार को बीसीसीआई के स्रोत के हवाले से बताया था कि ख़राब फ़ार्म के चलते सूर्यकुमार यादव को टी-20 की कप्तानी से हटाया जा सकता है.
इसके बाद से सूर्यकुमार यादव के भविष्य को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं, और कयास लगाए जाने लगे कि चयनकर्ताओं का अगला फ़ैसला क्या होगा.
दरअसल, आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टी20 सिरीज़ के लिए भारतीय टीम का चुनाव करने के लिए चयनकर्ताओं की बैठक होने वाली है और उनके सामने सबसे बड़ा सवाल होगा कि क्या सूर्यकुमार यादव की टी20 कप्तानी जारी रखी जाए या टीम की कमान किसी और खिलाड़ी को दी जाए.
अजीत अगरकर के नेतृत्व वाली चयन समिति को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के अलावा जापान में सितंबर 2026 में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भी टीम चुननी है.
भारतीय टीम कुछ दिनों बाद ही आयरलैंड में दो टी20 मैच खेलेगी, जबकि इसके बाद जुलाई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 5 टी20 मैचों की सिरीज़ खेली जानी है.
बीते कुछ महीनों में सूर्यकुमार की बल्लेबाज़ी वैसी नहीं रही है जिसके लिए वो जाने जाते हैं. सूर्या मध्य क्रम में खेलते हैं और ऐसे में उनके आलोचकों का कहना है कि सूर्या की जगह किसी दूसरे प्रतिभाशाली क्रिकेटर को मौका दिया जाना चाहिए.
सूर्य कुमार यादव को रखें या नहीं?
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चयनकर्ताओं के सामने सबसे अहम सवाल यही हो सकता है कि टी20 वर्ल्ड कप ख़िताब का बचाव करने वाली टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव को ही नेतृत्व सौंपा जाए या फिर उनकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका दिया जाए.
सूर्य कुमार यादव का मौजूदा बल्लेबाज़ी फॉर्म लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है.
इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल 2026 में उन्होंने 13 पारियों में केवल 270 रन बनाए. उनका औसत 20.76 और स्ट्राइक रेट 147.54 रहा.
ज़ाहिर है आईपीएल के स्टार खिलाड़ियों में शुमार रहे और कई बार आईपीएल खिताब जीतने वाले खिलाड़ी रहे सूर्यकुमार के ये आंकड़े उम्मीदों के मुताबिक नहीं हैं.
आईपीएल से पहले हुए टी20 वर्ल्ड कप में भी सूर्यकुमार बल्ले से संघर्ष करते नज़र आए थे. उन्होंने नौ पारियों में 242 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट घटकर 136.72 रहा था.
वर्ल्ड कप में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन अपने घरेलू मैदान पर ही आया था, लेकिन वह भी अमेरिका जैसी कमज़ोर समझे जाने वाली टीम के ख़िलाफ़.
सूर्या ने मुंबई में नाबाद 84 रन की पारी खेली थी और इसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था.
खेल पत्रकार बोरिया मजूमदार कहते हैं, “खेल का अंतिम पैमाना प्रदर्शन ही होता है. दुर्भाग्य से सूर्यकुमार यादव के बल्ले से रन निकलने बंद हो गए हैं. 2022 से 2024 के बीच वह भारत के प्रमुख टी20 बल्लेबाज़ थे, लेकिन उसके बाद उनके खाते में कुछेक अच्छी पारियों को छोड़कर बहुत कुछ नहीं रहा.”
“यदि उनका आईपीएल सीज़न अच्छा रहा होता, तो संभव है कि चयनकर्ता उन पर भरोसा बनाए रखते और उन्हें लगातार मौके देते.”
सूर्यकुमार इस सितंबर में 36 साल के हो जाएंगे.
दिलचस्प बात यह है कि आगामी एशियाई खेलों के लिए जनवरी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने जो 30 सदस्यीय संभावित खिलाड़ियों की सूची भेजी थी उसमें भी उनका नाम शामिल नहीं था.
अगला वैश्विक टी20 टूर्नामेंट 2028 ओलंपिक होगा, जिसमें खेलने की इच्छा सूर्यकुमार पहले ही जता चुके हैं. लेकिन क्या चयनकर्ता निकट भविष्य की सिरीजों के लिए किसी युवा खिलाड़ी को कप्तानी सौंपने पर विचार करेंगे?
या फिर वे कप्तानी किसी और को देकर सूर्यकुमार को उनके अनुभव के कारण टीम में खिलाड़ी के रूप में बनाए रखेंगे?
सूर्यवंशी को मिलेगी जगह?
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15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपने पहले पूरे आईपीएल सीज़न में गेंदबाज़ी आक्रमणों की जमकर धज्जियां उड़ाईं और मैच की परिस्थितियों बहुत मैच्योरिटी से सामना किया है.
इससे उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका दिया जाने की बात कई बीसीसीआई पदाधिकारी और पूर्व क्रिकेटर कह चुके हैं.
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह कैसे मिलेगी.
मार्च में भारत के टी20 वर्ल्ड कप के खिताब के सफल बचाव के दौरान अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और ईशान किशन टॉप ऑर्डर का हिस्सा रहे थे और उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा था.
सूर्यवंशी भी ओपनर हैं और बतौर सलामी बल्लेबाज़ उन्होंने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए कई बेहतरीन और चर्चित पारियां खेली हैं.
जानकारों का कहना है कि ऐसे में चयनकर्ता एक और फॉर्मूले पर काम कर सकते हैं और वह संभावित समाधान ओपनरों के बीच रोटेशन की नीति अपना सकते हैं.
इससे सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने और खुद को साबित करने का मौका मिल सकता है.
हार्दिक पर भी सवाल
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ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के लिए आईपीएल अच्छा साबित नहीं हुआ.
मुंबई इंडियंस में वापसी करने और कप्तानी संभालने के बाद से हार्दिक न तो कप्तान के रूप में और न ही ऑलराउंडर के रूप में वो असर छोड़ पाए हैं, जिसके लिए वो जाने जाते रहे हैं.
हालांकि, आईसीसी टूर्नामेंटों में वह अब भी भारत के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं, लेकिन उनकी फिटनेस लगातार चिंता का विषय रही है.
चोटों और छोटी-मोटी शारीरिक समस्याओं के कारण उन्हें पहले भी कई बार टीम से बाहर रहना पड़ा है.
चयनकर्ताओं ने उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ घरेलू वनडे सिरीज़ के लिए टीम में शामिल किया है. इसी दौरान चयनकर्ता देखना चाहेंगे कि हार्दिक अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए फिट हैं या नहीं.
खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि ज़रूरत पड़ने पर क्या वह अपने पूरे 10 ओवर गेंदबाज़ी कर सकते हैं.
श्रेयस और पाटीदार को मिलेगा मौका?
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श्रेयस अय्यर और रजत पाटीदार पिछले दो आईपीएल सीज़नों में सबसे प्रभावशाली कप्तानों में रहे हैं.
इस सीज़न में पाटीदार उन चुनिंदा कप्तानों के क्लब में शामिल हो गए, जिन्होंने अपनी टीम को लगातार दो आईपीएल खिताब दिलाए.
वहीं, श्रेयस अय्यर ने 2025 में पंजाब किंग्स से जुड़ने के बाद शानदार कप्तानी की और टीम को 2025 में फ़ाइनल तक पहुंचाया था, हालाँकि इस बार उनकी टीम प्ले ऑफ़ के लिए क्वालिफ़ाई करने से चूक गई थी.
लेकिन मौजूदा सीज़न में भी श्रेयस ने अपने नेतृत्व, बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग से प्रभावित किया है.
इससे पहले वह दिल्ली कैपिटल के साथ सफल कप्तानी कर चुके हैं और 2024 में कोलकाता नाइटराइडर्स को खिताब भी जिता चुके हैं.
लगभग यही स्थिति पाटीदार की भी है. उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरू को आईपीएल खिताब बचाने में बल्लेबाज़ और कप्तान दोनों रूपों में अहम भूमिका निभाई.
लेकिन चूंकि श्रेयस और पाटीदार दोनों ही मध्यक्रम में लगभग एक ही स्थान के दावेदार हैं, यहां प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है.
इसलिए चयनकर्ताओं के सामने सवाल ये होगा कि किसे मौका दिया जाए और किसे नहीं.
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