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स्टेडियम में घुसे थे बंदर और कबूतर, अब ऐसे चल रही है दिल्ली में तैयारी

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Source :- BBC INDIA

10 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली, भारत में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के अंदर आगामी बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के लिए कर्मचारी बैडमिंटन कोर्ट तैयार कर रहे हैं.

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इस साल की शुरुआत में एक स्टेडियम में कबूतरों और बंदर घुस जाने के बाद भारत में एक अहम खेल प्रतियोगिता बाधित हो गई थी.

अब खेल अधिकारी देश में होने वाले एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट से बंदरों और कबूतरों को दूर रखने के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय में जुटे हैं

जनवरी में, जब भारत ने इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट की मेज़बानी की, तो आयोजकों को उम्मीद थी कि सुर्खियां तनावपूर्ण मैचों, दुनिया के कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों और राजधानी में एक बड़े टूर्नामेंट की मेज़बानी के रोमांच के बारे में होंगी.

इसके बजाय, यह आयोजन बिल्कुल अलग कारणों से चर्चा का विषय बन गया. वायु प्रदूषण की शिकायतें आईं, मैदान पर कबूतरों की बीट के कारण मैच रोक दिए गए और स्टेडियम के अंदर एक बंदर देखा गया.

अब, चूंकि दिल्ली सोमवार से बीडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेज़बानी की तैयारी कर रहा है, इसलिए आयोजक यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं कि ध्यान खेल पर ही केंद्रित रहे.

बैडमिंटन कैलेंडर के सबसे बड़े आयोजनों में से एक यह टूर्नामेंट 17 से 23 अगस्त तक इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा.

अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि स्टेडियम में लकड़ी के दरवाज़ों को ऑटोमैटिक रूप से लॉक होने वाले डबल डोर में बदल दिया गया है.

साथ ही, उन खुले स्थानों पर हाई क्वालिटी नेट लगाए गए हैं जहां से पक्षी या जानवर प्रवेश कर सकते हैं.

भारतीय बैडमिंटन संघ के महासचिव संजय मिश्रा ने कहा, “हमने एक दूसरे उपाय के तौर पर हैंडल पर एक नॉ-टॉक्सिक जेल का भी इस्तेमाल किया है जहां कबूतर बैठ सकते हैं.”

टूर्नामेंट की बेहतरी के लिए क्या-क्या किया गया?

जी20 इंडिया समिट से पहले, 30 अगस्त, 2023 को नई दिल्ली के एक पार्क में बंदरों को डराने के लिए एक भूरे लंगूर का आदमकद कटआउट प्रदर्शित किया गया.

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उन्होंने कहा कि छत में मौजूद दरारों और एग्ज़ास्ट वेंट सहित अन्य एंट्री प्वाइंट्स को भी सील कर दिया गया है या उनकी मरम्मत कर दी गई है.

स्टेडियम के लुक और माहौल को बेहतर बनाने के लिए इसमें भी बदलाव किया गया है.

इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम का निर्माण 1982 के एशियाई खेलों के लिए किया गया था और बाद में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इसका रिनोवेशन किया गया था.

भारतीय खेल प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक अंबर प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “स्टेडियम के तीन प्रमुख मैदानों में स्ट्रक्चरल अपग्रेडेशन का काम किया गया है.”

उन्होंने कहा कि इंडिया ओपन के दौरान खिलाड़ियों की कोर्ट पर पड़ने वाली परछाई की शिकायत के बाद लाइट सिस्टम को भी ठीक कर दिया गया है.

लेकिन टूर्नामेंट से पहले सबसे ज़्यादा ध्यान बंदरों को आयोजन स्थल से दूर रखने की कोशिशों पर गया.

इस सप्ताह की शुरुआत में भारत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति लंगूर की आवाज़ की नक़ल करता हुआ दिखाई दे रहा है .लंगूर दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में पाए जाने वाले बड़े, लंबी पूंछ वाले बंदर होते हैं.

शहर में आम तौर पर पाए जाने वाले छोटे रीसस मकाक्स बंदरों को डराने के लिए परंपरागत रूप से लंगूर की आवाज़ का इस्तेमाल किया जाता रहा है.

कई भारतीय और इंटरनेशनल न्यूज़ आउटलेट्स ने बताया कि लंगूरों की नक़ल करने वाले पुरुषों को अन्य बंदरों को दूर रखने के लिए काम पर रखा गया था.

यहां तक कि दो बार की बैडमिंटन ओलंपिक मेडल विजेता पीवी सिंधु ने भी एक्स पर लिखा, “हमारे समाधान भले ही ख़ास तौर पर भारतीय हों, लेकिन हमारी गर्मजोशी, हमारी भावना और हमारा आतिथ्य भी उतना ही ख़ास है.”

लेकिन वरिष्ठ अधिकारी मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि एसोसिएशन ने चैंपियनशिप के लिए किए गए उपायों के तहत विशेष रूप से किसी को भी नियुक्त नहीं किया था.

उन्होंने कहा कि चूंकि स्टेडियम एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, इसलिए लंगूर की आवाज़ की नक़ल करने वाला एक व्यक्ति कुछ समय के लिए नॉर्थ ब्लॉक में मौजूद था.

भारत में, ख़ासकर दिल्ली में, रीसस मकाक्स बंदरों को डराने के लिए लंगूरों को तैनात करना कोई नई बात नहीं है.

2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान, प्राधिकरण कुछ स्थानों पर छोटे रीसस मकाक्स बंदरों को डराने के लिए काले चेहरे वाले लंगूर लाए थे.

2023 में, जब भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की, तो अधिकारियों ने बंदरों को डराने के लिए राजधानी भर में लंगूरों के आदमकद पुतले लगाए.

राउंड ऑफ़ 32 के मैचों के दौरान खिलाड़ियों की खेल शैली का सामान्य दृश्य

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भारत के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न

लेकिन जनवरी में हुए खेलों में बंदरों की समस्या मात्र एक समस्या नहीं थी.

टूर्नामेंट के दौरान, सिंगापुर के लोह कीन यू और भारत के एचएस प्रणॉय के बीच पुरुषों के सिंगल मैच को दो बार तब रोकना पड़ा जब कोर्ट पर कबूतर की बीट गिर गई.

फिर वहां की एयर क्वालिटी भी ख़राब थी.

अक्तूबर से जनवरी के बीच उत्तरी भारत, ख़ासकर राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर तक पहुंच जाता है. इस साल भी ऐसा ही हुआ और खिलाड़ियों ने इसकी शिकायत की.

सिंगापुर के लोह ने कहा कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ हो रही थी और उन्होंने अपने होटल के कमरे के बाहर मास्क पहना हुआ था, जबकि डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ड ने हालात को ‘अनहेल्दी’ बताया.

भारत के लिए ये घटनाएं बेहद शर्मनाक थीं, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के एक प्रमुख मेज़बान के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.

देश 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी करने वाला है और उसने 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए भी बोली लगाई है.

भारत के लिए वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियन यह दिखाने का एक मौका है कि वह एक प्रमुख वर्ल्ड स्पोर्ट्स टूर्नामेंट की मेज़बानी कर सकता है. प्रतियोगिता पर ध्यान केंद्रित रख सकता है.

इस वर्ष के टूर्नामेंट में मौजूदा पुरुष और महिला वर्ल्ड चैंपियन, चीन के शी युकी और जापान की अकाने यामागुची हिस्सा लेंगी.

भारत को घरेलू मैदान पर मज़बूत प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जिसमें महिला सिंगल मैच में सिंधु भारत की ओर से चुनौती का नेतृत्व करेंगी.

इसलिए आयोजकों के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है. वे चाहेंगे कि अगले सप्ताह दिल्ली से आने वाली सबसे बड़ी ख़बरें वन्यजीवों के बजाय खिलाड़ियों, मैचों और बैडमिंटन के बारे में हों.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS