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कैप्टन स्मित मच्छार समेत इन पांच जांबाजों ने टाला फ्लाईदुबई हादसा, बच गईं हजारों जानें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

फ्लाई दुबई की फ्लाइट को हाईजैक होने और क्रैश होने से पांच जांबाज लोगों ने बचा लिया है। फिलहाल कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज किया जा रहा है। बाकी के चार लोग थोड़ी बहुत चोटों के साथ अपने घरों को लौट चुके हैं। इजरायल सरकार द्वारा कहा गया है कि वह इस घटना की जांच कर रही है।

30 सितंबर 2026 को ऐसे दिन के रूप में याद किया जाएगा, जिसमें पांच जांबाज लोगों ने शायद दुनिया के एक बड़े युद्ध की तरफ जाने से रोक दिया। दुबई से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट को को-पायलट ने हाईजैक करने की कोशिश की, लेकिन पायलट की सूझबूझ और यात्रियों की हिम्मत ने इस हादसे को टाल दिया। भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार फिलहाल घायल हैं। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन जरा सोचिए अगर यह हादसा हो जाता और ओमानी मूल का को-पायलट फ्लाइट को हाईजैक करके 9/11 जैसा हमला करने में सफल होता, तो कितने लोग मारे जाते। ऑन बोर्ड करीब 180 लोगों की जान तो जाती ही, साथ ही जहां यह क्रैश होता वहां पर भी कई लोग मारे जा सकते थे। इसके बाद घटनाओं का एक ऐसा क्रम शुरू हो जाता, जिसमें इजरायल पूरे पश्चिम एशिया को दहला देता, इसमें हजारों लोगों की जान दांव पर लग जाती।

भारत क्या दुनिया के ‘हीरो’ कैप्टन स्मित मच्छार और उनके साथ मौजूद यात्रियों ने इस पूरे हादसे को टाल कर संभवतः अपनी और हजारों लोगों की जान बचा ली है।

आइए जानते हैं उन पांच जांबाज लोगों के बारे में जिन्होंने इस दुनिया को एक बड़े युद्ध की तरफ जाने से बचा लिया।

1. कैप्टन स्मित मच्छार– को-पायलट के हमलों का सामना किया, घायल होने के बाद भी कॉकपिट खोला

एक पायलट के लिए उसका कॉकपिट सबसे सुरक्षित माना जाता है। विमानन नियमों के मुताबिक इसे पायलट अंदर से लॉक कर सकते हैं। ऐसे में इसे बाहर से बिना पासवर्ड के खोलना असंभव है। अब कल्पना कीजिए कैप्टन स्मित के बारे में कि उन्हें अपने ही साथी ने हमला करके गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। इसके बाद भी वह दरवाजा खोलने और यात्रियों को अंदर आने के लिए रास्ता बना सके। वह भी ऐसे समय में जब फ्लाइट 5 मिनट में 17,000 फीट नीचे जा चुकी थी।

कैप्टन स्मित की एक सूझबूझ भरे कदम ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। इसके बाद बाकी यात्री अंदर आए और उन्होंने को-पायलट को काबू में किया।

2. इजरायली प्लंबर यानीव हायुन और बैंकर ज्विका मानेस– को पायलट को काबू किया, प्लेन को संभाला

कैप्टन स्मित ने जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा खोला। उसके पहले ही लड़ाई की आवाजें बाहर जा रही थी। विमान लगातार नीचे की तरफ भाग रहा था। ऐसे में यात्री दरवाजे पर आए। इसमें यानीव हायुन, डेंटिस्ट श्रोता मुसाएव और इंश्योरेंस एजेंसी के मालिक असाफ राजुआन और बैंकर ज्विका मानेस शामिल थे। इन पांचों ने कॉकपिट के अंदर दाखिल होकर हालात को काबू में कर लिया।

इंडिया टुडे की मुताबिक यानीव और मानेस ने को-पायलट को हेडोन के केबल का इस्तेमाल करके काबू में किया। वह लगातार कंट्रोल पैनल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था, जिससे फ्लाइट को संभालना असंभव हो जाए। हालांकि, इन चारों लोगों ने मिलकर उसे काबू में कर लिया।

हायुन ने इजरायली पीएम नेतन्याहू से मिलकर अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उसे प्लेन उड़ाने का जरा भी अनुभव नहीं है। लेकिन जब उसने अपने सामने यह पूरा नजारा देखा, तो उसने विमानन शो को याद किया। उसे याद था कि प्लेन को नीचे जाने से रोकने के लिए स्टीयरिंग लीवर को ऊपर की तरफ खींचना होगा। इसके बाद उसने ऐसा ही किया और मामले को संभाल लिया। हायुन ने कहा, “जब मैंने ऐसा किया तो प्लेन सीधा होने लगा” इसके बाद पहले से ही विमान में मौजूद दो ऑफ ड्यूटी पायलटों ने लीवर की कमान संभाली और प्लेन को सऊदी अरब में सफलता पूर्वक लैंड करवाया।

डेंटिस्ट मुसाएव ने बचाई भारतीय पायलट की जान

मानेस और यानीव जिस समय को-पायलट को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे। उसी वक्त डॉक्टर मुसाएव कैप्टन स्मित की जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। इंडिया टुडे से बात करते हुए मुसाएव ने बताया,”वह (स्मित) जमीन पर पड़ा था। होश में था। लेकिन उसका खून काफी बह चुका था। उसके हाथों और गर्दन पर काफी गहरे घाव थे। मेरा काम खून बहने से रोकना था।

असाफ राजुआन– को-पायलट को काबू में करने में मदद की, उसे बंधक बनाकर रखा

बैंकर असाफ राजुआन के मुताबिक यह किसी भयानक कहानी की तरह था। उन्होंने Ynet को बताया, “हम किसी तरह हमलावर को 50 मिनट तक काबू में रखने में कामयाब रहे। उसे कंट्रोल करने में काफी ताकत लगी। हालांकि, इसके बाद भी हम सऊदी अरब में लैंड करवाने में कामयाब हुए।”

इस पूरे हादसे को बचाने में सभी जांबाज लोगों ने पूरी हिम्मत का सामना किया। कैप्टन स्मित ने घायल होने के बाद भी दरवाजा खोला। इसके बाद बाकी लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए को-पायलट को काबू में किया। ऑफ ड्यूटी पायलटों ने विमान की लैंडिंग करवाई। यह एक जज्बा था, जो इंसान को जिंदा रहने के लिए चाहिए होता है। लेकिन इतना साफ है कि इन लोगों ने एक ऐसे घटनाक्रम को होने से रोक लिया, जिसके बाद एक ऐसा क्रम शुरू हो जाता, जिसमें हजारों लोगों की जान जा सकती थी। क्योंकि 7 अक्तूबर के हमले का बदला इजरायल हजारों लोगों की जान लेकर ले रहा है। दूसरी तरफ अगर यह हमला हो जाता, तो दुनिया इजरायल का वह कहर देखती, जो शायद आज तक देखा नहीं गया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN