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पब्लिक प्लेस पर बच्चा करता है नखरे? महिलाओं की इन आदतों से मिलेगी राहत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बच्चे अक्सर पब्लिक प्लेसिस पर जाते ही अपनी बात पुरी करवाने के लिए जिद्द करते हैं। कई बार तो उनके नखरे ऐसे होते हैं कि वह सड़क पर लेटकर ही रोने लगते हैं। ऐसे में यहां हम कुछ आदतें बता रहे हैं जो बच्चों के इस रवैया से निपटने में आपकी मदद कर सकती हैं।

अक्सर बच्चे अपनी बात मनवाने के लिए तरह-तरह के तरीकों को अपनाते हैं लेकिन जब पब्लिक प्लेसिस पर बच्चों को अपनी बात मनवानी होती है तो वह अक्सर तेज रोने लगते हैं। पब्लिक प्लेस पर बच्चों का किसी चीज को लेकर रोना और हाथ-पैर पटकना अक्सर पेरेंट्स के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। वहीं माता-पिता को ये भी समझ नहीं आता कि आखिर वह अपने बच्चे को कैसे समझाएं ताकी वह चुप हो जाए। ऐसे में इंस्टाग्राम पर पैरेंटिंग कोच अलीशा ने 9 ऐसी आदतों के बारे में बताया है जो हर पेरेंट्स को बच्चों के बाहर जाने पर अपनानी चाहिए।

1) घर से कभी भी भूखे न निकलें

अगर बच्चे भूखे हों, तो एक छोटी सी निराशा भी उन्हें बहुत बड़ी लग सकती है और वे रोने-चिल्लाने लग सकते हैं। इसलिए घर से निकलने से पहले उन्हें कुछ खाने के लिए दें।

2) पहुंचने से पहले तैयारी करवा लें

किसी बर्थडे पार्टी में जा रहे हैं तो रास्ते में कार में ही इस बारे में बात कर लें। इसकी शुरुआत में कहेंं कि -आज हम सबको हैलो कहेंगे, मुस्कुराएंगे, बर्थडे वाले बच्चे को विश करेंगे, और फिर तुम खेल सकते हो। ऐसा करके आप बच्चे के दिमाग को पहले से तैयार कर देंगे।

3) उन्हें पूरा प्लान बता दें

बच्चे के साथ घूमने जाने के लिए ये सबसे जरूरी आदत है। इसमें बच्चे को समझाएं कि ‘पहले हम शॉपिंग करेंगे, फिर तुम अपनी पसंद की एक चीज चुन सकते हो, फिर हम कुछ खाएंगे, और उसके बाद हम घर चले जाएंगे।’ आगे क्या होने वाला है, यह पता होने से बच्चों के लिए एक काम से दूसरे काम पर जाना आसान हो जाता है।

4) बच्चे के लेवल पर आ जाएं

जब बच्चे नखरे दिखाए तो उनके पास जाएं, झुककर उनकी आंखों के सामने आएं और शांति से बात करें। अगर आप दूर से चिल्लाकर बोलेंगे, तो शायद वे आपकी बात न सुनें, लेकिन पास आकर शांति से बोलने पर उनके सुनने के चांस ज्यादा होता है।

5) जब बच्चा रो-चिल्ला रहा हो, तब उसे कुछ न सिखाएं

जब बच्चा चिल्ला रहा हो, तो वह कुछ भी सीखने के लिए तैयार नहीं होता। इसलिए पहले उसे शांत होने में मदद करें। क्या हुआ, इस बारे में बाद में बात करें।

6) कहीं से निकलने से पहले उन्हें पहले ही बता दें।

बच्चे को ये कहना कि ‘बस 5 मिनट और, फिर हम यहां से निकलेंगे। ऐसा करने के बाद अपनी बात पर कायम रहें। इससे उन्हें मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिल जाता है।

7) उन्हें कोई छोटा सा काम दे दें।

शॉपिंग गए हैं तो उन्हें कुछ छोटे काम देदें। जैसे बैग में सेब भरने को कहें। कोई काम होने से इंतजार करना और बाहर रहना आसान हो जाता है।

8) ऐसी बातें न कहें जिन्हें आप असल में नहीं करने वाले हैं।

अक्सर बच्चे जब नखरे दिखाकर रोते हैं तो पेरेंट्स उन्हें कहते हैं कि ‘मेरी बात सुनो, वरना मैं तुम्हें यहीं छोड़ दूंगी।’ अगर आप कहते हैं कि आप उन्हें छोड़ देंगे, लेकिन असल में ऐसा नहीं करते, तो बच्चा समझ जाता है कि आपकी बातों का कोई खास मतलब नहीं है।

9) बोर होने की आदत डालें।

हर शांत पल में स्क्रीन यानी मोबाइल या टीवी की जरूरत नहीं होती। उन्हें इंतजार करने दें, आस-पास देखने दें, बातें करने दें, कल्पना करने दें और खुद सोचने दें कि उन्हें क्या करना है। सफर कर रहे हैं? तो अपने साथ कुछ आसान चीजें रखें, जैसे रंग, एक्टिविटी बुक, पजल्स, स्नैक बॉक्स, कहानी की किताबें वगैराह।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN