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पहलगाम हमले के वक्त इंडोनेशिया ने की थी भारत की कैसी मदद? PM मोदी ने वाकया सुना की जिसकी तारीफ

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Source :- LIVE HINDUSTAN

PM मोदी इन दिनों तीन देशों के दौरे पर हैं। अपनी यात्रा के पहले चरण में वह इंडोनेशिया पहुंचे हैं, जहां उन्हें भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने आज (मंगलवार, 7 जुलाई को) इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पिछले साल हुए पहलगाम हमले के बाद भारत का साथ और मदद देने के लिए इंडोनेशिया का शुक्रिया अदा किया और कहा कि संकट के समय में इंडोनेशिया भारत के साथ खड़ा रहा। पीएम ने यह भी कहा कि आतंकवाद जैसे मुद्दे पर हम दोनों देश हमेशा साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी इंडोनेशिया ने भारत का साथ दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछले साल जब पहलगाम में एक भयानक आतंकी हमला हुआ था, तो इंडोनेशिया मजबूती से भारत के साथ खड़ा रहा। इस समर्थन के लिए मैं राष्ट्रपति प्राबोवो और आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं। हमारे दोनों देश आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से मिलकर काम कर रहे हैं। हम खुफिया जानकारी साझा करने, साइबर खतरों, आतंकी फंडिंग और कट्टरपंथ को खत्म करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर दुनिया में शांतिपूर्ण ताकतों को मजबूत कर सकते हैं।”

इंडोनेशिया ने की थी भारत की कैसी मदद?

दरअसल, इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है, जिसकी 87 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। बावजूद इसके इंडोनेशिया ने पहलगाम हमले के वक्त पाकिस्तान का साथ नहीं देकर भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। वहां के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी और कहा था कि हमारे यहां का इस्लाम तो ऐसी तालीम नहीं देता। उन्होंने कहा था, “कश्मीर में जो आतंकी हमला हुआ है, वह इंडोनेशिया में माने जाने वाले इस्लाम के अनुरूप नहीं है।” उन्होंने इस कायरपूर्ण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान को तब आड़े हाथों लिया था और दो टूक कहा था कि आतंकवाद से कोई नतीजा नहीं निकलता।

पीएम मोदी ने आगे क्या कहा?

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रवैये को लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती चिंताओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद में कहा कि भारत विकास का रास्ता अपनाता है, विस्तारवाद का नहीं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वरिष्ठ मंत्रियों सहित सांसदों को संबोधित करते हुए मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि जब भारत के 140 करोड़ लोग और इंडोनेशिया के 29 करोड़ नागरिक मिलकर साझा समृद्धि के लिए आगे बढ़ेंगे तो दुनिया इतिहास बनते हुए देखेगी।

भारत एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत का पुरजोर समर्थक

प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत का पुरजोर समर्थक है। भारत हिंद-प्रशांत में नौवहन की स्वतंत्रता में विश्वास करता है।” उन्होंने कहा, ”भारत एक ऐसा देश है जो विकास के रास्ते पर चलता है, विस्तारवाद के नहीं।” यह बात उन्होंने दक्षिण चीन सागर और उसके बाहर चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के प्रदर्शन को लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में कही। अपने संबोधन में, मोदी ने 1950 के दशक से भारत-इंडोनेशिया संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बात की, जिसमें यह भी शामिल था कि कैसे दोनों देशों ने 1955 के प्रसिद्ध बांडुंग सम्मेलन में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में दोनों पक्षों के लिए ‘असीमित अवसर’ मौजूद हैं।

1955 में बांडुंग सम्मेलन

इंडोनेशिया द्वारा आयोजित 1955 के बांडुंग सम्मेलन में विश्व शांति को बढ़ावा देने और नव-स्वतंत्र देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए 29 एशियाई और अफ्रीकी देशों के नेता एक साथ आए थे। इसे व्यापक रूप से शीत युद्ध के दौरान गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखने वाला माना जाता है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ”भारत और इंडोनेशिया के लिए, समुद्र कभी भी दूरी पैदा करने वाला नहीं रहा है। यह हमेशा हमारे देशों के बीच एक सेतु रहा है और हमारे साझा भविष्य के केंद्र में बना हुआ है।”

नए अवसर पैदा होने चाहिए

प्रधानमंत्री ने कहा, ”जब भारत और इंडोनेशिया एक साथ खड़े होते हैं, तो वे दुनिया के इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि लोकतंत्र अवसर पैदा करता है, लोकतंत्र विश्वास बनाता है और लोकतंत्र भविष्य को आकार देता है।” मोदी ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और हिंद महासागर ऐसे नाम हैं जो दोनों देशों को जोड़ने वाले गहरे संबंधों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ”भारत और इंडोनेशिया के बीच जो सद्भावना और विश्वास है, उससे हमारे नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने संयुक्त कार्य समूह के मौजूदा ढांचे के तहत दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी सहयोग के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया साइबर खतरों, आतंकवाद के वित्तपोषण और कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाकर शांति-पसंद ताकतों को मजबूत कर सकते हैं। मौजूदा भूराजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार में अब और देरी नहीं की जा सकती। मोदी सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला चरण था – जिसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी शामिल हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN