Source :- LIVE HINDUSTAN
निर्माण को लेकर जापानी मीडिया में आई खबरों के बाद पाकिस्तानी दूतावास ने सोमवार को एक्स पर एक बयान जारी कर जापान में रहने वाले अपने नागरिकों को स्थानीय नियमों का पालन करने की हिदायत दी।
जापान के साइतामा प्रांत के कावागोए शहर में बिना कानूनी मंजूरी के एक मस्जिद का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद जापान में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने खुद को इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह अलग कर लिया है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण स्थानीय कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरी लिए बिना किया गया है। इस बात की भी संभावना है इस अवैध निर्माण को हटाया जा सकता है
जापानी अखबार ‘द असाही शिम्बुन’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह मस्जिद लगभग 4,500 वर्ग मीटर के एक ऐसे भूखंड पर बनी है, जो पहाड़ी वन भूमि के रूप में वर्गीकृत है। यह क्षेत्र एक शहरीकरण नियंत्रण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां स्थानीय अधिकारियों की विशेष अनुमति के बिना किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है।
कावागोए शहर के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद के निर्माण के लिए कोई आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। नगर पालिका सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “इस मस्जिद का निर्माण एक शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में किया गया है, जहां सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत विशेष अनुमति सुरक्षित किए बिना निर्माण आम तौर पर प्रतिबंधित है। संबंधित इमारत का निर्माण शहर की अनुमति के बिना किया गया है।”
संपत्ति के रिकॉर्ड से पता चलता है कि इस जमीन का मालिकाना हक मार्च 2025 में फुजिमी स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी से बदलकर कावागोए के पते पर रजिस्टर्ड एक फर्म के पास गया था।
राजदूत की मौजूदगी से बढ़ा विवाद
यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इस साल की शुरुआत में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद ने खुद इस मस्जिद के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया था। इस विवाद पर याशियो मस्जिद का प्रतिनिधित्व करने वाले 62 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक शकील शेख मोहम्मद ने कावागोए प्रोजेक्ट की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “अगर वे बिना अनुमति के मस्जिद बना रहे हैं तो यह अच्छी बात नहीं है। स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाकर ही किसी मस्जिद के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा सकता है।”
पाकिस्तानी दूतावास की सफाई
निर्माण को लेकर जापानी मीडिया में आई खबरों के बाद पाकिस्तानी दूतावास ने सोमवार को एक्स पर एक बयान जारी कर जापान में रहने वाले अपने नागरिकों को स्थानीय नियमों का पालन करने की हिदायत दी। दूतावास ने कहा, “जापान में रह रहे पाकिस्तानी समुदाय से विशेष रूप से अनुरोध है कि वे नमाज स्थलों के निर्माण के संबंध में जापानी कानूनों का पूरी तरह पालन करें। स्थानीय सरकार से आवश्यक परमिट प्राप्त किए बिना कोई भी निर्माण कार्य शुरू न किया जाए।”
31 मई को जारी एक अलग बयान में दूतावास ने स्पष्ट किया कि राजदूत ने उद्घाटन समारोह का निमंत्रण केवल इसलिए स्वीकार किया था क्योंकि आयोजकों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि सभी आवश्यक स्वीकृतियां ले ली गई हैं। दूतावास ने कहा, “पाकिस्तानी दूतावास का ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट से कोई संबंध नहीं है जो स्थानीय सरकारों के कानूनों का उल्लंघन करते हैं। इसमें 3 अप्रैल 2026 को कावागोए में आयोजित कार्यक्रम भी शामिल है।”
पाकिस्तानी दूतावास ने अंत में अपने समुदाय के सदस्यों से अपील की है कि वे इस मामले में जापानी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें और किसी भी प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति के बारे में स्थानीय निवासियों को भी पारदर्शी तरीके से सूचित रखें।
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