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भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर जमकर सुना दिया है। कश्मीर पर पाकिस्तान की बकवास पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। खबर पढ़िए और जानिए पूरा मामला…

भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर करारा जवाब दिया है। यह जवाब पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त वक्तव्य में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर की गई टिप्पणी पर दिया गया है। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे इसे गैर-जरूरी कर दिया। साथ ही सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस संबंध में पूछे गये सवाल का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहाकि केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं । यह भारत का आंतरिक मामला है और जिसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है उसे इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए।

क्या है पूरा मामला
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के बीच सोमवार को इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद संयुक्त वक्तव्य जारी किया। इस वक्तव्य में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के बारे में भी उल्लेख किया गया है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान जम्मू कश्मीर के मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए समय-समय कश्मीर का राग अलापता रहा है। इससे पहले हाल ही में पाकिस्तान और चीन के संयुक्त बयान में भी पाकिस्तान ने यह मुद्दा उठाया था। भारत ने उस समय भी दोनों देशों को कड़ी फटकार लगाई थी। इस मामले में भारत शुरू से ही अपने रुख पर कायम रहा है और उसने अपने आंतरिक तथा संप्रभु मामलों में किसी तीसरे देश या संगठन की भूमिका को कभी मान्यता नहीं दी है।

नेपाल को भी खरी-खरी
इससे पहले भारत ने नेपाल को भी खरी-खरी सुनाई है। भारत नेपाल के साथ सीमा विवाद के समाधान में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया। भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने विवाद के समाधान के लिए चीन और ब्रिटेन की भागीदारी की वकालत की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं और भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा चिह्नित किया जा चुका है।

गौरतलब है कि नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। भारत लगातार यह दावा करता रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं। जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहाकि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों के समाधान के लिए भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच के द्विपक्षीय मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

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