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जानकारों का मानना है कि आसिम मुनीर, बलूचिस्तान से लेकर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) तक बढ़ती चुनौतियों के बीच, नकवी जैसे अपने करीबी को बड़ी राजनीतिक भूमिका के लिए समर्थन देकर अपना असर और बढ़ा सकते हैं।
पड़ोसी देश पाकिस्तान से बड़ी खबर आ रही है। वहां शहबाज शरीफ सरकार के तख्तापलट की अकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच राजधानी इस्लामाबाद को कंटेनरों से सील कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस तख्तापलट की डोर सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के हाथ में है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कुर्सी डगमगा रही है क्योंकि उनके अपने ही गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि रावलपिंडी में इस तख्तापलट का ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है।
दरअसल, पाकिस्तान की शासन व्यवस्था के “ध्वस्त” होने का चौंकाने वाला बयान देने के कुछ ही दिनों बाद, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने अब एक और बड़ा खुलासा किया है। पाकिस्तान के इतिहास के “सबसे बड़े घोटाले” का पता लगाने का दावा करते हुए, नक़वी ने कहा कि इसमें जजों से लेकर राजनेताओं तक, सरकारी तंत्र के कई अहम हिस्से शामिल हैं। हालाँकि नक़वी ने उन लोगों के नाम उजागर नहीं किए, लेकिन उनके लगातार सनसनीखेज़ बयानों ने इस अटकल को तेज़ कर दिया है कि क्या पाकिस्तान की सत्ता की बागडोर बदलने वाली है।
नक़वी का ‘स्कैम बम’ और सिस्टम पर सीधा हमला
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नक़वी ने ज़ोर देकर कहा कि इस घोटाले के ज़िम्मेदार “हर व्यक्ति” के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। नक़वी ने पत्रकारों से कहा, “मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के इतिहास में कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर सभी शामिल हों।” नक़वी ने आरोप लगाया है कि पिछले 21 सालों से देश के जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर रिश्वतखोरी के खेल में शामिल थे। नक़वी ने खुलेआम एलान कर दिया है कि पाकिस्तान का गवर्नेंस सिस्टम पूरी तरह “कोलैप्स” हो चुका है, जो कि शहबाज़ सरकार की कार्यक्षमता पर एक ज़ोरदार तमाचा है।
रावलपिंडी का ‘मोहरा’ और नवाज़ शरीफ की उड़ी नींद
विलेषकों का मानना है कि नक़वी महज एक मंत्री नहीं, बल्कि असीम मुनीर का वह मोहरा हैं जिन्हें भविष्य के बड़े राजनीतिक रोल के लिए तैयार किया जा रहा है। यह भी अटकलें हैं कि नक़वी को असीम मुनीर के लिए वैसी ही ज़मीन तैयार करने का काम सौंपा गया है, जैसी कभी परवेज मुशर्रफ के दौर में हुआ था। यानी आसिम मुनीर को राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के रूप में सर्वशक्तिमान बनाना। इस हलचल ने लंदन से लेकर लाहौर तक नवाज़ शरीफ की नींद उड़ा दी है।
शहबाज़ के खेमे में हाहाकार:
इस अंदरूनी कलह पर शहबाज़ सरकार के वफादार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तीखा पलटवार किया है। आसिफ ने नक़वी को ‘पावरहाउस’ बताते हुए तंज कसा कि वह खुद को प्रधानमंत्री के प्रति भी जवाबदेह नहीं समझते और कैबिनेट बैठकों से नदारद रहते हैं। आसिफ ने यहाँ तक कह दिया, “अगर इतनी ताकत रखने वाला शख्स भी शिकायत कर रहा है, तो बाकी कैबिनेट सदस्यों को घर चले जाना चाहिए।”
क्या पाकिस्तान में फिर शुरू होगा डिक्टेटर राज?
पाकिस्तान की सत्ता संरचना के शीर्ष पर यह दरार अब छिपने वाली नहीं है। असीम मुनीर वर्तमान में पाकिस्तान की विदेश नीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक पर अनियंत्रित शक्ति का आनंद ले रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नक़वी के जरिए मुनीर ने शहबाज़ शरीफ को साफ संदेश दे दिया है कि असली बॉस कौन है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में भू-राजनीतिक और रक्षा विश्लेषक संदीप उन्नीथन के हवाले से कहा गया है कि नक़वी, जिन्होंने मीडिया बैरन से पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में से एक बनने तक का तेज़ी से सफ़र तय किया है, लंबे समय से प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। उन्हें हमेशा आसिम मुनीर का समर्थन प्राप्त रहा है और माना जाता है कि वे सेना प्रमुख के करीबी रिश्तेदार हैं। इसलिए मुनीर उनके हाथों ये खेल करवा सकते हैं। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इसी करीबी रिश्ते के कारण मुनीर ने संघर्ष के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए नक़वी को अपना विशेष प्रतिनिधि चुना था।
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