Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका-ईरान युद्ध अब महज एक सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह ईरान की आम जनता के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट बन चुका है। नतीजा यह है कि देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और नकदी की भारी कमी ने लाखों परिवारों को बेहद मजबूर हालात में धकेल दिया है।
अमेरिका संग जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस अनिश्चितता ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोर दिया है। नकदी की भारी कमी और आसमान छूती महंगाई के कारण आम ईरानी लोग अब गुजारा करने के लिए बेहद असामान्य और हैरान करने वाले कदम उठा रहे हैं। लोग अपने असली बालों से लेकर लैपटॉप, इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें और सेकंड-हैंड कपड़े तक बेचने या किराए पर देने को मजबूर हो गए हैं। ईरानी न्यूज एजेंसी आईएलएनए की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में परिवार आर्थिक संकट से निपटने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। वे अपने निजी सामान को बेचने या अस्थायी रूप से किराए पर देने का रास्ता अपना रहे हैं।
आईएलएनए की रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान में एक नई तरह की ‘सर्वाइवल इकॉनमी’ यानी अस्तित्व अर्थव्यवस्था तेजी से फल-फूल रही है। परिवार अब उन वस्तुओं को भी नकदी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में बेकार या कम मूल्य वाली माना जाता था। असली बाल बेचे जा रहे हैं, इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर सूचीबद्ध की जा रही हैं, जबकि सेकंड-हैंड कपड़े, काम के जूते और अन्य घरेलू सामान खरीदारों की तलाश में हैं।
किराए पर दे रहे लैपटॉप
रिपोर्ट के मुताबिक, कई विक्रेता खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कई कम कीमत वाली वस्तुओं को एक साथ बंडल करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें थोड़ी-बहुत नकदी जुटाने में मदद मिल रही है। लैपटॉप का किराया भी अब आम बात हो गई है। ऑफिस के काम, ऑनलाइन कक्षाओं या अन्य अल्पकालिक जरूरतों के लिए लोग लैपटॉप किराए पर ले रहे हैं। इसके अलावा घर के अन्य सामान, जिनकी वास्तविक जरूरत पूरी होने के बाद रीसेल वैल्यू बहुत कम रह जाता है, वे भी अब बाजार में उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि लोग अपनी परफ्यूम की बोतलों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले छोटे-मोटे सामान तक बेचने को तैयार हैं।
महंगाई की मार से कराह रहा ईरान
रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान का आर्थिक दबाव अब आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। आईएलएनए ने देश के सांख्यिकीय केंद्र का हवाला देते हुए बताया कि जुलाई के अंत में समाप्त हुए ईरानी महीने में सालाना मुद्रास्फीति दर 66 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि साल-दर-साल महंगाई 87.9 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि और घटती क्रय शक्ति ने परिवारों को मजबूर कर दिया है कि वे अपने रोजाना के खर्चों पर फिर से विचार करें। जरूरी खाद्य पदार्थ खरीदने से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं का खर्च उठाने तक, हर चीज अब चुनौती बन गई है। कई परिवार खर्च कम कर रहे हैं, गैर-जरूरी खरीदारी को टाल रहे हैं और घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी तनाव
इस आर्थिक संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने की चल रही कोशिशों को ईरान का ‘आखिरी मौका’ करार दिया है। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है कि वाशिंगटन के साथ कोई सीधी बातचीत चल रही है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जल्द समाप्त नहीं होता और आर्थिक राहत के ठोस उपाय नहीं किए जाते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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