Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- EPFO पेंशनर की मृत्यु के बाद पात्र परिवार के सदस्यों को EPS के तहत फैमिली पेंशन मिल सकती है
- पति या पत्नी को आम तौर पर मृत पेंशनर की पेंशन का 50% और पात्र बच्चों को 25% तक पेंशन मिल सकती है
- अधिकतम दो बच्चों को 25 साल की उम्र तक लाभ मिल सकता है, जबकि दिव्यांग के लिए नियम अलग है
EPFO पेंशन लेने वाले किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिवार की पेंशन पूरी तरह खत्म नहीं होती है। EPS (Employees’ Pension Scheme) में पात्र परिवार के सदस्यों के लिए फैमिली पेंशन (Family Pension) का प्रावधान है। इसके तहत पति या पत्नी को आम तौर पर मृत पेंशनर की पेंशन का 50% मिल सकता है, जबकि पात्र बच्चों को 25% पेंशन दी जा सकती है। हालांकि, यह रकम अपने आप परिवार के खाते में ट्रांसफर नहीं होती। इसके लिए EPFO के पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्लेम करना जरूरी है।
पति या पत्नी को कैसे मिलेगी फैमिली पेंशन?
पेंशनर की मृत्यु के बाद पत्नी या पति को अपने आप पेंशन मिलनी शुरू नहीं होती। परिवार को संबंधित EPFO रीजनल ऑफिस को मृत्यु की जानकारी देनी होती है, ताकि रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके। इसके बाद विधवा या विधुर को निर्धारित फैमिली पेंशन एप्लीकेशन जमा करनी होती है। कम्पलायंस एडवाइजरी प्रैक्टिसेस के हेड मुनाब अली मुनाब अली बेइक के मुताबिक, पति या पत्नी को मिलने वाली पेंशन आम तौर पर मृत पेंशनर की मासिक पेंशन की 50% होती है। स्कीम के नियमों के तहत न्यूनतम फैमिली पेंशन ₹1,000 प्रति माह है। उदाहरण के लिए, अगर पेंशनर को ₹10,000 महीने की पेंशन मिल रही थी, तो पात्र पति या पत्नी को 50% के हिसाब से ₹5,000 मासिक पेंशन मिल सकती है।
बच्चों को कितनी पेंशन मिलेगी?
EPS के तहत पेंशनर की मृत्यु के बाद पात्र बच्चों को भी फैमिली पेंशन मिल सकती है। एक समय में अधिकतम 2 बच्चों को यह लाभ दिया जाता है और सामान्य तौर पर यह सुविधा 25 साल की उम्र तक मिलती है। प्रत्येक पात्र बच्चे को पेंशनर की पेंशन की 25% राशि मिल सकती है, जो न्यूनतम ₹250 प्रति माह के अधीन है। बच्चों की पेंशन विधवा या विधुर की पेंशन के अलावा मिल सकती है। अगर दो से ज्यादा बच्चे पात्र हैं, तो नियमों के अनुसार आम तौर पर बड़े बच्चे से क्रम शुरू किया जाता है। कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे भी निर्धारित EPS नियमों के तहत इस लाभ के पात्र हो सकते हैं।
दिव्यांग बच्चे के लिए अलग नियम
अगर बच्चे को मानसिक या शारीरिक दिव्यांगता है, तो सामान्य 25 साल की उम्र वाली सीमा लागू नहीं होती। ऐसे मामले में पात्रता और अन्य शर्तें पूरी होने पर फैमिली पेंशन बच्चे को जीवनभर मिल सकती है, यानी ऐसे बच्चे के लिए पेंशन 25 साल की उम्र पूरी होने के बाद बंद नहीं होती।
दोनों माता-पिता की मृत्यु होने पर क्या होगा?
अगर माता और पिता दोनों की मृत्यु हो जाती है, या पेंशनर की मृत्यु के बाद जीवित पति या पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है, तो पात्र बच्चे ऑर्फन पेंशन के लिए योग्य हो सकते हैं। इसके तहत पेंशन की राशि मृत पेंशनर को मिलने वाली पेंशन की 75% तक हो सकती है और न्यूनतम राशि ₹750 प्रति माह है। सामान्य तौर पर यह लाभ बच्चे के 25 साल की उम्र तक मिल सकता है। वहीं, मानसिक या शारीरिक दिव्यांगता वाले बच्चे के मामले में निर्धारित शर्तों के तहत यह पेंशन जीवनभर जारी रह सकती है। इसलिए EPFO पेंशनर की मृत्यु के बाद परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता, लेकिन लाभ लेने के लिए पात्रता और EPFO की क्लेम प्रॉसेस पूरी करना जरूरी है।
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