Source :- LIVE HINDUSTAN
सरकारी तेल कंपनियों के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मई 2026 में LPG की बिक्री सालाना आधार पर 24% घट गई, जबकि पेट्रोल और डीजल की बिक्री क्रमशः 4.8% और 6.4% बढ़ गई। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
देश में ईंधन खपत के आंकड़ों ने ग्राहकों को एक बार फिर चौंका दिया है। मई 2026 के दौरान एलपीजी (LPG) की बिक्री में जहां 24% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। सरकारी तेल कंपनियों के ताजा आंकड़ों ने संकेत दिया है कि देश में ईंधन उपभोग का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डीजल की बिक्री वृद्धि दर पेट्रोल से भी ज्यादा रही, जो सामान्य परिस्थितियों में कम ही देखने को मिलता है। आइए इस रिपोर्ट को जरा विस्तार से समझते हैं।
इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर 4.8% बढ़ी, जबकि डीजल की बिक्री में 6.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की बिक्री भी 1.8% बढ़ी है। ये तीनों सरकारी कंपनियां देश के लगभग 90% पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन बाजार पर कब्जा जमाए हुए हैं, जबकि घरेलू LPG बाजार में इनकी लगभग पूरी हिस्सेदारी है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात LPG की बिक्री में 24% की गिरावट है। अप्रैल 2026 में भी LPG की बिक्री करीब 16% घटी थी, लेकिन मई में यह गिरावट और ज्यादा बढ़ गई। एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं ने सिलेंडर की कीमतों और उपयोग को देखते हुए खरीदारी कम कर दी होगी। इसके अलावा पिछले साल के मुकाबले मांग का आधार भी ज्यादा होने से गिरावट का प्रतिशत बड़ा दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती बिक्री यह दिखाती है कि आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत हो रही हैं। गर्मियों के मौसम में यात्रा और परिवहन गतिविधियों में वृद्धि होने से पेट्रोल की मांग बढ़ी है। वहीं, डीजल की मांग में 6.4% की बढ़ोतरी ने बाजार एक्सपर्ट को भी चौंकाया है। आमतौर पर भारत में डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में ढाई गुना अधिक होती है, इसलिए इसमें उच्च वृद्धि दर देखना असामान्य माना जाता है।
एक्सपर्ट के अनुसार डीजल बिक्री में तेज उछाल का एक बड़ा कारण निजी ईंधन विक्रेताओं से सरकारी पेट्रोल पंपों की ओर ग्राहकों का रुख करना भी हो सकता है। कई इलाकों में थोक डीजल उपभोक्ताओं ने कम कीमत का फायदा उठाने के लिए सरकारी रिटेल पंपों से खरीदारी शुरू कर दी, जिससे सरकारी कंपनियों की बिक्री बढ़ गई। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और कीमतों का प्रभाव उपभोक्ताओं के व्यवहार पर साफ दिखाई दे रहा है।
एविएशन सेक्टर में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। ATF की बिक्री में 1.8% की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की मांग बनी हुई है। पर्यटन, बिजनेस ट्रैवल और एयरलाइन नेटवर्क के विस्तार का असर ईंधन खपत पर साफ दिख रहा है।
हालांकि, पूरे उद्योग की वास्तविक तस्वीर तब सामने आएगी, जब पेट्रोलियम मंत्रालय अगले कुछ दिनों में निजी कंपनियों समेत पूरे सेक्टर का बिक्री डेटा जारी करेगा। फिलहाल, उपलब्ध आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि भारत में ईंधन खपत का स्वरूप बदल रहा है। जहां LPG की मांग कमजोर पड़ती दिख रही है, वहीं पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की बढ़ती खपत देश की आर्थिक गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र की मजबूती का संकेत दे रही है।
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