Source :- LIVE HINDUSTAN
Property: सोचिए, आपने अपना घर खरीदने के लिए 14.5 लाख रुपये दे दिए हों और कुछ समय बाद पता चले कि जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया है, उसका कंस्ट्रक्शन ही रुक गया है। ऊपर से बिल्डर पैसे वापस करने के बजाय आपको इंतजार करने के लिए कहता रहे। ऐसे हालात में आपका पैसा फंस सकता है, लेकिन रेरा (RERA) का एक हालिया फैसला ऐसे घर खरीदारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
हरियाणा में एक होमबायर ने गुरुग्राम के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। उसने बिल्डर को करीब 14.5 लाख रुपये दे दिए, लेकिन कंस्ट्रक्शन की रफ्तार आगे बढ़ने के बजाय प्रोजेक्ट ही अटक गया। मामला हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA तक पहुंचा और अथॉरिटी ने बिल्डर को पूरी रकम ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया।
642 वर्ग फुट का फ्लैट, कीमत 26 लाख रुपये
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज यानी इलाहाबाद के रहने वाले इस खरीदार ने गुरुग्राम के धनवापुर गांव इलाके में करीब 642 वर्ग फुट का फ्लैट बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत करीब 26 लाख रुपये तय हुई थी। बुकिंग के समय खरीदार ने शुरुआत में 1,28,470 रुपये का पेमेंट किया। इसके बाद अलग-अलग समय पर वह करीब 14.5 लाख रुपये बिल्डर को दे चुका था। दिसंबर 2021 में उसे फ्लैट का अलॉटमेंट लेटर भी मिल गया।
..लेकिन इसके बाद कहानी बदल गई। साइट पर पहुंचा तो कंस्ट्रक्शन ही रुका मिला
खरीदार के मुताबिक पैसे देने के बाद उसने कई बार बिल्डर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसे फ्लैट की डिलीवरी को लेकर कोई साफ जवाब नहीं मिला। जब वह खुद प्रोजेक्ट साइट पर पहुंचा तो वहां कंस्ट्रक्शन का काम रुका हुआ था। इतना ही नहीं, कंस्ट्रक्शन पूरा हुए बिना बिल्डर की ओर से उससे आगे की किस्तें भी मांगी जाती रहीं। खरीदार ने और पैसा देने से इनकार कर दिया और अपनी जमा रकम वापस मांगी। बिल्डर ने कथित तौर पर कुछ समय और इंतजार करने को कहा, लेकिन पैसा वापस नहीं मिला। आखिरकार खरीदार ने रेरा का दरवाजा खटखटाया।
RERA ने दिया बड़ा फैसला
हरियाणा रेराे ने मामले की सुनवाई के बाद बिल्डर को खरीदार की पूरी जमा रकम यानी 14.5 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया। खास बात यह है कि रकम पर 10.80% सालाना ब्याज भी देना होगा। ब्याज का कैलकुलेशन हर पेमेंट की तारीख से वास्तविक पेमेंट होने तक की जाएगी। डेवलपर को आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उसके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन ही हो गया था कैंसिल
इस मामले में सबसे अहम बात यह थी कि संबंधित प्रोजेक्ट का रेरा रजिस्ट्रेशन कैंसिल् हो चुका था। अथॉरिटी के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या कैंसिल होने के बाद डेवलपर प्रोजेक्ट का कारोबार आगे नहीं चला सकता। साथ ही गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए तय समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने की संभावना भी नहीं थी।
घर खरीदारों के लिए क्या है नियम?
रेरा एक्ट की धारा 18 ऐसे मामलों में होमबायर्स को राहत देती है। अगर बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा करने या तय समय पर फ्लैट का कब्जा देने में असफल रहता है, तो ऐसी स्थिति में खरीदार रकम की वापसी और ब्याज की मांग कर सकता है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




