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भारत चाह ले तो… जेलेंस्की ने फिर रूसी तेल खरीद को बनाया निशाना, ट्रंप के टैरिफ का समर्थन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक  बार फिर से भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर निशाना साधा है। UNGA में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे जेलेंस्की ने कहा कि अगर भारत, चीन जैसे देश चाह लें, तो रूस युद्ध बंद करने के लिए मजबूर हो जाएगा। क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन्हीं देशों पर टिकी है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक बार फिर से रूस के साथ जारी युद्ध के लिए भारत और चीन जैसे देशों द्वारा खरीदे जा रहे रूसी तेल को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि रूस की पूरी अर्थव्यवस्था बहुत हद तक इन देशों द्वारा खरीदे जा रहे कच्चे तेल पर निर्भर करती है। अगर यह देश रूस के साथ अपने कच्चे तेल की खरीद को बंद कर देते हैं, तो रूस युद्ध करना बंद कर देगा। इसके साथ ही यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अमेरिकी समकक्ष पर भी भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही वह इस युद्ध को खत्म करवाने में मदद करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि पिछले 5 सालों से चल रहा युद्ध जल्दी ही खत्म हो सकता है। वाशिंगटन जर्नल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “रूस की अर्थव्यवस्था भारत, चीन और कभी-कभी तुर्किए पर निर्भर करती है। अगर यह लोग चाह लें और अपनी ऊर्जा खरीद को रूस से बंद कर दें, तो उन्हें (रूस को) युद्ध करना बंद करना ही होगा।” बता दें, तुर्किए भी रूसी तेल का एक बड़ा ग्राहक है। हालांकि, काला सागर में युद्ध की वजह से होते हमलों के कारण उसने अपनी सप्लाई लाइन रोक दी है।

जेलेंस्की ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ के खतरे वाले बिल का किया स्वागत

अमेरिका पहुंचे जेलेंस्की ने अमेरिकी संसद द्वारा पारित किए गए ‘लिंडसे ग्राहम बिल’ का समर्थन किया। इस बिल के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के ऊपर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार होगा। बता दें, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बिल पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। अब यह कानून है।

यूएनजीए में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका पहुंचे जेलेंस्की ने इस फैसले के लिए यूएस संसद और अमेरिकी राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर लिखा, “यह बिल्कुल सही कदम है। एक बार इसे पूरी तरह से लागू कर दिया गया, तो शांति और सुरक्षा निश्चित ही हमारे करीब होगी।”

बता दें, अमेरिका की तमाम धमकियों के बाद भी अभी भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजबैजान देशों ने तेल खरीदना जारी रखा है। लिंडसे ग्राहम बिल के बाद ट्रंप इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की शक्ति रखते हैं।

रूस की रिफाइनरियों पर सबसे बड़ा हमला करके अमेरिका आए हैं जेलेंस्की

बता दें, जेलेंस्की ऐसे समय में अमेरिका पहुंचे हैं, जब कुछ समय पहले ही रूसी रिफाइनरियों पर हमला किया गया है। रूस की राजधानी मॉस्को को भी निशाना बनाया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो युद्ध शूरू होने के बाद यूक्रेन की तरफ से रूसी रिफाइनरियों पर किया गया यह सबसे बड़ा हमला था। इस हमले को लेकर यूक्रेन के ऑफिशियल एक्स हैंडल ने खुशी भी जाहिर की थी। हालांकि, जब रूस ने पलटवार किया। तो जेलेंस्की ने इसे एक बदसूरत हालात करार दिया।

गौरतलब है कि रूस और अमेरिका लगातार भारत और चीन के ऊपर रूसी तेल की खरीद को बंद करने का दबाव बनाते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि, भारत की तरफ से साफ कर दिया गया है कि वह अपने लोगों की जरूरतों के हिसाब से ही तेल खरीदेगा। एक वक्त पर भारत पश्चिम एशियाई देशों से तेल खरीदता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुई जंग की वजह से यह रास्ता भी बंद हो गया है। ऐसे में भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से खरीदता है। भारत सरकार साफ कर चुकी है कि वह बाजार के दामों के अनुसार ही तेल खरीद करेगी। वह हितों पर आंच नहीं आने देगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN