Source :- LIVE HINDUSTAN
UN महासभा की शुरुआत पर इजरायल ने वीडियो लॉन्च किया। इसमें अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते तोते बार-बार ‘इजरायल को दोष दो’ कहते दिखते हैं। इजरायल ने UN पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र पर निशाना साधते हुए एक नया अभियान शुरू किया है। इजरायल के डायस्पोरा अफेयर्स एंड कॉम्बैटिंग एंटीसेमिटिज्म मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के नेशनल पब्लिक डिप्लोमेसी डायरेक्टोरेट ने ‘संयुक्त राष्ट्र का झूठ का उद्योग’ नाम से यह अभियान शुरू किया है। इजरायल का दावा है कि यह अभियान संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ कथित “व्यवस्थित और झूठे पक्षपात” को उजागर करता है।
UN महासभा में दिखाए गए ‘तोते’, बार-बार बोले- ‘इजरायल को दोष दो’
अभियान के तहत इजरायली सरकार ने एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में संयुक्त राष्ट्र महासभा का हॉल दिखाया गया है। इसमें अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए तोते नजर आ रहे हैं। इजरायली मंत्रालयों की ओर से जारी बयान के मुताबिक, वीडियो में ये तोते एक के बाद एक एक ही संदेश दोहराते हैं- “इजरायल को दोष दो।”
वीडियो आगे बढ़ने के साथ यही आवाज बार-बार दोहराई जाती है। पूरे हॉल में इसकी गूंज सुनाई देने लगती है और आखिर में यह एक ऐसे सामूहिक स्वर में बदल जाती है, जिसमें एक ही आरोप बार-बार दोहराया जा रहा है। वीडियो के अंत में संदेश आता है: “झूठ को दोहराने से वह सच नहीं बन जाता।”
इजरायली मंत्री बोले- 1,000 बार दोहराने पर भी झूठ सच नहीं होगा
डायस्पोरा अफेयर्स एंड कॉम्बैटिंग एंटीसेमिटिज्म मंत्री अमिचाई चिकली ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का हॉल बार-बार इजरायल के खिलाफ आरोपों के लिए “इको चैंबर” में बदल गया है। उनके मुताबिक, एक ही बातें मुंह से मुंह, रिपोर्ट से रिपोर्ट और भाषण से भाषण तक पहुंचती रहती हैं और फिर उन्हें एक ऐसी सच्चाई के रूप में पेश करने की कोशिश होती है, जिस पर सबकी सहमति हो।
चिकली ने कहा कि नया वीडियो इसी संस्कृति को उजागर करता है। उन्होंने दावा किया कि झूठ को 1,000 बार दोहराने पर भी वह सच नहीं बनता और इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के पीछे के तथ्यों को सामने लाने का काम जारी रहेगा।
UN की रिपोर्ट्स पर भी उठाए सवाल
इजरायल के डायस्पोरा मंत्रालय ने इस अभियान से जुड़ी एक वेबसाइट भी लॉन्च की है। मंत्रालय के मुताबिक, वेबसाइट का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के प्रकाशनों में मौजूद कथित “झूठ और पक्षपात” को उजागर करना है।
बयान के अनुसार, यह वेबसाइट नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NCS) के सहयोग से तैयार की गई है। इसमें ऐसे शोध और स्रोत शामिल किए गए हैं, जिनके जरिए यह दस्तावेज तैयार करने का दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर के हमलों के बाद इजरायल से जुड़ी पक्षपाती जानकारी किस तरह जुटाई गई, उसे संस्थागत समर्थन मिला और फिर दुनिया भर में फैलाया गया।
यूएन में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “UN जनरल असेंबली के हाई-लेवल हफ्ते के दौरान सेक्रेटरी-जनरल के तौर पर अपने आखिरी भाषण में भी, गुटेरेस ने इजरायल पर राजनीतिक आरोप लगाने के लिए मंच का इस्तेमाल किया और “नस्लीय सफाए” जैसे चौंकाने वाले आरोप लगाए। गुटेरेस, यह कूटनीति नहीं है। यह UN के बैनर तले इजरायल-विरोधी प्रोपेगैंडा है। आपने अपने पद को इजरायल पर हमला करने का जरिया बना लिया है और संगठन की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया है। अब नए नेतृत्व की जरूरत है।”
वेबसाइट पर इन मुद्दों का भी जिक्र
अभियान से जुड़ी वेबसाइट पर कई मुद्दों को शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- सूचना में कथित हेरफेर
- इजरायल के प्रति दुश्मनी पर आधारित कथित संगठित संस्कृति
- गाजा में भुखमरी को लेकर कथित गलत दावे
- UNRWA में हमास की कथित घुसपैठ
- “नरसंहार” की कथित कहानी गढ़ना
बयान में यह भी कहा गया है कि वेबसाइट पर संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों की गवाहियां शामिल हैं, जिनमें कथित तौर पर आंतरिक चुप्पी और उत्पीड़न की बात सामने आती है।
इजरायली अधिकारी का दावा- UN रिपोर्ट्स से फैलते हैं आरोप
नेशनल पब्लिक डिप्लोमेसी डायरेक्टोरेट की प्रमुख त्जिपी हॉटोवेली ने आरोप लगाया कि इजरायल के खिलाफ लगाए जाने वाले झूठे और गंभीर आरोपों का एक बड़ा हिस्सा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स से आता है। उन्होंने गाजा में भुखमरी को लेकर चलाए गए कथित “झूठे अभियान” को इसका एक उदाहरण बताया। हॉटोवेली ने कहा कि इस तरह के प्रचार के सामने इजरायल सच्चाई और तथ्यों को सामने रखकर उसके खिलाफ चलाए जा रहे कथित “झूठ के उद्योग” को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।
वीडियो में दिखाया गया ‘इको सिस्टम’
इजरायली संगठन के मुताबिक, वीडियो वेबसाइट पर बताए गए एक केंद्रीय तंत्र को दिखाता है- एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय सिस्टम जो खुद ही अपनी बात को दोहराता रहता है। संगठन का आरोप है कि इजरायल के खिलाफ लगाए गए दावे अलग-अलग संस्थाओं, देशों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और मीडिया संस्थानों के बीच पहुंचते हैं। फिर इन्हीं दावों को बार-बार क्वोट किया जाता है और उन्हें एक स्वीकृत तथ्य जैसा रूप मिल जाता है, भले ही उनके मूल स्रोत की जांच या पुष्टि न की गई हो। यह अभियान मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप की राजधानियों की इजरायल संबंधी नीतियों पर केंद्रित है। इसे सरकारी विज्ञापन एजेंसी (Lapam) के जरिए तैयार किया गया है।
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