Source :- LIVE HINDUSTAN
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खाड़ी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान पर हमले नहीं करेगा।
पश्चिम एशिया में बीते 5 महीने से तनाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं। बीच बीच में संवाद की स्थिति बनती दिखती भी है, लेकिन फिर हमले शुरू होते ही हालात दोबारा बिगड़ जाते हैं। कई हफ्तों से यही पैटर्न रिपीट हो रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सप्ताह कहा है कि वे एक बात फिर कूटनीतिक रास्ते पर लौटेंगे। हालांकि इस बयान के बाद ही ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान पर बहुत बड़ा हमला करने वाले थे और यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला होता।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत बड़े सैन्य हमले पर की सोच रहा था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला होता और ईरान के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता। उनके इस बयान से ईरान का आगबबूला होना तय है। ट्रंप ने आगे कहा कि सोमवार से दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने जा रही है। हालांकि उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी कि यह बातचीत कहां होगी।
क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप के मुताबिक उन्होंने भयंकर विनाश को रोकने के लिए इस सैन्य कार्रवाई को रोक दिया। ट्रंप ने कहा कि अगर यह हमला होता तो ईरान को दोबारा बनने में सालों-साल लग जाते। ट्रंप ने कहा, “मैं समझौता करना पसंद करूंगा। इससे कई लोगों की जानें बचेंगी। मैं लोगों को मारना नहीं चाहता क्योंकि युद्ध में बहुत लोग मारे जाते हैं।” वहीं सऊदी अरब और सहयोगियों के दबाव को लेकर ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों ने भी कूटनीति का समर्थन किया।
होर्मुज भी खुलेगा
गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस युद्ध में ईरान पर नए सैन्य हमले का आदेश नहीं देंगे। ट्रंप ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोल दिया जाएगा।
ट्रंप ने कहा था, ‘’अनुरोध के आधार पर मैंने दुनिया के भविष्य के हित में और साथ ही एक सफल और समृद्ध ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए फिलहाल हमलों को रोकने पर सहमति दी है, बशर्ते कि जल्द ही कोई समझौता हो।” वहीं ईरान के रक्षा मंत्री का कहना है कि उन्हें अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि ट्रंप की हालिया घोषणा से ईरान ‘न तो हैरान है और न ही कोई ढिलाई बरत रहा है।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका से मिलने वाली धमकियों के बीच ईरान पूरी तरह सतर्क और सजग है।
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