Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब होर्मुज समुद्री मार्ग बंद था, तब अमेरिका ने ईरान के तरीके का इस्तेमाल करके तेहरान के हमलों से बचते हुए खाड़ी से करीब 9 करोड़ बैरल तेल  की तस्करी की।

दुनिया का स्वघोषित ‘चौकीदार’ और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला अमेरिका अब खुद एक बड़े तेल तस्कर के रूप में सामने आया है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब पूरी दुनिया को तेल सप्लाई करना वाला होर्मुज समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया था, तब अमेरिका ने तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसका इस्तेमाल वर्षों से ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए करता रहा है। इस होर्मुज बंदी का फायदा उठाकर अमेरिकी सेना ने ईरान की उसी ‘स्मगलिंग तकनीक’ का इस्तेमाल कर करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को चोरी-छिपे बाहर निकाला है, जिसे वह दशकों से ‘अवैध’ बताकर ईरान पर प्रतिबंध लगाता रहा है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त तरीके में शिप-टू-शिप तेल ट्रांसफर, सुरक्षा के लिए हवाई और पानी वाले ड्रोन का इस्तेमाल और तेल ले जाने के लिए शटलिंग तकनीक शामिल है। बता दें कि यह तरीका ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल करता रहा है। रॉयटर्स द्वारा देखे गए शिपिंग डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, इस तरीके से तेल का ट्रांसफर मई की शुरुआत में ही शुरू हो गया था और अब तक कम से कम 92 जहाजों के जरिए तेल की तस्करी की जा चुकी है।

ईरान के ‘प्लेबुक’ से ही की चोरी

उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों ने अमेरिका की इस ‘डकैती’ की पोल खोल दी है, जिसमें 11 जून को भी 17 जोड़ी जहाजों को तेल का अवैध लेन-देन करते देखा गया। उपग्रह तस्वीरों और शिपिंग डेटा से पता चला है कि तेल का स्थानांतरण मुख्य रूप से दो स्थानों पर किया गया। इनमें एक यूएई के फुजैराह और दूसरा ओमान का सोहार तट है। ये दोनों स्थान हॉर्मुज समुद्री मार्ग के प्रवेश क्षेत्र के बेहद करीब स्थित हैं।

रात के अंधेरे में ‘सुपरपावर’ की कायरता

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन अमेरिकी सेना के पूर्ण नियंत्रण में था। जब ये टैंकर होर्मुज के खतरनाक रास्तों से गुजरते थे, तो पकड़े जाने के डर से इनके ट्रांसपोंडर बंद कर दिए जाते थे और जहाजों की लाइटें मद्धम कर दी जाती थीं। यूएई के फुजैराह और ओमान के सोहार तट के पास ये टैंकर चोरी-छिपे बड़े जहाजों (VLCCs) में तेल भरते थे, जिसमें 24 से 40 घंटे का समय लगता था। इस दौरान जहाज अलग-अलग समय पर रवाना होते थे और एक-दूसरे से लगभग 3-4 किलोमीटर की दूरी बनाए रखते थे।

अपाचे हेलीकॉप्टर का गिरना: चोरी की कीमत?

अमेरिका की इस तेल तस्करी की जिद ने उसके सैनिकों की जान को भी जोखिम में डाला। 9 जून को होर्मुज के ऊपर जो अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर गिराया गया था, वह इसी गुप्त तेल मिशन की सुरक्षा में लगा हुआ था। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इसका दोष ईरान पर मढ़ा, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका अपनी अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर रहा था।

नैतिकता का दोहरा मापदंड

यह बेहद शर्मनाक है कि जो अमेरिका ईरान पर ‘मास्किंग’ और अवैध निर्यात का आरोप लगाकर दुनिया भर में शोर मचाता रहता है था, आज वही मास ट्रांसफर के जरिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को तेल भेजने के लिए ईरान की ही तकनीकों की नकल कर रहा है। भले ही ट्रंप अब होर्मुज को फिर से खोलने और शांति समझौते का दावा कर रहे हों, लेकिन 9 करोड़ बैरल तेल की इस तस्करी ने अमेरिका के ‘ईमानदार’ होने के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। दरअसल, यह केवल तेल का व्यापार नहीं, बल्कि एक वैश्विक शक्ति द्वारा की गई व्यवस्थित समुद्री डकैती है, जिसने साबित कर दिया है कि अपने स्वार्थ के लिए अमेरिका किसी भी हद तक गिर सकता है।

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